छतरपुर. बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रीकृष्णा यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के साथ आध्यात्मिक संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको चित्र में नहीं चरित्र में ध्यान देना है। एकाग्रचित मन से संकल्प के साथ किया गया कार्य निश्चित ही सफलता प्रदान करेगा। इत्र से केवल तन महकता चरित्र से जीवन महकता है। अर्थात से अच्छे चरित्र का निर्माण कर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थी अच्छी शिक्षा ग्रहण करें और मन के भटकाव को दूर करने के लिए रामचरित मानस एवं हनुमान चालीस का पाठ करें। भारत के महान संतों की जीवनी का अध्ययन करें। उनसे प्रेरणा लें।
सनातन का अर्थ सदा रहने वाला
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने कहा कि कुछ हजार साल पहले हिन्दू धर्म जैसी कोई चीज नहीं थी । हिन्दू इस धरती का था, और सनातन धर्म यहां का धर्म। सनातन का शाब्दिक अर्थ है शाश्वत या सदा बना रहने वाला, यानी जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म जिसे हिन्दू धर्म अथवा वैदिक धर्म के नाम से भी जाना जाता है। इसे दुनिया के सबसे प्राचीनतम धर्म के रूप में भी जाना जाता है। भारत की सिंधु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिह्न मिलते हैं। सनातन धर्म, आध्यत्म के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आध्यात्मिकता का किसी धर्म, संप्रदाय या मत से कोई लेना-देना नहीं है। आप अपने अंदर से कैसे हैं, आध्यात्मिकता इसके बारे में है। आध्यात्मिकता का मतलब है, भौतिक से परे जीवन को अनुभव कर पाना। आप सृष्टि के सभी प्राणियों में भी उसी परम सत्ता के अंश को देखते हैं, जो आपमें है, तो आप आध्यात्मिक हैं। अगर आपको बोध है कि आपके दुख, आपके क्रोध, आपके क्लेश के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है, बल्कि आप खुद इनके निर्माता हैं, तो आप आध्यात्मिक मार्ग पर हैं।
महाराज ने छात्रों के सवालों के उत्तर दिए
आध्यात्मिक समाधान सत्र में उपस्थित विद्यार्थियों ने पीठाशीश्वर से धर्म, योग, अध्ययन, आध्यात्मिक, मन की एकाग्रता और लक्ष्य निर्धारण कर उसे प्राप्त करने से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिसका सहज भाषा और भाव से उन्होंने उत्तर देते हुए विद्यार्थियों को समझाया कि जब कोई संस्कृति और विचारधारा इतनी समृद्धशाली, विवेकशील होगी, उन्नत होगी, क्रांतिकारी होगी तो फिर उस संस्कृति और विचारधारा की स्वत: उन्नति होगी, स्वत: ग्रहण करने प्रेरणा होगी। आज हम यह निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि इन्हीं विशेषताओं को लेकर दुनिया भर में सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ी है। सनातन धर्म की विचारधारा को स्वीकार्य करने की क्रियाएं बढ़ी है।
5 हजार प्लेसमेंट दिए
इससे पहले संवाद के प्रारंभ में स्वागत भाषण चैयरमेन डॉ. पुष्पेंद्र सिंह गौतम ने दिया। उन्होंने विवि में संचालित विभागों और उनके अन्तर्गत पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि रोजगारपरक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप ही यहां विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही हैं। 5 वर्षों से प्लेसमेन्ट एवं रोजगार मेला द्वारा यहां अंतिम वर्ष में अध्ययन करते हुए ही 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उच्च स्तर की अच्छे पैकेज के साथ नौकरी भी मुहैया करा चुके हैं। कार्यक्रम के अंत में कुलाधिपति डॉ. बृजेन्द्र सिंह गौतम ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुदेव ने आशीष वचनों से विश्वविद्यालय परिवार को कृतार्थ किया। संचालन बागेश्वर धाम पीठ के सेवक नीतेंद्र चौबे ने किया।