छतरपुर. खजुराहो सीट छतरपुर और कटनी जिले के कुछ क्षेत्रों तक फैली हुई है। छतरपुर, पन्ना और कटनी जिले तक फैला खजुराहो हमेशा से ही राजनीति का केंद्र रहा है। खजुराहो लोकसभा सीट का नाम लोकसभा चुनावों के इतिहास में अब तक बुंदेलखण्ड से सबसे ज्यादा बार महिला प्रत्याशियों को संसद में भेजने वाली सीट के रुप में दर्ज है।
विद्यावती चतुर्वेदी और उमा भारती 6 बार चुनी गई
प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर व अलौकिक मूर्तियों के लिए विश्वविख्यात खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। खजुराहों की कुल जनसंख्या 25 लाख 87 हजार 685 है जिसमें से 81 प्रतिशत आबादी गांवों में और 18 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में निवास करती है। खजुराहो लोकसभा सीट पर पहला चुनाव साल 1957 में हुआ। 1980,1984 में विद्यावती चतुर्वेदी एवं उमा भारती ने 1989,1991, 1996 और 1998 का चुनाव भी जीता। 1999 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां से सत्यव्रत चतुर्वेदी को टिकट दिया। सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस की इस सीट पर वापसी कराई और वह यहां से सांसद बने। 2004 में बीजेपी ने एक बार फिर यहां पर वापसी की भाजपा के रामकृष्ण कुसमरिया ने सत्यव्रत चुतर्वेदी को मात दी। भाजपा ने इसके बाद अगले 2 चुनावों में यहां से अपने उम्मीदवार को बदला और दोनों ही बार उसको जीत मिली। खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं चंदला,गुनौर,मुरवारा, राजनगर,पन्ना, बहोरीबंद ,पवई, विजयराघवगढ़ यहां की विधानसभा सीटें हैं। यहां की 6 सीटों पर भाजपा और 2 पर कांग्रेस का कब्जा है।
दमोह से महिला उम्मीदवार सबसे कम
प्रदेश से महिला मतदाता अब निर्णायक भूमिका में हैं और महिला मतदान पहले की अपेक्षा अधिक होने लगा है। वहीं, प्रदेश में 1957 से पिछले चुनाव यानी 2019 तक सर्वाधिक महिला उम्मीदवार खजुराहो में 27, भोपाल में 23, रायगढ़ में 20, रीवा में 19 और इंदौर में 17 महिलाएं अपना भाग्य चुनाव में आजमा चुकी हैं। प्रदेश में नए परिसीमन के बाद 2004 से कुछ क्षेत्रों के नए नामकरण हो गए हैं, उन क्षेत्रों में अभी तक 2 से 4 महिला उम्मीदवार चुनाव में अपना भाग्य आजमा चुकी हैं। वैसे 1996 के चुनाव में प्रदेश से 75 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव में खड़ा होकर एक रिकॉर्ड बनाया था। सबसे कम यानी एक मात्र उम्मीदवार दमोह से 1971 में खड़ी हुई थी, जो न्यूनतम महिला उम्मीदवार का रिकॉर्ड है।