>>: Digest for February 06, 2021

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Table of Contents

जबलपुर। गौर नदी किनारे बने रेन बसेरा तोडऩे पहुंचे पुलिस और नगर निगम अमले को देखकर अवैध निर्माण करने वाले गुंडे को हार्ट अटैक आ गया। अधिकारियों ने तत्काल एम्बुलेंस बुलाकर उसे अस्पताल में भर्ती करवाया है। वहीं अवैध निर्माण को तोडऩे की कार्रवाई जारी है। माफिया के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत आज शुक्रवार की सुबह जिला प्रशासन द्वारा पुलिस और नगर निगम के साथ जबलपुर तहसील के अंतर्गत ग्राम गौर में नदी के सौ मीटर के दायरे में किये गये अवैध निर्माण को ध्वस्त किये जाने की कार्यवाही प्रारम्भ की गई।

 

लगभग 39 हजार वर्गफुट शासकीय भूमि
एसडीएम जबलपुर नमः शिवाय अरजरिया के अनुसार गौर में होटल रैनबसेरा के संचालक मुन्ना सोनकर द्वारा गौर नदी के क्षेत्र में अवैध रूप से लॉन बना लिया गया है और समीप ही बिना अनुमति के रिहायशी भवन भी बनाया जा रहा है ।लगभग 39 हजार वर्गफुट भूमि पर नियम विरुद्ध किये गये इन निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्यवाही कलेक्टर कर्मवीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा के निर्देश पर आज सुबह प्रारम्भ की गई । एसडीएम जबलपुर के मुताबिक गौर नदी के कैचमेंट और हाई फ्लड लेवल क्षेत्र तथा रास्ता मद की जिस भूमि पर नगर निगम की बिना अनुमति के लॉन और भवन का निर्माण किया गया हैं अकेले उस भूमि की कीमत ही आठ करोड़ रुपये के आसपास है ।

कार्यवाही के दौरान मौके पर मौजूद एसडीएम रांझी दिव्या अवस्थी के मुताबिक मुन्ना सोनकर थाना बरेला में निगरानीशुदा बदमाश है। उन्होंने बताया कि नदी और रास्ते की भूमि पर अतिक्रमण कर उसके द्वारा किये गये निर्माण की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है जिसे हटाने की कार्यवाही की जा रही है।

जबलपुर। आम बजट 2021-22 में इंदौर-जबलपुर नई रेल लाइन को टोकन मनी मिलने से तीन वर्ष से लंबित योजना के आकार लेने की सम्भावना बची हुई है। वहीं, कई वर्ष पहले सर्वे हो चुके जबलपुर से दमोह सीधे रेल लाइन बनने की उम्मीद को झटका लगा है। आम बजट में मिली राशि से रेल मंत्रालय ने इंदौर-जबलपुर सीधी नई रेल लाइन परियोजनों के लिए एक हजार रुपए का प्रावधान किया है। इससे यह तय हो गया है कि रेलवे की दिलचस्पी अभी भी इस ट्रैक को तैयार करने में है। तीन साल पहले सर्वे व डीपीआर बनने के बाद से आगे काम नहीं हुआ था।

बजट में गाडरवारा-बुधनी-इंदौर रेल लाइन के लिए 1 हजार रुपए का प्रावधान
जबलपुर-इंदौर नए ट्रैक को टोकन मनी, दमोह लाइन की उम्मीद टूटी

गाडरवारा से बनेगा नया रास्ता
पश्चिम मध्य रेलवे की जबलपुर-इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में नया रास्ता गाडरवारा से इंदौर के बीच बनना है। यह लाइन गाडरवारा-उदयपुरा-शाहगंज-बुदनी होते हुए इंदौर को जोड़ेगी। यह परियोजना पिछड़े क्षेत्रों के विकास और इंदौर से जबलपुर एवं दक्षिण भारत की यात्रा को बेहतर और कम समय में पूरा करने वाला बनाने के लिए तैयार की गई है। इस ट्रैक के बनने से इटारसी और भोपाल जाने की जरूरत नहीं होगी। जबलपुर से रवाना होकर ट्रेक गाडरवारा से बुधनी होकर इंदौर जाएगा।

 

Gadarwara-Budni-Indore new

अब नए सिरे से बनेगी योजना
रेलवे ने वर्ष 2016-17 में गाडरवारा-बुधनी के रास्ते जबलपुर से इंदौर नया रेल मार्ग बनाने की घोषणा की थी। पहले एक निजी कम्पनी के साथ पीपीपी मोड पर ट्रैक तेयार करने का प्रस्ताव था। कम्पनी के कदम पीछे खींचने पर राज्य सरकार ने आर्थिक भागीदारी का प्रस्ताव देकर रेल लाइन का कार्य शुरू कराने कवायद की थी। नींव पडऩे के बाद से आने वाले बजट में राशि प्राप्त नहीं होने से योजना ठप पड़ी थी। अब बजट में प्रावधान के बाद इस रेल मार्ग परियोजना को नए सिरे से तय करने के साथ ही भूमि अधिग्रहण सहित अन्य कार्य शुरू होने की सम्भावना है।

जबलपुर-गोंदिया दोहरीकरण का इंतजार
जबलपुर-नैनपुर-गोंदिया नैरोगेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदले जाने के बाद इस मार्ग में दूसरी लाइन की योजना के लिए राशि मिलने की उम्मीद की जा रही थी। सूत्रों के अनुसार बजट में नैरोगेज के अमान परिवर्तन के शेष कार्य को पूरा करने के लिए ही अभी राशि का प्रावधान किया गया है। दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे को अमन परिवर्तन के लिए 285.50 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसमें बालाघाट-कटंगी, छिंदवाड़ा-नागपुर, छिंदवाड़ा-मंडलाफोर्ट और नागभीड़-नागपुर रेल लाइन की योजना शामिल है। इस योजना के तहत जबलपुर-नैनपुर-गोंदिया और बालाघाट-कटंगी, नैनपुर-मंडला ओर नागपुर-छिंदवाड़ा के बीच ब्रॉडगेज लाइन तैयार हो चुकी है। नैनपुर-सिवनी-छिंदवाड़ा और कटंगी-तिरोड़ी के बीच लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है।

जबलपुर-इंदौर रेल लाइन परियोजना
342 किमी लंबा रेलमार्ग
4320 करोड़ रुपए लागत
90 किमी दूरी घट जाएगी
(नोट: तीन वर्ष पहले रेलवे की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार)

जबलपुर। रसोई में उपयोग होने वाले खाद्य तेल, चावल, प्याज और रसोई गैस की तरह कई ऐसी चीजें हैं जिनमें दाम आसमान पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में आम आदमी को घर चलाना मुश्किल हो रहा है। लगातार चीजें महंगी होती जा रही हैं। स्थिति यह है कि खाद्य तेल के दाम जो कई महीनों तक स्थिर रहते थे, उसमें दो से चार दिन में 150 से 200 रुपए तक का अंतर आ रहा है। चावल के दाम भी 5 से 6 रुपए तक तेज हो गए हैं। रसोई गैस का एक सिलेंडर पहले ही 700 रुपए में मिल रहा है।लोगों के घर का बजट बिगड़ गया है। कोरोना के लॉकडाउन को हटे हुए महीनों बीत चुके हैं। हर चीज का उत्पादन भी लगभग पटरी पर आ चुका है। ऐसे में अब दैनिक उपयोग खासकर खाद्य सामग्री की ऐसी कमी नहीं है। लेकिन लगातार महंगाई ने सीमित आय वालों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। तेल की कीमतें बढऩे से बाजार में खाने-पीने की चीजों के दामों में अंतर आ गया है।

 

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तेल की 2 हजार रुपए तक कीमत
सोयाबीन तेल, सरसो तेल, मंूगफली तेल और सूरजमुखी के तेल महंगे हो गए हैं। लॉकडाउन के पहले तक सोयाबीन का 15 किग्रा का कंटेनर 12 से 14 रुपए के बीच था, वह 21 सौ रुपए तक पहुंच गया है। करीब एक महीने पहले तक वह 18 सौ रुपए तक था, लेकिन बीते करीब एक सप्ताह में कीमत 21 सौ रुपए तक पहुंच गई। वहीं लीटर में तेज 125 रुपए तक बिक रहा है। जबकि कुछ समय पहले यह 105 से 110 रुपए था। इसी प्रकार सरसो तेल 140, मूंगफली 160, राइस ब्रांड 140 और सूरजमुखी का तेल भी 140 रुपए लीटर तक पहुंच गया है। अनाज एवं तेल व्यापारी सौरभ साहू ने बताया कि तेलों की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा प्रभाव ग्राहकी पर पड़ा है।

पेट्रोल और डीजल फिर तेज
वाहनों के ईंधन में भी आग लगी हुई है। पेट्रोल 94 रुपए 53 पैसे और डीजल 84 रुपए 85 पैसे लीटर हो गया है। बीते कुछ महीनों में यह अभी तक सबसे ऊंची कीमत है। ऐसे में लोगों को एक लीटर ईंधन भरवाने के लिए 100 रुपए तो देने पड़ते हैं। जबकि पिछले जून के महीनें में पेट्रोल 77.58 तो डीजल 68.31 रुपए लीटर बिक रहा था।

जबलपुर. चोरों ने बड़े आराम से शिक्षक दंपति के घर को खंगाल दिया। घर में कोई था नहीं, लिहाजा चोरों को पूरा मौका मिला जिसका फायदा उठाते हुए उन्होंने आलमारी तोड़ कर उसमें रखी नकदी और जेवरात बटोर लिया। दरअसल पति-पत्नी दोनों ही पेशे से शिक्षक हैं और दोनों ही अपने काम पर गए थे और बच्चे भी घर पर नहीं थे। घटना सिहोरा थाना क्षेत्र की है।

सिहोरा पुलिस के मुताबिक चोरों ने आलमारी तोड़कर 25 हजार नकदी सहित सोने की तीन अंगूठी, एक जोड़ी झुमकी, एक मंगलसूत्र, पेंडल, चांदी की एक जोड़ी पायल चुरा लिया। चोर छत के रास्ते घर में घुसे थे। पीड़ित सुनील तिवारी ने बताया कि उसके घर के बगल में मकान बन रहा है। इसी निर्माणाधीन मकान से चोर उनके छत पर पहुंचे होंगे। एक लोहे की रॉड भी बेड पर पड़ी थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। इस चोरी का पता तब चला जब शिक्षक दंपति वापस घर लौटे।

जानकारी के अनुसार अद्दू मोहल्ला निवासी सुनील तिवारी और उनकी पत्नी निधि तिवारी शिक्षक हैं। दोनों प्राथमिक शाला भिटोनी में तैनात हैं। दोनों रोज की तरह गुरुवार सुबह 11 बजे स्कूल चले गए थे। बच्चे प्रियांश और प्रगति अपनी नानी के घर ओम कॉलोनी गए थे। शाम को दंपती स्कूल से लौटे तो घर का हाल देख दंग रह गए। अंदर सारे कमरे का ताला टूटा मिला। कमरों का सारा सामान बिखरा हुआ था।

जबलपुर। राजस्थान के भीलवाड़ा से टाइल्स लेकर सिहोरा जा रहा एक ट्रक बुधवार रात मंझौली के कटाव के पास पुल से लगभग आठ फीट नीचे जा गिरा। हादसे में ट्रक सवार दोनों ड्राइवर ट्रक के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद ट्रक हटाकर शवों को निकाला जा सका। गुरुवार को पुलिस ने शवों का पीएम कराने के बाद परिजन के सुपुर्द किया। मझौली थाना प्रभारी प्रभात शुक्ला ने बताया कि राजस्थान के भीलवाड़ा के माधवगढ़ गांव निवासी दुर्गालाल मेगवंशी (35) और भगुनगर निवासी भंवर सिंह (31) ट्रक आरजे 09 जीबी 3286 लेकर भीलवाड़ा से सिहोरा जा रहे थे। ट्रक में टाइल्स लोड थी।

भीलवाड़ा से आ रहा था ट्रक, जाना था सिहोरा

नए की जगह पुराने ब्रिज पर पहुंचा ट्रक
ट्रक लेकर चालक रात लगभग पौने दस बजे कटाव के पास पहुंचे। उन्हें नए ब्रिज से निकलना था, लेकिन ट्रक चालक ने पुराने ब्रिज पर ट्रक मोड़ दिया। वहां ट्रक अनियंत्रित हुआ और नीचे जा गिरा। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग दहशत में आ गए। पुलिस ने ट्रक में लिखे नम्बर पर फोन लगाया, तो पता चला कि ट्रक राजस्थान भीलवाड़ा के नाहरगढ में रहने वाले नारायण दास जाट के नाम है। नारायण से बातचीत के आधार पर ही दोनों ड्राइवरों के नामों का खुलासा हो सका। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने दोनों शवों को ट्रक से निकाला। जानकारी लगते ही ट्रक मालिक समेत मृतकों के परिजन भीलवाड़ा से रवाना हुए। गुरवार सुबह सभी सिहोरा पहुंच गए। वहां शवों का पीएम कराने के बाद पुलिस ने उन्हें परिजन को सौंप दिया।

जबलपुर/ सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि प्रत्येक थाने में होने वाले एफआइआर पुलिस वेबसाइट पर अपलोड की जाए, लेकिन जिले के थानों में ऐसा हो नहीं रहा है। पिछले 24 घंटे में शहर में अधिकतर थानों में एफआइअर अपलोड नहीं की गई है। थाना प्रभारी मनमाने अंदाज में यह काम कर रहे हैं। कहीं-कहीं कई-कई दिनों तक एफआइआर वेबसाइट में अपलोड नहीं की जा रही है। इसका खुलासा गुरुवार को उस वक्त हुआ, जब पत्रिका ने मध्य प्रदेश पुलिस के सिटीजन पोर्टल में जबलपुर पुलिस द्वारा सार्वजनिक की गई एफआईआर की स्थिति देखी।

सुप्रीम कोर्ट भी दिखा चुका है सख्ती, फिर भी नहीं चेत रहे जिम्मेदार
मनमानी पर आए थानेदार, समय पर अपडेट नहीं हो रही एफआइआर
सुप्रीम कोर्ट ने यह दिए हैं आदेश- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि पुलिस वेबसाइट पर एफआइआर अपलोड की जाए। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी एफआईआर पुलिस वेबसाइट में अपलोड क्यों नहीं की जा रही है।

केस:- 01
थाना:- ओमती
आखिरी अपडेट:- 02 फरवरी
पोर्टल में आखिरी अपराध:- 61/21
वर्तमान में अपराध:- 63/21
हालात: पुलिस थाने में एक से चार फरवरी तक कुल 63 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। लेकिन महज 61 एफआईआर को ही सार्वजनिक किया गया। दो फरवरी के बाद किसी भी एफआईआर को एमपी पुलिस के सिटीजन पोर्टल पर नहीं चढ़ाया गया।

केस:- 02
थाना:- ग्वारीघाट, आखिरी अपडेट:- 29 जनवरी, पोर्टल में आखिरी अपराध:- 61/21
वर्तमान में अपराध:- 67/21
हालात:- पुलिस ने एक जनवरी से लेकर चार फरवरी तक कुल 67 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। लेकिन थाने द्वारा महज 61 एफआईआर को ही सार्वजनिक किया गया। 29 जनवरी के बाद किसी भी एफआइआर को एमपी पुलिस के सिटीजन पोर्टल पर नहीं चढ़ाया गया।
(सभी केसों की जानकारी गुरुवार शाम सात बजे तक)

जबलपुर. अब अमेजन पर मिलेंगी जबलपुर के कारीगरों की कृतियां। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा की पहल पर ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन और स्थानीय मूर्तिकारों के बीच करार हो गया है। योजना के तहत उद्योग विभाग के अधिकारी और अमेजन की स्थानीय फ्रेंचाइजी टीम ने दुनिया भर में विख्यात भेड़ाघाट पहुंच कर विभिन्न मूर्तिकारों से मिल चुके हैं। बताया जा रहा है कि इन मूर्तिकारों को तीन महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, उसके बाद वो घर बैठे अपनी कला को ऑनलाइन दुनिया भर में बेच पाएंगे।

बता दें कि ये वही मूर्तिकार हैं जो कोरोना और लॉकडाउन के चलते टूट चुके थे। लगातार बंदी के कारण इनकी कला को ग्राहक नहीं मिल रहे थे। यहां तक कि गणेश पूजा के समय भी इनका माल नहीं बिका। अनुमति ही नहीं मिली। दुर्गापूजा के दौरान भी बड़ी व ऊंची मूर्तियों के निर्माण पर प्रतिबंध था। ऐसे में अब कलेक्टर की पहल से इनके दुर्दिन दूर होंगे। ऐसी उम्मीद की जा रही है।

बता दें कि कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने जिले के मूर्तिकारों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की पहल की है। इसके तहत उन्होंने मूर्तिकारों के साथ ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन से अनुबंध कराया। कलेक्टर भेड़ाघाट पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने यहां के मूर्ति बाजार को देखा। मूर्तिकारों के बनाई मूर्तियों को देख वे चकित रह गए। बोले की ऐसी सुंदर मूर्तियां किसी का भी मन मोह सकती हैं। इसके पश्चात उन्होंने स्थानीय मूर्तिकारों संग चर्चा की और ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़ने की सलाह दी। कलेक्टर शर्मा के अनुसार मुताबिक डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से जबलपुर की शिल्प कला को देश विदेश में पहचान मिलेगी। साथ ही यहां की मूर्ति को लोग घर बैठे देश-विदेश में कहीं भी आसानी से मंगा सकेंगे।

अब तो उद्योग विभाग के अधिकारी और अमेजन की स्थानीय फ्रेंचाइजी टीम के यासिर अहम भी भेड़ाघाट जा कर मूर्तिकारों से मिल चुके हैं। इनकी पहल से विभिन्न मूर्तिकारों का अमेजन में रजिस्ट्रेशन हो चुका है। रजिस्ट्रेशन कराने वाली फर्म लकी मार्बल आर्ट, जयपुर मार्बल, ब्रज आर्ट, कल्पना आर्ट, तिवारी आर्ट हैं। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक देवव्रत मिश्रा के अनुसार अमेजन की टीम के प्रमुख यासिर अहमद, अगले तीन माह तक मूर्तिकारों का प्रशिक्षण कराएंगे। इसके बाद शिल्पियों और व्यावसाईयों को डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा। इससे नए रोजगार पैदा होने के साथ ही भेड़ाघाट के प्रसिद्ध मार्बल उद्योग को अंतराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

जबलपुर. स्कूलों में शिक्षक नहीं, अध्ययन-अध्यापन प्रभावित हो रहा। इस कमी को समझते हुए शासन स्तर से तीन साल पहले शिक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया, साल भर बाद परीक्षा हुई लेकिन अब तक उसका रिजल्ट नहीं निकला। लिहाजा अभ्यर्थियों को अब तक इंतजार है परीक्षा परिणाम और Call letter का। प्रतिभागी नियुक्ति को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने को बाध्य हुए।

शुक्रवार को सूबे के सभी जिला मुख्यालयों पर चयनित शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से महीनों से अटकी भर्ती प्रक्रिया को दोबारा चालू करने की मांग की।

मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री योगेंद्र दुबे का आरोप है कि दिसंबर 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। प्रोफेशनल्स एग्जामिनेशन बोर्ड ने फरवरी 2019 से मार्च 2019 के बीच परीक्षाएं कराईं। शासकीय स्कूलों में उच्च माध्यमिक शिक्षक और माध्यमिक शिक्षक के 31 हजार पदों के लिए परीक्षा हुई। इसमें उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के करीब 17 हजार पद तथा माध्यमिक शिक्षकों के 5670 पद थे। इसके अलावा आदिम जाति कल्याण विभाग में इन्हीं उत्तीर्ण प्रतिभागियों में सफल प्रतिभागियों का चयन किया जाना है।

विभाग ने कोरोना संक्रमण के बीच जुलाई 2020 में सफल प्रतिभागियों से दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ की लेकिन बाद में लोक परिवहन की सुविधा बंद होने का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को रोक दिया। तब से प्रतिभागी नियुक्ति प्रक्रिया को दोबारा प्रारंभ करने का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारी संघ ने कहा कि लाकडाउन के बाद जब सब शुरू हो चुका है स्कूल खुलने लगे है तो फिर चयन प्रक्रिया को दोबारा शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है। बेवजह चयनित प्रतिभागियों को क्यों परेशान किया जा रहा है।

अध्यापक प्रकोष्ठ के प्रांतीय संयोजक मुकेश सिंह ने कहा कि कई प्रतिभागी चयन प्रक्रिया के इंतजार में उम्र सीमा को पार कर रहे हैं। उन्हें डर है कि उम्र सीमा के दायरे से बाहर होने से पहले यदि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो उनका आखिरी मौका भी बेकार हो जाएगा। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया को शीघ्रता से पूर्ण करना चाहिए।

जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग के कई मौके देने के बाद भी जिले में 6 हजार 207 स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना टीका नहीं लगवाया। पहले चरण में छूट गए कर्मियों को आखिरी अवसर देते हुए गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मॉपअप राउंड चलाया गया। इसमें 2 हजार 256 स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन महज 501 कर्मचारी ही टीका लगवाने के लिए पहुंचे। यह लक्ष्य महज 22 प्रतिशत था। यह अभी तक के कोविड टीकाकरण की सबसे कम दर है। इसके साथ ही हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए कोविड वैक्सीनेशन का पहला चरण पूरा हो गया है। पहले चरण में कुल 74 प्रतिशत पंजीकृत हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स ने कोरोना टीका लगवाया है।

दूसरे चरण के लिए रविवार तक पंजीयन
कोविड-19 वैक्सीनेशन का पहला चरण खत्म होने के साथ ही दूसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दूसरे चरण में फं्रट लाइन वर्कर में पुलिस, राजस्व, पंचायत और नगर निगम कर्मियों को टीका लगाया जाना है। पुलिस, राजस्व और नगर निगम के कर्मचारियों को टीका लगाने के लिए पंजीयन हो चुका है। अभी पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों के पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है। इनके 7 फरवरी तक ऑनलाइन पंजीयन होंगे। उसके अगले दिन से फ्रंट लाइन वर्कर को कोरोना टीका लगाए जाने का प्रस्ताव है।

 

corona vaccination
IMAGE CREDIT: patrika

जिले में स्थिति
2256 हितग्राही को गुरुवार को टीका लगाया जाना था।
30 सेशन तय किए गए थे।
501 स्वास्थ्य कर्मियों ने गुरुवार को टीका लगवाया।
17 हजार 282 कुल कर्मियों को अभी तक टीका लगा।
23 हजार 276 कुल कर्मियों को टीका लगाया जाना था।
368 कुल सेशन टीकाकरण के पहले चरण में 11 दिन तक हुए।

सरकारी अस्पताल में बनेंगे टीकाकरण केन्द्र
पहले चरण में सरकारी और निजी अस्पतालों के हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स को वैक्सीन की पहली डोज दी गई है। संसाधन की दृष्टि से निजी अस्पतालों में भी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर बनाए थे। लेकिन फ्रंट लाइन वर्कर को टीका सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही लगाया जाएगा। दूसरे चरण में सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र ही वैक्सीनेशन सेंटर बनेंगे। इसमें पुलिस विभाग का अस्पताल शामिल है।

कोविड-19 वैक्सीनेशन का पहला चरण पूरा हो गया है। अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसमें फं्रट लाइन वर्कर को वैक्सीन लगाई जाएगी। वैक्सीनेशन सरकारी अस्पतालों में ही होगा।
- डॉ. शत्रुघन दाहिया, टीकाकरण अधिकारी

 

जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग के कई मौके देने के बाद भी जबलपुर जिले में 6207 स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना टीका नहीं लगवाया। पहले चरण में छूट गए कर्मियों को आखिरी अवसर देते हुए लगातार दूसरे दिन मॉपअप राउंड चलाया गया। इसमें 2256 स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन महज 501 कर्मचारी ही टीका लगवाने पहुंचे। यह लक्ष्य महज 22 प्रतिशत था। यह अभी तक के कोविड टीकाकरण की सबसे कम दर है। इसके साथ ही हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए कोविड वैक्सीनेशन का पहला चरण पूरा हो गया है। पहले चरण में कुल 74 प्रतिशत पंजीकृत हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स ने कोरोना टीका लगवाया है।
जिले में स्थिति
- 2256 हितग्राही को गुरुवार को टीका लगाया जाना था।
- 30 सेशन तय किए गए थे।
- 501 स्वास्थ्य कर्मियों ने गुरुवार को टीका लगवाया।
- 17 हजार 282 कुल कर्मियों को अभी तक टीका लगा।
- 23 हजार 276 कुल कर्मियों को टीका लगाया जाना था।
- 368 कुल सेशन टीकाकरण के पहले चरण में 11 दिन तक हुए।

दूसरे चरण के लिए रविवार तक पंजीयन
कोविड-19 वैक्सीनेशन का पहला चरण खत्म होने के साथ ही दूसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दूसरे चरण में फं्रट लाइन वर्कर में पुलिस, राजस्व, पंचायत और नगर निगम कर्मियों को टीका लगाया जाना है। पुलिस, राजस्व और नगर निगम के कर्मचारियों को टीका लगाने के लिए पंजीयन हो चुका है। अभी पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों के पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है। इनके 7 फरवरी तक ऑनलाइन पंजीयन होंगे। उसके अगले दिन से फ्रंट लाइन वर्कर को कोरोना टीका लगाए जाने का प्रस्ताव है। पहले चरण में सरकारी और निजी अस्पतालों के हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स को कोविड वैक्सीन की पहली डोज दी गई है। संसाधन और सुविधा की दृष्टि से निजी अस्पतालों में भी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर बनाए थे। लेकिन फ्रंट लाइन वर्कर को टीका सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही लगाया जाएगा। दूसरे चरण में सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र ही वैक्सीनेशन सेंटर बनेंगे। सुविधा की दृष्टि से फ्रंट लाइन वर्कर से संबंधित संस्थान में चिकित्सा सुविधा होने पर ही वहां पर सेंटर बनाया जा सकेगा। इसमें पुलिस विभाग का अस्पताल सेंटर के लिए प्रस्तावित है।

जबलपुर. घर के बाहर खेल रही दो वर्षीय बच्ची का पड़ोस में रहने वाली महिला ने शुक्रवार दोपहर अपहरण किया और गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया। दिल दहला देने वाली यह वारदात न्यू कंचनपुर के निर्मलचंद्र वार्ड स्थित रवींद्र के बाड़े में हुई। महिला ने अपने किराए के मकान के भीतर वारदात को अंजाम देने के बाद शव वहीं छिपा दिया। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है।
रवींद्र का बाड़ा निवासी हसन अली कंचनपुर स्थित एक बेकरी में काम करता है। वह पत्नी रेशमा और दो वर्षीय बेटी नायरा के साथ रवींद्र ठेकेदार के बाड़े में रहता था। रोजाना की तरह वह काम पर चला गया था। रेशमा घर पर थी और नायरा बाहर आंगन में बच्चों के साथ खेल रही थी।
बेटी की हुई थी मौत
बाड़े में ही किराए से बबीता साहनी और उसका पति अमरदीप भी रहता है। बबीता ने लगभग दो माह पूर्व बेटी को जन्म दिया था। लेकिन, 12 दिन बाद उसकी बेटी की मौत हो गई। उसे संदेह था कि रेशमा और उसके परिवार ने जादूटोना कर उसकी बेटी को मारा है। शुक्रवार दोपहर जब नायरा खेल रही थी, तभी बबीता उसे अपने घर ले गई।
कपड़ा ठूंसा, फिर लगाया ताला
बबीता अंदर के कमरे में ले जाकर नायरा के मुंह में कपड़ा ठूंसा और फिर उसी कपड़े से उसका गला घोंट दिया। इसके बाद उसने कपड़े में कई गठान लगा दी। इसके बाद घर में ताला लगाकर वह पीछे बने बाथरूम में नहाने चली गई।
काफी देर तक नायरा का पता नहीं चला, तो बाड़े में हडक़म्प मच गया। सभी ने नायरा की तलाश शुरू की। इस दौरान मकान मालिक ने बाड़े में लगे सीसीटीवी कैमरे को चैक किया, तो उसमें बबीता दोपहर लगभग 1.58 बजे नायरा के साथ नजर आई। इधर हसन ने अधारताल थाने में पुलिस को सूचना दी।
नायरा की मां रेशमा का रो-रो कर ***** हाला था। इस दौरान बबीता ने उसे ढांढस बंधाया। तभी मकान मालिक की बेटी समेत अन्य ने एक-एक घर को चैक करने की बात कही। लगभग सवा तीन बजे वह बबीता के भीतर वाले कमरे में गई, तो नायरा जमीन पर पड़ी थी।
परिजन नायरा को डॉक्टर के पास ले गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। तब तक अधारताल सीएसपी अशोक तिवारी समेत अन्य मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने बबीता को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने वारदात को अंजाम देने की बात कबूली।
पुलिस फोटोग्राफर और एफएसएल की टीम ने नायरा के शव का परीक्षण किया, तो उसके हाथ में छिलने के निशान मिले। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नायरा ने बचने का प्रयास किया था।
वर्जन
बालिका का अपहरण कर उसकी हत्या की गई। जादू टोना के संदेह पर महिला ने वारदात को अंजाम दिया। आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। मौके पर पुलिस बल तैनात है।
सिद्धार्थ बहुगुणा, एसपी

 

जबलपुर। वेब सीरीज 'दुविधाÓ की शूटिंग जबलपुर के विश्वप्रसिद्ध भेड़ाघाट के नर्मदा नदी के पंचवटी में की गई। इस अवसर पर फिल्म की प्रोडक्शन टीम एबीपी प्रोडक्शन डायरेक्टर विकास पांडे ने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा की मौजूदगी में सीईओ एके रावत की मौजूदगी में नगर परिषद् को फ्लोट दान की। इसकी लागत 80 हजार के लगभग है। जब भी कोई प्रोडक्शन हाउस शूटिंग के लिए भेड़ाघाट आता है, उसे फ्लोट की आवश्यकता होती है। जिसमें दो-तीन कैमरे के माध्यम से एक साथ वर्क सूट किया जा सकता है। इस दौरान जेटीपीसी के सीईओ हेमंत सिंह, आशीष जैन, प्रभा शंकर पांडे, बॉलीवुड के कलाकार आचमन पांडे, वैशाली, अदिति फि ल्म के कलाकार मौजूद थे।

जानकारों का कहना है कि मप्र सरकार और जबलपुर के स्थानीय प्रशासन की कोशिशें रंग ला रही हैं। भेड़ाघाट की प्राकृतिक खूबसूरती फिल्मकारों को लुभा रही है। इससे अब बड़े प्रोडक्शन हाउस भी यहां आने लगे हैं। यहां भेड़ाघाट के आसपास नर्मदा का प्रवाह काफी तेज है। इसके चलते शूटिंग में दिक्कत आती है। अब प्रशासन की कोशिश है कि शूटिंग को लेकर अन्य हाइटेक व्यवस्थाएं भी मुहैया कराई जाएं। इससे पर्यटन के साथ यहां फिल्मों की शूटिंग भी बढ़ेगी।

जबलपुर । हाथ से छूकर, टटोल कर अपनी मंजिल तक पहुंचने वाले दिव्यांगों के प्रति प्रशासन गंभीर नहीं है। कोरोना संक्रमण में दिव्यांगों की देखरेख और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए बनाए गए पुर्नवास केन्द्र में व्यवस्थाओं को टोटा है, जिससे दिव्यांगों के बीच संक्रमण का खतरा बना हुआ है। विक्टोरिया अस्पताल में पुरानी ओपीडी में जिला दिव्यांग पुर्नवास केन्द्र तो बना दिया गया है, जहां रैम्प के अभाव में दिव्यांगों को अपनी साइकिल से कोरोना यूनिट से होकर आना-जाना पड़ रहा है, जिससे उनके संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है।
सेठ गोविंद दास जिला चिकित्सालय (विक्टोरिया अस्पताल) के विकास के साथ ही गत वर्ष जिला दिव्यांग पुर्नवास केन्द्र को नई ओपीडी बनने के बाद पुरानी ओपीडी में शिफ्ट कर दिया गया है। पुरानी ओपीडी में केन्द्र के पहुंचने के बाद दिव्यांगों की साइकिल की मरम्मत भी वहीं की जा रही है और अन्य समस्या के समाधान के लिए दिव्यांग इस कार्यालय से संपर्क कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बाद हालत यह हो गई है कि विक्टोरिया अस्पताल में कोरोना यूनिट के बाजू में दिव्यांग केन्द्र है। दिव्यांग सडक़ से सीधे केन्द्र नहीं पहुंच पाते हैं, एेसे हालात में इन दिव्यांगों को ट्राई साइकिल से कोरोना यूनिट के अंदर से होकर आना-जाना पड़ता है।
सीढि़यों से वाहन उठाकर चढ़ाना मजबूरी
विक्टोरिया की पुरानी ओपीडी सडक़ के समानांतर नहीं है। ओपीडी में जाने के लिए दो सीढ़ी है। इसमें दिव्यांग की ट्राई साइकिल उपर नहीं चढ़ पाती है। यहां रैम्प नहीं होने से किसी की मदद लेकर दिव्यांग को अपनी साइकिल उपर चढ़ानी पड़ती है या फिर कोरोना यूनिट के रैम्प का इस्तेमाल करके उसे दिव्यांग केन्द्र तक पहुंचना पड़ता है। मौजूदा हालात में भी यही हो रहा है, जहां संक्रमण की वजह से दिव्यांगों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आता है और उन्हें मजबूरी में कोरोना यूनिट से होकर केन्द्र तक पहुंचना पड़ता है।
कोरोना के बाद पहली बार हो रही मरम्मत
कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन के बाद पहली बार उनकी ट्राईसाइकिल की मरम्मत हो रही है। मरम्मत के लिए केन्द्र के एक कमरे में टैक्नीशियन आए हुए हैं, जो साइकिल की जांच कर रहे हैं और उसे ठीक कर रहे हैं। साइकिल की मरम्मत के बारे में दिव्यांगों से बातचीत की गई है तो उनका कहना था कि...

क्यों ट्राई साइकिल की मरम्मत नियमित होती है?
हां, होती है। लॉकडाउन के बाद पहली बार हो रही है।
तो क्या केन्द्र में इसका वर्कशॉप नहीं है?
नहीं वर्कशॉप नहीं है। कम्पनी का वर्कशॉप रिछाई में है। वहां जाते हैं तो हमें वापस कर दिया जाता है।
एेसा क्यों हैं कि आपकी साइकिल की मरम्मत नहीं होती है?वो कहते हैं कि और साइकिल की शिकायत आने दो तभी उसकी मरम्मत होगी।
ये साइकिल क्या जल्दी खराब हो जाती है?
साइकिल बैटरी वाली है। इसका सामान बाहर नहीं मिलता है। साइकिल यहीं ठीक करवाना हमारी मजबूरी है। साइकिल चलती है तो खराब होगी ही। वैसे साइकिल इतनी कमजोर है कि हल्के से जर्क पर टूटने का डर है, और कुछ तो टूट भी चुकी है। इनमें वेल्डिंग करके काम चला रहे हैं।
इसके लिए प्रशासन से नहीं कहा क्या?
हमने कलेक्टर सहित अभी लोगों से कहा है लेकिन कुछ नहीं हुआ। साइकिल का स्थाई रूप से शहर के भीतर वर्कशॉप नहीं है। जबकि संभाग में करीब ५०० ट्राईसाइकिल दी गई हैं और करीब २०० साइकिलें और बांटी जानी है।
केन्द्र में रैम्प तो नहीं है, फिर कैसे अंदर जाते हो?
कोई मिल जाता है तो साइकिल उठाकर वह उपर रख देता है, नहीं तो हमे कोरोना यूनिट के रैम्प से पुरानी बिल्डिंग के अंदर से केन्द्र तक जाना पड़ता है।

- दिव्यांगों की ट्राईसाइकिल के बारे में सरकार से पत्राचार किए गए हैं। केन्द्र में रैम्प बनाया जाएगा, जिसके लिए अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की जाएगी।
आशीष दीक्षित, जेडी, सामजिक न्याय विभाग

जबलपुर . शहर में नए कोरोना संक्रमित की संख्या में कमी आ रही है। एक्टिव केस घटकर 182 हो गए हैं। जिले में दस दिन से कोरोना से कोई मौत रिकॉर्ड नहीं हुई है। कोविड आइसोलेशन सेंटर के हालात भी बदल गए हैं। पहले जहां सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और विक्टोरिया अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में मरीजों को बिस्तर कठिनाई से उपलब्ध हो रहे थे और गेट पर एम्बुलेंस की कतार लगी रहती थी, वहां पर अब मरीज कम होने के साथ हलचल कम हो गई है।
घर में ही ठीक हो रहे मरीज
कोरोना के नए मरीज घटने के साथ ही मृत्यु दर भी कम हुई है। एक महीने के बीच कोरोना से सिर्फ छह लोगों की मौत हुई है। 27 जनवरी के बाद जिले में कोरोना से कोई मौत दर्ज नहीं हुई है। संक्रमण के गम्भीर मामले भी कम हुए हैं। इससे ज्यादातर मरीज घर में ही रहकर स्वस्थ हो रहे हैं।
अभी सावधान रहने की जरूरत
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पलमोनरी मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. जितेन्द्र भार्गव के अनुसार कोरोना के नए मामलों में गिरावट देखी जा रही है। यह अच्छा संकेत है। लेकिन अभी भी पहले की तरह ही सावधान रहने की आवश्यकता है। जब तक सभी का टीकाकरण ना हो जाएं और संक्रमण पूरी तरह समाप्त ना हो जाए सुरक्षा बरतना होगी। लॉकडाउन के समय पर अपनाई आदतों को अभी भूलना नहीं है। यदि इस माह नए संक्रमित का औसत 20 मरीज से नीचे रहता है, तो काफी हद तक सुरक्षित होंगे।
इनका अभी रखना होगा ध्यान
- घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाना।
- वृद्ध और बच्चे अभी घर में ही रहें।
- भीड़-भाड़ वाली जगह में जाने से बचें।
- बाहर से आने पर सेनेटाइजेशन करें।
- सडक़, बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग रखें।
- संदिग्ध लक्षण की अनदेखी ना करें।
- बार-बार हाथ धोने को आदत में बनाए रखें।
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तिथि : नए संक्रमित : स्वस्थ
11 जनवरी : 22 : 32
12 जनवरी : 28 : 30
13 जनवरी : 28 : 39
14 जनवरी : 21 : 30
15 जनवरी : 15 : 32
16 जनवरी : 22 : 42
17 जनवरी : 16 : 25
18 जनवरी : 19 : 38
19 जनवरी : 26 : 32
20 जनवरी : 18 : 30
21 जनवरी : 13 : 28
22 जनवरी : 21 : 27
23 जनवरी : 14 : 25
24 जनवरी : 17 : 20
25 जनवरी : 13 : 26
26 जनवरी : 16 : 21
27 जनवरी : 21 : 24
28 जनवरी : 18 : 32
29 जनवरी : 8 : 26
30 जनवरी : 14 : 24
31 जनवरी : 10 : 21
01 फरवरी : 11 : 20
02 फरवरी : 14 : 22
03 फरवरी : 19 : 21
04 फरवरी : 11 : 23
05 फरवरी : 14 : 26
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यह है स्थिति
तिथि : एक्टिव केस : होम आइसोलेट : रिकवरी रेट : कंटेनमेंट जोन
11 जनवरी : 445 : 300 : 95.66 प्रतिशत : 29
05 फरवरी : 182 : 111 : 97.34 प्रतिशत : 07

 

जबलपुर। कहने को जबलपुर नगर निगम के अमले ने शहर में भूमाफियाओं के रूप में चिह्नित रसूखदारों के अवैध भवनों को ढहाने की पूरी तैयारी की। यहां के रसल चौक में ऐसी घेराबंदी की गई कि देखने वाले ठिठक गए। यहां के रज्जाक के जर्जर भवन को तोडऩे के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। जिला प्रशासन और नगर निगम के आला अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या पुलिस बल की तैनाती की गई। सुबह 7.30 से लेकर 9.30 बजे तक पूरा इलाका छावनी नजर आ रहा था। प्रशासन के अधिकारी कार्रवाई के लिए आगे बढ़े तो भवन मालिक व किरायदार कोर्ट का स्टे आर्डर ले आए। इस दौरान निगम के अधिकारियों व भवन के किरायेदारों के बीच कुछ देर तक कहासुनी भी हुई। आखिरकार न्यायिक अभिमत लेने का निर्णय लेकर माफिया दमन दल बैरंग लौट गया।


माफिया दमन दल दूसरी कार्रवाई करने बेलबाग पहुंचा। गांजा, स्मैक का धंधा करने के आरोपी बबलू सोनकर का मकान तोड़ा जाना था। पूरे लाव लशकर के साथ दल मौके पर पहुंचा। बुलडोजर लेकर पहुंचे दल में बड़ी संख्या में प्रशासन व पुलिस के आला अधिकारी शामिल थे। माफिया बबलू ने संपत्ति के दस्तावेज प्रस्तुत कर मोहलत मांगी। अधिकारी उससे बोले की संपत्ति के दस्तावेज तहसील कार्यालय में भी प्रस्तुत करे और वापस लौट गए। बबलू पर शहर के अलग-अलग थानों में एनडीपीएस, मारपीट, चाकूबाजी समेत 12 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। जिले में माफिया के विरुद्ध कई बड़ी कार्रवाई के बाद अब दमन दल ज्यादातर जगह से बैरंग लौट रही है। ऐसे में माफिया दमन दल की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। 2 फरवरी को भी निगम प्रशासन का अमला राइट टाउन स्टेडियम के समीप स्थित भवन के अवैध हिस्से को तोडऩे पहुंचा था, लेकिन भवन स्वामी महेन्द्र चौबे को मोहलत देकर खाली वापस लौट गया था। माफिया दमन दल के कार्रवाई करने की जगह लगातार बैरंग लौटने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

जबलपुर। कई जरूरतमंद अपना डेरा जबलपुर के कचहरी दरगाह के पास और फुटपाथ पर लगाने को मजबूर हैं। असहाय और बुजुर्गों को भी आश्रय स्थल नसीब नहीं हो रहा है। एल्गिन अस्पताल परिसर में बने आश्रय स्थल में ताला लटका है और रेलवे स्टेशन के पास बने रैन बसेरा में एक साल से सजायाफ्ता कैदियों का डेरा है। एल्गिन अस्पताल परिसर में रैन बसेरा भवन बनकर तैयार हुए एक साल बीत गया। लेकिन रैन बसेरा भवन आज तक निगम को सुपुर्द नहीं किया गया। निगम प्रशासन का कहना है की अस्पताल प्रबंधन से कई बार भवन की मांग की गई। लेकिन आज तक भवन नहीं सौंपा गया। सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन भवन में गंदे कपड़ों की धुलाई के लिए मशीनरी लगाने की तैयारी में है।
साल भर से नहीं किया खाली
रेलवे स्टेशन के समीप गोकुलदास धर्मशाला स्थित रैन बसेरा निराश्रितों का बड़ा सहारा रहा है, लेकिन इस आश्रय स्थल में सालभर से सजायाफ्ता कैदियों का डेरा है। सामाजिक न्याय विभाग ने कोरोना संकट को देखते हुए तात्कालिक व्यवस्था के तहत निगम प्रशासन से बात करके सजायाफ्ता कैदियों के ठहरने की व्यवस्था कराई थी। लेकिन आज तक रैन बसेरा खाली नहीं किया गया। रेलवे स्टेशन के समीप फिलहाल जरूरतमंदों के ठहरने के लिए कोई विकल्प नहीं है।

जबलपुर. हाईकोर्ट ने सागर कलेक्टर को कहा कि सागर के परकोटा वार्ड स्थित नगर निगम की जमीन पर हुए अतिक्रमण की जांच की जाए। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि अतिक्रमण पाए जाने पर कलेक्टर उन्हें हटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अगली सुनवाई 15 फरवरी तक रिपोर्ट पेश करनी होगी। कोर्ट ने कलेक्टर के इस सम्बंध में जारी किए जाने वाले आदेश से प्रभावित होने वाले पक्ष को सक्षम अदालत के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी। सागर निवासी जगदीश प्रसाद तिवारी की ओर से जनहित याचिका दायर कर कहा गया कि सागर के परकोटा वार्ड में नगर निगम की 4400 वर्ग फीट जमीन पर अतिक्रमण है। अधिकारियों से सांठगांठ करके अतिक्रमणकारियों ने छलपूर्वक जमीन अपने नाम करवा ली। प्रधानमंत्री कार्यालय ने मई 2015 में नगरीय प्रशासन मंत्रालय को जांच का आदेश दिया। जबकि नगरीय प्रशासन मंत्रालय ने जांच के बाद पाया कि नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। रिपोर्ट में नगर निगम की जमीन को अतिक्रमणकारियों के नाम कराने वाले नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिवक्ता संजीव चंसोरिया ने तर्क दिया कि इस मामले में नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2020 को सागर कलेक्टर को निर्देश दिये थे कि नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण की जांच करने और अतिक्रमण पाए जाने पर हटाने की कार्रवाई की जाए। इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में सागर कलेक्टर की ओर से रिपोर्ट पेश कर कहा गया कि केवल 450 वर्गफीट पर अतिक्रमण है। इस पर कोर्ट ने असंतोष जताया।

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