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Table of Contents

वीरेंद्र रजक@जबलपुर/ ओमती पुलिस ने शहपुरा निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ अभद्रता और धमकी देने की एफआइआर दर्ज की। एफआइआर में घटनास्थल ओमती थाना क्षेत्र होने के कारण उसे नोटिस जारी कर थाने तलब किया, तो ओमती पुलिस के फर्जीवाड़े का राज खुला। एफआइआर में पुलिस ने घटना का जो वक्त लिखा है, उस समय वह व्यक्ति एसपी कार्यालय में था। नोटिस मिलते ही पीडि़त ने एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा को जानकारी दी। उन्होंने जांच के आदेश दिए।

एसपी ने दिए जांच के आदेश: सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत के निराकरण के लिए गया था एसपी ऑफिस
जिस वक्त एसपी ऑफिस में था पीडि़त, ओमती पुलिस ने उसे गेट नम्बर चार के पास बता दर्ज कर ली एफआइआर
यह है मामला : शहपुरा निवासी ओमकार सिंह पटेल की ओर से सीएम हेल्पलाइन पर की गई एक शिकायत के निराकरण के लिए एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने उसे 30 दिसम्बर 2020 को कार्यालय बुलाया था। ओमकार दोपहर करीब सवा एक बजे एसपी कार्यालय पहुंचा। उसने एसपी से बातचीत भी की। वह दोपहर तीन बजे तक एसपी कार्यालय में ही था।

 

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30 दिसम्बर को ही ओमकार के खिलाफ ओमती थाने में मारपीट और धमकी देने की शिकायत की गई। शिकायकर्ता ने आरोप लगाया कि दोपहर 2.40 बजे बजे वह साथियों के साथ गेट नम्बर चार के पास खड़ा था, तभी ओमकार वहां पहुंचा और मारपीट कर धमकी दी। मामले में चार जनवरी को एफआइआर दर्ज कर चालान पेश करने की तैयारी भी कर ली गई। थाना सूत्रों के अनुसार थाना के आला अधिकारियों के आदेश पर एएसआई नरेश सिंह ने एफआइआर दर्ज की। जल्दबाजी में अधूरी कागजी कार्रवाई की।

नोटिस भेजकर बुलाया
ओमकार को पुलिस की ओर से भेजे गए नोटिस में ओमती थाना प्रभारी की सील लगी थी। इसमें उसके खिलाफ थाने में अपराध क्रमांक 14/21 धारा 294, 506 का अपराध दर्ज करने का उल्लेख था। उसे पूछताछ और बयान दर्ज करने के लिए छह जनवरी को थाने बुलाया गया था। नोटिस मिलने पर ओमकार ने एसपी को घटनाक्रम की जानकारी दी। एसपी ने विवेचक एएसआई नरेश सिंह को बुलाकर फटकार लगाई और जांच के आदेश दिए।

ओमती थाने में ओमकार सिंह पटेल के खिलाफ दर्ज मामले की जांच की जा रही है। जांच के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
- अमित कुमार, एएसपी

जबलपुर। पहाड़ी राज्यों से आयी सर्द हवा से गुरुवार की सुबह ठंड रही। पारा लुढकऩे के साथ सामान्य से नीचे बना रहा। सुबह लोग घूमने निकले, तो ठंडी हवा चुभी। उत्तरी हवा मौसम में ठंड घोलती रही। उसके बाद अरब सागर की ओर से आकर हवा मिलने लगी। इन पश्चिमी हवा से ठंड कमजोर पड़ गई। दोपहर में धूप तेज होते ही पारा ऊपर की ओर चढऩे लगा। तापमान सामान्य से ऊपर चला गया। ठंड का अहसास कम हो गया।

गुरुवार को सुबह के समय चली उत्तरी हवा से तापमान में गिरावट आई। बुधवार को न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस था। यह गुरुवार को 4.2 डिग्री लुढककऱ 8.8 डिग्री सेल्सियस हो गया। सामान्य से एक डिग्री नीचे बना रहा। पूर्वान्ह के बाद हवा की दिशा बदलने से पारे की चाल में अंतर आया। बुधवार को अधिकतम तापमान 25.8 डिग्री था। यह गुरुवार को 1.6 डिग्री बढकऱ 27.4 डिग्री हो गया। आद्र्रता सुबह के समय 78 प्रतिशत और शाम को 41 प्रतिशत थी। प्रदेश में बुधवार रात सबसे कम तापमान रतलाम में पांच डिग्री रेकॉर्ड हुआ।

मौसम विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सहायक देवेंद्र कुमार तिवारी के अनुसार गुरुवार को औसतन दो किमी प्रतिघंटा की गति से उत्तर-पश्चिम हवा चली। सुबह के समय उत्तरी हवा के कारण तापमान में गिरावट हुई। पूर्वान्ह से हवा की दिशा बदलकर पश्चिमी हो गई। इससे तापमान में परिर्वतन के साथ मौसम प्रभावित हुआ।

जबलपुर। तुम मुझे खून दो.. मैं तुम्हें आजादी दूंगा... का नारा देकर तरुणाई में जोश फूंकने वाले नेताजी सुभाषचंद बोस की यादें जबलपुर में आज भी जीवंत हैं। यूं कहें कि नेताजी के लिए आज भी जबलपुर का दिल धडक़ता है। वे लोगों के मन में बसे हुए हैं। त्रिपुरी स्मारक ही नहीं बल्कि सेंट्रल स्थित नेताजी हाल और कमानिया गेट के अलावा अन्य कई स्थानों पर भी उनकी यादें जीवंत हैं। कमानिया गेट वही है जहां से नेताजी की जीत पर 52 हाथियों के रथ पर विशाल जुलूस निकाला गया था। तिलवारा घाट के समीप पहाड़ी पर बने त्रिपुरी स्मारक में तो आज भी युवा सुबह शाम नेताजी का नारा बुलंद करते हैं।

मां नर्मदा का आंचल
जबलपुर स्थित नर्मदा के प्राचीनतम् तट तिलवाराघाट के ठीक सामने पहाड़ी पर बना है, त्रिपुरी स्मारक...। नजर पड़ते ही इसका वैभव बात करता हुआ नजर आता है। स्मारक पर बने डोम में युवा संगीत की सरगम छेड़ते हैं। यह वही स्थान है, जहां आज से करीब 82 साल पहले सन 1939 में कांग्रेस का त्रिपुरी अधिवेशन हुआ था। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए महात्मा गांधी के प्रतिनिधि के रूप में पट्टाभि सीमा रमैया चुनाव मैदान में थे। दूसरी ओर नेताजी सुभाषचंद बोस थे। इतिहास साक्षी है कि इसी भूमि पर नेताजी ने महात्मा गांधी के प्रतिनिधि पट्टाभि सीतारमैया को हराकर शानदार जीत दर्ज की और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। यहां आज भी चरखे वाला तिरंगा लहराता है।

 

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104 डिग्री बुखार में आए थे नेताजी
आज भी युवाओं के प्रेरणास्रोत माने जाने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस का हौसला भी चट्टान जैसा था। इस बात का जीवंत प्रमाण यह है कि नेता जी 104 डिग्री बुखार होने के बावजूद जबलपुर आए थे और त्रिपुरी अधिवेशन में शामिल देश भक्तों का हौसला बढ़ाया था। नेताजी के हौसले की इसी बुलंदी ने उन्हें बुलंद जीत भी दिलवाई थी। उन्होंने महात्मा गांधी के प्रतिनिधि पट्टाभि सीता रमैया को पराजित किया था। कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नेताजी को मिली शानदार जीत का इजहार भी जबलपुर में शानदार अंदाज में किया था। कमानिया गेट के समीप से 52 हाथियों के रथ पर उनका विजयी जुलूस निकाला गया था।

उमड़ पड़ी थी भीड़
इतिहासविद अरुण शुक्ल के अनुसार जबलपुर में 1939 में हुए कांग्रेस के 52 वें अधिवेशन में नेताजी ने पट्टाभि सीतारमैया को 203 मतों से पराजित किया था। सीता रमैया महात्मागांधी के पसंदीदा उम्मीदवार थे। 52वें अधिवेशन में शानदार जीत की खुशी में संस्कारधानी वासियों नेताजी को 52 हाथियों के रथ पर बैठाकर घुमाया था। इसे देखने के लिए शहर व आसपास के गावों से हजारों की तादाद में लोग पहुंचे थे। हालांकि तेज बुखार की वजह से नेताजी शिविर व जुलूस में शामिल नहीं हो पाए थे। शिविर में ही डॉ.वीआर सेन व डॉ. एम. डिसिल्वा उनका इलाज कर रहे थे। उनके अस्वस्थ होने के कारण, जुलूस में उनकी फोटो रखी गई थी। नेताजी की लोकप्रियता का आलम यह था कि उस फोटो को ही देखने के लिए ें हजारों की संख्या में लोग जुलूस में पहुंचे थे।

 

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तीन बार आए नेताजी
इतिहासविद राजकुमार गुप्ता के अनुसार नेताजी सुभाषचंद्र बोस को 30 मई 1932 को सिवनी से केन्द्रीय जेल जबलपुर लाया गया था। इसके बाद वे 18 फरवरी 1933 को जबलपुर आए, डॉ. एचएन मिश्र ने उनके स्वास्थ्य की जांच की तो उनके फेफड़ों में इन्फेशन व आंतों में टीबी की शिकायत सामने आई। इसके बाद यहीं से उन्हें मुम्बई होते हुए यूरोप भेजा गया था। 1939 में वे त्रिपुरी अधिवेशन में भाग लेने आए तब भी तेज ज्वर से पीडि़त थे। तेज बुखार के कारण ही वे शिविर में शामिल नहीं हो सके थे। जबलपुर जेल में उनका स्मारक बनाया गया है, जेल व जबलपुर के मेडिकल कॉलेज का नामकरण उन्हीं की याद में किया गया है। इसके अलावा कमानियागेट भी अधिवेशन की याद में बनाया गया था।

असहनीय दर्द का जिक्र
सेट्रल जेल से एक ऐसा पत्र मिला है, जिसे नेताजी ने सिवनी निवासी मित्र देशपांडे को लिखा था। पत्र में उन्होंने अपनी बीमारी गॉल ब्लेडर में दर्द व इवोडियम का जिक्र किया था, इसके चलते खाना खाने के बाद उन्हें असहनीय पीड़ा होती थी। 13 मार्च 1933 को लिखे इस पत्र से पता लगता है कि वे असहनीय दर्द में थे। पत्र के माध्यम से उन्होंने बताया था कि वे वियना में रहकर इलाज करा रहे हैं।

बदहाली की कगार पर स्मारक
करीब 80 साल पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस की कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत और कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन की याद में बना त्रिपुरी स्मारक बदहाली का शिकार है। तिलवारा की पहाड़ी पर बने स्मारक का पीछे का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने लगा है। स्मारक की दरकती सीढिय़ां, आस-पास फैलीं झाडिय़ा इसकी दुर्गति और दुर्दशा की कहानी सुनाती नजर आ रही हैं। लोगों ने मांग उठाई थी कि इसके नीचे रिक्त पड़ी भूमि पर गार्डन बनाया जाए, लेकिन इतिहास को नजरंदाज करने जैसी भावना से यहां एमपीएसईबी का सब स्टेशन बनाया जा रहा है।

जबलपुर. शिक्षक दंपति को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बता दें कि संविदा शाला शिक्षक दंपती को बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ के समक्ष हुई मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों की बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक लगाते हुए प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, आयुक्त लोक शिक्षण, व्यापम व सीईओ जिला पंचायत को नोटिस जारी किया है। सभी अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए तीन हफ्ते की मोहलत दी गई है।

सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पति-पत्नी हैं। दोनों ने व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा पास करके संविदा शाला शिक्षक वर्ग-दो के पद पर नियुक्ति हासिल की थी। बावजूद इसके मनमाने तरीके से दोनों को बर्खास्त कर दिया गया। सीईओ जिला पंचायत ने इस आशय का आदेश जारी किया। इसी के साथ दंपती कोरोनाकाल में बेरोजगार हो गए जिससे परिवार मानसिक तौर पर पीड़ित हुआ।

जबलपुर. नगर निगम प्रशासन ने ऐसे आवंटी दुकानदारों को सूचीबद्ध कर लिया है जो वर्षों से दुकान का किराया नहीं जमा कर रहे हैं। ऐसे आवंटी अगर जल्द से जल्द बकाया सहित पूरा किराया नहीं जमा करते तो निगम उनकी दुकानों में ताला लगाएगा। इसकी शुरूआत हो भी चुकी है। पहले चरण में आधा दर्जन से ज्यादा दुकानों पर निगम प्रशासन ने अपना ताला जड़ दिया है। निगम की इस कार्रवाई से अब तक मौज में रहने वाले आवंटी दुकानदारों में हड़कंप मचा है।

बताया जा रहा है कि निगम के बाजार विभाग ने ऐसी करीब 100 दुकानों को चिन्हित किया है जो सालों से दुकान का किराया जमा नहीं कर रहे हैं। बाजार विभाग के अधीक्षक दिनेश प्रताप सिंह के अनुसार क्षेत्रीय बस स्टैंड मार्केट व नवनिर्मित दुकानों के अलावा अधारताल की निगम की दुकानों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान किराया न देने पर 7 दुकानों पर ताला लगा दिया गया।

बाजार विभाग के मुताबिक अधारताल के नगर निगम मार्केट की दुकान क्रमांक 86, रानी सोनपाली पर 14 हजार 6 सौ 27 स्र्पये का किराया बकाया था। इसके अलावा दुकानदार सुभाष जैन पर 31 हजार 3 सौ 18 रुपये, विजय अग्रवाल पर 12 हजार 58, हृदेश कुमार सोनी पर 8 हजार 6 सौ, राजेश्वरी दुबे पर 56 हजार 5 सौ 25 रुपये, राजेंद्र यादव पर 15 हजार 7 सौ 80, अनुष्का शर्मा पर 64 हजार 6 सौ 72 रूपये जमा न करने पर इनकी दुकानों पर बाजार विभाग के अधिकारियों ने ताला लगा दिया गया है।

जबलपुर. हाई कोर्ट ने मंडी बोर्ड के सचिव, मंडी संचालक, अतिरिक्त संचालक, अनुविभागीय अधिकारी को अवमानना नोटिस जारी किया हैं। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है।

अवमानना याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूर्व में एक याचिका प्रस्तुत कर निवेदन किया गया था कि अभी तक मंडी के चुनाव नहीं कराए जा सके हैं, निकट भविष्य में भी इसकी कोई संभावना नहीं है। मंडी में प्रशासक नियुक्त करने का आदेश मंडी अधिनियम के कानून के विपरीत है। ऐसे में याचिकाकर्ता को ही कृषि उपज मंडी सिवनी का प्रशासक नियुक्त किया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने सात जनवरी 2020 को आदेश जारी कर मध्य प्रदेश शासन द्वारा मंडी में प्रशासक नियुक्त करने के आदेश को स्थगित कर दिया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मध्य प्रदेश शासन ने जिस आदेश के जरिए प्रदेश की मंडियों में प्रशासक नियुक्त किया है, वह स्थगित रहेगा।

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि मध्य प्रदेश शासन मंडी बोर्ड एवं कृषि उपज मंडी व अनुविभागीय अधिकारी को प्रस्तुत की। साथ ही निवेदन किया कि उसे पुन: कृषि उपज मंडी सिवनी में प्रशासक के रूप में कार्य करने दिया जाए। इसके बावजूद अनावेदक अजीत केसरी, संदीप यादव, आनंद मोहन शर्मा व जेपी सैयाम अनुविभागीय अधिकारी सिवनी ने याचिकाकर्ता को पदभार ग्रहण नहीं करवाया। इस पर यह अवमानना याचिका प्रस्तुत कर निवेदन किया गया कि याचिकाकर्ता को मंडी का प्रभार दिया जाए। साथ ही अनावेदकों को दंडित किया जाए। प्रारंभिक सुनवाई के बाद दलीलों से सहमत होकर कोर्ट ने अनावेदकों को अवमानना के नोटिस जारी कर दिए। सभी को अपना पक्ष रखने कहा गया है।

दीपंकर रॉय@जबलपुर। कोरोना की जकड़ में आने वाले बच्चों के शरीर में बन रही एंटीबॉडी से उनके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। जांच और उपचार में देरी से यह जानलेवा हो सकती है। यह जानकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में कोरोना काल में भर्ती बच्चों पर किए गए शोध में सामने आई है। कॉलेज में पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के बीच 46 कोरोना संक्रमित बच्चों पर किए गए शोध में 11 बच्चे मल्टी सिस्टम इन्फलामेटरी सिंड्रोम (एमआइएस-सी) से पीडि़त मिले हैं। पोस्ट कोविड इफेक्ट और एंटीबॉडी से बच्चों के शरीर के अंग प्रभावित होने और उनमें गम्भीर बीमारी का पता चला है। दिमागी बुखार, कावासाकी बुखार और लकवा जैसे रोग मिले हैं। शिशु रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता पाठक की इस रिसर्च को पीडियाट्रिक ऑन कॉल जर्नल ने प्रकाशित किया है।

मेडिकल कॉलेज में कोरोना काल में भर्ती 46 संक्रमित बच्चों पर रिसर्च
शिशु रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता पाठक की रिसर्च पीडियाट्रिक ऑन कॉल जर्नल ने की प्रकाशित

 

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बच्चों को भी बराबर का है खतरा
मेडिकल के शिशु रोग विभाग में कोरोना काल में भर्ती बच्चों पर किए गए शोध में पता चला है कि बच्चों को भी कोविड-19 वायरस का बराबर खतरा और नुकसान है। इन्हें भी संक्रमण से बचाव के हर उस सुरक्षा उपाय की आवश्यकता है, जो युवा और बुजुर्ग बरत रहे हैं। शोध में पाया गया है कि 70 फीसदी बच्चों को उनके नजदीकी व्यक्तियों और 50 फीसदी मां के सम्पर्क में रहने से संक्रमित हुए हैं।


कोरोना काल में भर्ती संक्रमित बच्चों की स्टडी की गई है। इसमें एचओडी डॉ. अव्यक्तअग्रवाल, डॉ. मोनिका लाजरस, डॉ. पवन घनघोरिया का निर्देशन व डॉ. प्रतिभा, रवि, डॉ. अखिलेंद्र, डॉ. आशा ने सहयोग किया। अस्पताल में लगभग नौ महीने में भर्ती संक्रमित बच्चों की जांच में 11 बच्चे अति गम्भीर मिले हैं। कुछ बच्चों में दिमागी व कावासाकी बुखार और पैरालिसिस जैसे लक्षण मिले हैं। पाया गया कि कोविड एंटीबॉडी बच्चों के शरीर के टिश्यू (जैसे हार्ट, ब्रेन, तंत्रिका तंत्र) को डैमेज कर रहे हैं। ज्यादातर बच्चे एमआइएस-सी से पीडि़त हैं। उन्हें किसी नजदीकी से ही कोरोना हुआ है। इसलिए बच्चों के लिए भी कोरोना से बचाव के लिए उतनी ही सुरक्षा और जागरुकता आवश्यक है, जितनी बड़े लोग रख रहे हैं।
- डॉ. श्वेता पाठक, असिसटेंट प्रोफेसर, एनएससीबीएमसी मेडिकल कॉलेज

जबलपुर . जबलपुर-कटनी रेलखंड में शनिवार को छह घंटे ट्रेनों की आवाजाही नहीं होगी। ट्रैक बंद रहने के कारण चार ट्रेनों को दूसरे रास्ते से चलाया जाएगा। रीवा, सिंगरौली और अंबिकापुर इंटरसिटी जबलपुर स्टेशन तक नहीं आएंगी। ये तीनों ट्रेनें कटनी तक आकर वहां से अपने निर्धारित समय पर वापस लौट जाएंगी। रेलवे ने हिरन और निवार नदी पर बने पुल में पुराने गार्डर हटाने के लिए सुबह छह घंटे का मेगा ब्लॉक लिया है। कुछ अन्य ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित होगा।
मेगा ब्लॉक के कारण प्रभावित ट्रेन में यात्रा निरस्त करने पर नियमानुसार रिफंड मिलेगा।
शहर नहीं आएंगी ये ट्रेनें
- 02290/02289 रीवा-जबलपुर-रीवा इंटरसिटी
- 01652/01651 सिंगरौली-जबलपुर-सिंगरौली
- 01266/01265 अंबिकापुर-जबलपुर-अंबिकापुर
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इन ट्रेनों का शनिवार को रूट डायवर्ट
- 02150 दानापुर-पुणे सुपरफास्ट
- 03202 एलटीटी-पटना जनता एक्सप्रेस
- 08610 एलटीटी-रांची ट्रेन
- 09057 उदना-मंडुआडीह ट्रेन
(नोट: ये ट्रेनें जबलपुर नहीं आएंगी। कटनी से सागर- बीना-भोपाल-इटारसी के रास्ते संचालित होंगी)
कटनी में करीब एक घंटे खड़ी रहेंगी दो ट्रेन
- 01448 हावड़ा-जबलपुर शक्तिपुंज स्पेशल 45 मिनट तक कटनी साउथ स्टेशन में।
- 01034 दरभंगा-पुणे स्पेशल ट्रेन 55 मिनट तक कटनी स्टेशन पर।

 

जबलपुर। कोरोना की जकड़ में आने वाले बच्चों के शरीर में बन रही एंटीबॉडी से उनके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। जांच और उपचार में देरी से यह जानलेवा हो सकती है। यह जानकारी जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में कोरोना काल में भर्ती बच्चों पर किए गए शोध में सामने आई है। कॉलेज में पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के बीच 46 कोरोना संक्रमित बच्चों पर किए गए शोध में 11 बच्चे मल्टी सिस्टम इन्फलामेटरी सिंड्रोम (एमआइएस-सी) से पीडि़त मिले हैं। पोस्ट कोविड इफेक्ट और एंटीबॉडी से बच्चों के शरीर के अंग प्रभावित होने और उनमें गम्भीर बीमारी का पता चला है। दिमागी बुखार, कावासाकी बुखार और लकवा जैसे रोग मिले हैं। शिशु रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता पाठक की इस रिसर्च को पीडियाट्रिक ऑन कॉल जर्नल ने प्रकाशित किया है। मेडिकल के शिशु रोग विभाग में कोरोना काल में भर्ती बच्चों पर किए गए शोध में यह बात सामने आयी है कि बच्चों को भी कोविड-19 वायरस का बराबर खतरा और नुकसान है। इन्हें भी संक्रमण से बचाव के हर उस सुरक्षा उपाय की आवश्यकता है, जो कि युवा और बुजुर्ग बरत रहे हैं। शोध में पाया गया है कि 70 प्रतिशत बच्चों को उनके नजदीकी व्यक्ति से कोरोना हुआ। 50 प्रतिशत मां के सम्पर्क में रहने से संक्रमित हुए हैं।
यह है स्थिति
- 46 बच्चों पर शोध। 3 दिन से 14 वर्ष तक की आयु के।
- 33 प्रतिशत इसमें एक वर्ष से कम आयु के थे।
- 11 प्रतिशत की आयु एक से पांच वर्ष के बीच।
- 55 प्रतिशत की उम्र पांच वर्ष से ज्यादा।
- 33 प्रतिशत बालिका और 66 प्रतिशत बालक।

बच्चों की सेहत की स्थिति
- 24 प्रतिशत क्रिटिकल केस।
- 7 प्रतिशत की मौत
- 09 प्रतिशत मॉडरेट केस
- 17 प्रतिशत माइल्ड केस
- 50 प्रतिशत एसिम्प्टोमेटिक

11 अति गम्भीर पीडि़त बच्चों की स्थिति
- 09 बच्चों को वेंटीलेटर सपोर्ट देना पड़ा।
- 07 बच्चों का आरटीपीसीआर टेस्ट निगेटिव, एंटीबॉडी टेस्ट पॉजिटिव।
- 03 बच्चों की भर्ती होने के 14 घंटे के अंदर मौत हुई।
- ढाई से तीन वर्ष के बीच दम तोडऩे वाले बच्चों की उम्र।
- 08 बच्चे भर्ती रहने के बाद स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज हुए।

एंटीबॉडी टेस्ट में पॉजिटिव मिले बच्चों की स्थिति

- 04 बच्चे दिमागी बुखार से पीडि़त मिले।
- 04 बच्चें में रिस्प्रेरेटरी इन्फेक्शन मिला।
- 02 बच्चें जीबीएस से पीडि़त मिले। इसमें लकवा जैसे लक्षण।
- 01 बच्चा कावासाकी बुखार से पीडि़त।

बच्चों में इन लक्षणों की अनदेखी ना करें
- 24 घंटे से जयादा देर तक रहने वाला बुखार।
- थकावट, बेहद शिथिलता
- खांसी
- सांस लेने में कष्ट
- पेट दर्द
- दस्त
- मिचली
- चकत्ते
- लाल आंखें
- गर्दन में दर्द
- शरीर का झटके लेना।

जबलपुर . मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से पूछा कि कोरोना का असर कम होने के बावजूद जबलपुर की रिज रोड अब तक क्यों नही खोली गई? चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने यह स्पष्ट करने को कहा कि सेना जबलपुर की रिज रोड आखिर कब तक खोलेगी ? फरवरी के तीसरे सप्ताह तक का समय दिया गया। जबलपुर निवासी अनिल साहनी व दीपक ग्रोवर की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क दिया कि कोविड 19 की आड़ में सेना ने जबलपुर की रिज रोड अप्रेल 2020 से बंद कर दी है। इस वजह से मॉर्निग वॉक करने वालों के अलावा आम जनता को बेहद परेशानी हो रही है।अधिवक्ता संघी ने कहा कि पूरे देश में सिर्फ जबलपुर अपवाद है, जहां सेना ने कोई रोड बंद करने का निर्णय लिया है। लिहाजा, इस अनुचित निर्णय को वापस लिया जाना चाहिए। यह रोड सामान्य आवागमन के लिए खोली जानी चाहिए।

जबलपुर। हिस्ट्रीशीटर शमीम कबाड़ी का पनागर के खजरी में जमीन पर अवैध तरीके से बने हवेलीनुमा गोदाम का अवैध हिस्सा गुरुवार को जमींदोज कर दिया गया। शमीम के विरुद्ध गोहलपुर और सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी, मारपीट, तोड़-फोड़, रेलवे की संपत्ति पर कब्जा आदि के मामले दर्ज हैं। खजरी में खसरा 263/2 पर शमीम की ओर से पंचायत की बिना अनुमति के 800 वर्गफीट में अवैध निर्माण किया गया था। जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ 50 लाख के लगभग है। बड़ी संख्या में तैनात पुलिस बल की मौजूदगी में एसडीएम नम: शिवाय अरजरिया की टीम ने अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। इसी तरह से खजरी खिरिया में कबाड़ी नजर अली की ओर से अवैध तरीके से लगभग 25 लाख की लागत से 2500 वर्गफीट में बनाया गया गोदाम भी जमींदोज कर दिया गया। इधर संयुक्त टीम ने एक और कार्रवाई करते हुए तहसील अधारताल के ग्राम चांटी के खसरा 130/2 में बना दो मंजिला भवन के 86 वर्गफीट में बने अवैध हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया।

पनागर तहसील के ग्राम पिपरिया बनियाखेड़ा में बालकिशन पटेल की ओर से पट्टे पर मिली आवासीय जमीन में से 1750 वर्गफीट जमीन पर 25 लाख की लागत से निर्मित गोदाम व तीन दुकानों को भी तोड़ा गया। कार्रवाई के दौरान स्थल छावनी में तब्दील हो गया। मौके पर एडिशनल एसपी अमित कुमार, एसडीएम आधारताल ऋ षभ जैन, सीएसपी गोहलपुर, अखिलेश गौर, सीएसपी अधारताल अशोक तिवारी व टीम के अन्य सदस्य मौजूद थे।

जबलपुर। नॉन बांडेड टीवी को ब्रांडेड बनाने का कारखाना शहर में सालों से संचालित हो रहा था। कारखाने में बनाई गई नकली टीवी को कारखाना संचालक सचिन जैन असली टीवी से थोड़े कम दामों में दुकानों और लोगों को बेचता था। वह सामान्य टीवी को इतनी सफाई से ब्रांडेड टीवी बना देता था कि कोई उसे पकड़ नहीं पाता था। शुक्रवार को एएसपी अमित सिंह और सीएसपी अखिलेश गौर समेत अन्य की टीम ने शुक्रवार को कारखाने पर छापा मारा, तो इसका खुलासा हुआ। पुलिस ने मौके से एक सैकड़ा से अधिक नॉन बांडेड टीवी जब्त किए, जिन्हें ब्रांडेड बनाने की तैयारी की जा रही थी। संचालक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुराने घर में कारखाना, नए में गोदाम
सीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि पुलिस ने सचिन के शांति नगर जैन मंदिर के पीछे स्थित घर पर दबिश दी। वह पुराना घर था। जहां सचिन ने कारखाना बना रखा था। टीम वहां पहुंची, तो देखा कि वह पांच नॉन ब्रांडेड टीविओं को ब्रांडेड टीवी बना रहा था। टीम ने उसे रंगेहाथ दबोचा। जांच के दौरान उसके नए मकान में दबिश दी गई, तो पता चला कि नए मकान को उसने गोदाम बनाकर रखा था। वहां विभिन्न ब्रांडेड कंपनियों के नकली टीवी रखे थे।
दस साल से अधिक से धंधा
सीएसपी गौर ने बताया कि प्राथमिक पूछताछ में आरोपी सचिन ने खुलासा किया कि वह पिछले दस सालों से यह धंधा कर रहा है। वह पहले ट्यूब वाले टीवी में यह गड़बड़झाला करता था और फिर उनके बंद हो जाने के बाद उसने एलसीडी और एलईडी में यह काम करना शुरू किया।
घर में ही बनाता था रैपर
किसी को उस पर शक न हो, इसलिए आरोपी सभी ब्रांडेड कंपनियों के टीवी के रैपर भी घर में ही तैयार करता था। वह कार्टबोर्ड को स्वयं मोड़ता और फिर नामी कंपनियों के ब्रांड की कलर फोटोकॉपी निकालकर उसे रैपर में चिपका देता था। मौके से रैपर भी जब्त किए गए हैं।
नकली टीवी में पायरेटेड साफ्टवेयर
सचिन बड़े ही शातिराना अंदाज में यह धंधा कर रहा था। वह दिल्ली से सामान्य टीवी खरीदकर शहर लाता और फिर उनमें ब्रांडेड कंपनी के टीवी के साफ्टवेयर बड़ी ही सफाई से अपडेट कर देता था। सभी नामी कंपनियों के सभी ब्रांड के टीवी के साफ्टवेयर उसके पास पेनड्राइव में रहत थे। वह टीवी पर असली जैसे दिखने वाले कंपनी के नाम के नकली स्टीकर भी स्वयं ही चिपकाता था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कंपनी के साफ्टवेयर उसे कौन देता था।
इलेक्ट्रिशियन और एकाउंटेंट भी
सचिन के इस फर्जीवाड़े का धंधा जबलपुर समेत आसपास के कई जिलों में फैला था। वह छोटी से लेकर बड़ी दुकानों और शोरूमों तक को टीवी सप्लाई करता था। वह अधिक से अधिक नकली ब्रांडेड टीवी बना सके इसके लिए उसने अपने कारखाने में पांच इलेट्रिशियन और रुपयों के लेनदेन का हिसाब रखने के लिए एक एकाउंटेंट भी रखा था। पुलिस इनसे भी जल्द पूछताछ करेगी।

 

जबलपुर। 'जबलपुर में सब ठीक है ना, माफिया के विरुद्ध कार्रवाई जारी रखें।Ó ये बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को शहर में अल्प प्रवास के दौरान कहीं। उन्होंने कोरोना वैक्सीनेशन की जानकारी ली। विधायक अजय विश्नोई ने जबलपुर के विकास को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उनके समक्ष रखे। सीएम शाम 5.55 बजे गोटेगांव से हेलीकॉप्टर से डुमना एयरपोर्ट पहुंचे। शाम छह बजे वे राजकीय विमान से भोपाल रवाना हो गए। इससे पहले सुबह 11.50 बजे भी सीएम चौहान भोपाल से राजकीय विमान से डुमना विमानतल पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय पर्यावरण व संस्कृति राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल भी थे। डुमना विमानतल पर विधायक अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी, नंदनी मरावी, अंचल सोनकर, हरेंद्रजीत सिंह बब्बू, शरद जैन, प्रभात साहू, मनोरमा पटेल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित्रा वाल्मीकि, नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर, डॉ. जीतेंद्र जामदार, कमलेश अग्रवाल, सोनू बचवानी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान सम्भागायुक्त बी. चंद्रशेखर, आइजी बीएस चौहान, कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री डुमना विमानतल पर कुछ देर रुकने के बाद केंद्रीय मंत्री पटेल के साथ हेलीकॉप्टर से अनूपपुर जिले के पोड़की गांव रवाना हो गए। वहां से वे कार से अमरकं टक गए।

यह तो रहा सामान्य घटनाक्रम। लेकिन, मुख्यमंत्री का इस तरह से हालचाल लेकर निकल जाने को सत्ताधारी भाजपा, और विपक्षी कांग्रेस के नेताओं ने सामान्य लहजे में नहीं लिया। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और विधायक अजय विश्नोई की नाराजगी तो जगजाहिर हो गई है। उनके साथ कुछ छोटे नेता भी हो लिए हैं। उधर, कांग्रेस नेता मजे ले रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने महाकोशल क्षेत्र की डंके की चोट पर अनदेखी की है। इसके बाद भी क्षेत्र के भाजपाई कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसी क्रम में भाजपा के भी तमाल नेता दबे शब्दों में कह रहे हैं कि क्षेत्र की अनेदखी बहुत हो चुकी है। इसमें सुधार बहुत जरूरी है। सिर्फ एयरपोर्ट से हालचाल ले लेने से बात नहीं बनने वाली है।

जबलपुर। नगर निगम प्रशासन, जबलपुर की ओर से गुलौआताल में प्रवेश शुल्क लिए जाने के निर्णय के खिलाफ क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में क्षेत्रीय बालिकाओं ने गुलौआताल में प्रदर्शन कर फिर से प्रवेश नि:शुल्क करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल बालिकाएं हाथों में तख्तियां लिए हुए थीं। उसमें लिखा हुआ था- 'मामा जी, हम बच्चों का हक न मारो। हमें भी चैन के साथ शुद्ध हवा लेने दो।

क्षेत्रीय पार्षद संजय राठौड़ की अगुवाई में किए जा रहे धरना प्रदर्शन में निखार ठाकुर, हर्षिता जैन, भावना सोंधिया, सिद्धि अग्रवाल, श्रद्धा सोंधिया, सीनम झारिया, नेहा सोंधिया, हर्षिता ठाकुर, महिमा सोंधिया, स्वेच्छा जैन, संध्या सोंधिया, रश्मि हुकुम, अंजली, अवनी उदैनिया, अंशिका मिश्रा, मनीषा, मिनी मिश्रा, कांग्रेस से अरुण जैन, तरुण महोबिया, आशीष भटकर, अमित विश्वकर्मा, रूपेश पाठक, नितिन पटेल, अंकुर साहू, सुमित सोनी और क्षेत्रीय लोग शामिल थे। यहां पहुंची बच्चियों ने कहा कि वे किसी भी हालत में मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाना चाहती हैं। उन्हें भरोसा है कि मुख्यमंत्री उनकी बातों को गम्भीरता से जरूर लेंगे। वहीं, क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि नगर निगम की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही। विकास कार्य तो हो नहीं रहे हैं, लेकिन शुल्क लेने के नाम पर कदम उठाने में देर नहीं लगाई जाती। नगर निगम के जिम्मेदारों ने मेंटीनेंस के नाम पर शुल्क लेने की वकालत कर रहे हैं। जबकि, इस बात का जवाब उनके पास नहीं है कि आखिर विकास कार्य क्यों नहीं किए जा रहे? क्या सिर्फ पार्क में एंट्री का शुल्क लेकर ही खजाना भरा जा सकता है।

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