>>: खाद्य पदार्थो में मिलावटखोरी के मामले दबाने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित वर्मा निलंबित

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छतरपुर. मिलावटी व अमानक खाद्य पदार्थो के केस दबाने के आरोप में खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित वर्मा को सागर कमिश्नर डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने निलंबित कर दिया है। अमित वर्मा मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर हमेशा सुर्खियो में रहे। इतना ही नहीं गुटखा कारोबारियों के यहां छापेमारी कर मामलो को रफादफा करने के आरोप भी वर्मा पर लगते रहे हैं। हालांकि कमिश्नर ने मिलावटी पदार्थो की रिपोर्ट पर कार्रवाई न करने पर कार्रवाई की है।

मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की
कलेक्टर छतरपुर के प्रस्ताव से अवगत कराया गया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं मानक अधिनियम के तहत मानक स्तरों की जांच हेतु 21 नमूने लिए गए थे। उक्त 21 नमूने खाद्य विश्लेषण, राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, ईदगाह हिल्स, भोपाल के द्वारा अमानक घोषित कर किए गए। अधिनियम की धारा 46 के तहत अपील करने की सूचना देने के उपरान्त भी आरोपी द्वारा खाद्य सुरक्षा और मानक नियम के अन्तगर्त निर्धारित समयावधि तीस दिन के भीतर खाद्य विश्लेषण के जांच प्रतिवेदन के विरुद्ध कोई अपील नहीं की गई है। अधिनियम की धारा 36 (3) (ड) में है कि समय सीमा में अभिहित अधिकारी द्वारा जुर्माने से दंडनीय उल्लंघनों के मामले में अभियोजन की मंजूरी देना या अभियोजन आरंग्भ करना प्रावधानित है। अमित वर्मा द्वारा उक्त अभियोजन स्वीकृति समय-सीमा में नहीं ली गई व समय-सीमा में नहीं दी गई और न ही इस ओर कोई ध्यान दिया गया, जिससे मिलावट खोरों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही नहीं हो सकी।

कलेक्टर के नोटिस का जवाब तक नहीं दिया
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अधीन किसी अपराध के कारित होने की तारीख से एक वर्ष की अवधि में प्रस्तुत करने में हुये विलम्ब का कारण व अधिनियम की धारा 77 के अनुसार अभियोजन अनुमोदन हेतु प्रस्तुत नोट शीट में दस्तावेज प्रस्तुत न करने व विलम्ब से प्रस्तुत करने पर कलेक्टर छतरपुर द्वारा वर्मा को कारण बताओ नोटिस दिया गया था, जो दिनांक 18 अगस्त 2023 को वर्मा को प्राप्त होने से उपरांत भी उनके द्वारा उक्त नोटिस का जवाव प्रस्तुत नहीं किया गया।

सिविल सेवा आचरण का भी किया उल्लंघन
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण अपील) नियम 1966 के नियम-16 के अन्तर्गत लघुशास्ति हेतु आरोप ज्ञापन जारी कर 10 दिवस में वर्मा से उत्तर चाहा गया था। किन्तु वर्मा द्वारा उक्त आरोप ज्ञापन के संबंध में उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया है, जो उनकी स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है। अमित वर्मा का उक्त कृत्य गंभीर अनियमितता, स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता का द्योतक एवं पदीय कर्तव्यों के प्रतिकूल होकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम का उल्लघंन है। इसलिए अमित वर्मा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के अन्तर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में वर्मा का मुख्यालय, कार्यालय कलेक्टर जिला छतरपुर नियत किया गया है एवं निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

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