>>: आसन पर समय सागर: आचार्य विद्यासागर की विरासत कोई साधारण नहीं, इस ज्याेत की जिम्मेदारी समय सागर पर

>>

Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment!

सागर. आज की घड़ी ऐतिहासिक है, आज से 56 वर्ष पूर्व एक ज्योत इस धरा पर प्रकट हुई, जिसने अपने प्रकाश से सारे भूमंडल को आलौकित किया, आज उसी ज्योति को युग युगांतरों तक ज्योतित बनाए रखने का महाअनुष्ठान है। उसका दायित्व आचार्य समय सागर के कंधों पर सौंपा जा रहा है। आचार्य विद्यासागर की यह विरासत कोई साधारण विरासत नहीं है, इस विरासत की परंपरा को आगे बढ़ाना किसी साधारण व्यक्ति के बस का भी नहीं है। - मुनि प्रमाण सागर

दमोह. परम्परा का निर्वहन, प्रतिष्ठा का अनुष्ठान, अनुशासन भी अपार। यह सब मंगलवार को जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में देखने को मिला। अपने गुरु के लिए श्रद्धा उमड़ पड़ी। मौका था समय सागर महाराज के आचार्य पदारोहण समारोह का। तीन लाख श्रद्धालुओं एवं हजारों संतों की उपस्थिति में मुनि समय सागर महाराज ने आचार्य पद स्वीकार किया। 40 डिग्री तापमान में भी श्रद्धा डिगी नहीं।

परम्परा:
आचार्य विद्या सागर महाराज को आचार्य पद अजमेर में मिला। ज्ञान सागर जी महाराज ने उन्हें आचार्यपद दिया। इसी परम्परा का अनुसरण करते हुए विद्यासागर जी महाराज ने समय सागर जी महाराज को आचार्य पद का उत्तराधिकारी घोषित किया। महा महोत्सव के ५० छुल्लक महाराज, १५० मुनी, १५० आर्यिकाएं, १००० ब्रम्हचारिणी दीदी, १००० ब्रम्हचारी भैया साक्षी बने। मंगलचार से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। ब्रम्हचारी सुषमा, नीरज व उन्नती दीदी ने मंगलाचरण किया।

प्रतिष्ठा: तीन पंडाल को मिलाकर एक पंडाल का निर्माण कराया गया। कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव सहित कई केंद्रीय मंत्री, सांसद व पूर्व विधायक-मंत्री मौजूद थे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए १००० कार्यकर्ताओं की टीम व्यवस्था के लिए तैनात की गई थी। वहीं, मंच पर ५२ अतिथियों के लिए ही स्थान दिया गया था। इस आचार्य पदारोहण कार्यक्रम में तीन लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।

पद पदारोहण
पहला चरण: आचार्य के आदेश को जनता के सामने रखा, बताया कैसे समयसागर के लिए हुआ आचार्य का आदेश
आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान के शुभारंभ के बाद मुनिसंघ ने पूरे कार्यक्रम की डोर अपने हाथ ली। जिसका संचालन वरिष्ठ मुनि प्रमाण सागर महाराज ने किया। इस दौरान निर्यापक और वरिष्ठ मुनियों ने उपस्थित श्राकवों को बताया कि आचार्य परंपरा क्या है, कैसे एक आचार्य, दूसरे आचार्य को नियुक्त करता है और उसकी क्या प्रक्रिया रहती है। इस दौरान आचार्य विद्यासागर के संलेखना के पूर्व निर्यापक मुनि योगसागर को दिए गए संदेश को भी पूरी जनता के सामने रखा गया। साथ ही आचार्य के आदेश को मानना चाहिए या नहीं, संघ और समाज के सामने प्रस्ताव रखा गया। जिस पर सभी ने एक सुर भी हामी भरी। इस दौरान निर्यापक मुनि योगसागर, निर्यापक सुधासागर और वरिष्ठ मुनि प्रमाण सागर ने अपने विचार भी इस विषय पर रखे।


आचार्यश्री के संलेखना के पूर्व दिए गए आदेश को सुनाया। उन्होंने कहा ९ फरवरी को आचार्यश्री ने मुझसे कहा था कि देखो, कल हमने आचार्य पद का त्याग करके संकल्प किया है। संघ के दायित्व और जिम्मेदारियों से अब में मुक्त हूं। मैं पूर्व निवृत्त हूं। मुझे किसी भी प्रकार का अब कोई विकल्प है। मेरी संकल्प पूर्व संलेखना चल रही है। आप लोग मेरी समाधि के बाद ये बातें उचित समय पर सभी के सामने रख देना। उचित समय पर निर्यापकगण व संपूर्ण संघ मिलकर मुनिराज समय सागर जी को आचार्य पद पर पदारोहित कर देना। संघ का विस्तार करना, संघ को बढ़ाना है। धर्म की प्रभावना करें, मेरा आशीर्वाद है।

मैंने इस मुनि के साक्षात कुंदकुंद की छबि देखी है।
निर्यापक सुधसागर ने कहा ने आचार्य पद परंपरा पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने ऋषभ देव से लेकर आचार्य विद्यासागर तक की परंपरा पर बात रखी। उन्होंने कहा ज्ञानसागर महाराज से किसी ने कहा कि आप इस उम्र में आचार्य पद क्यों ग्रहण कर रहे हो, जिस पर ज्ञानसागर ने कहा कि मैं अपने लिए ग्रहण नहीं कर रहा हूं, मेरा एक शिष्य इतना वीतरागी है कि दुनिया की कोई शक्ति उसे पद पर नहीं बैठाल पाएगी। मेरी आज्ञा ही उसको बैठाल पाएगी। ये मुनि नहीं, विद्यासागर नहीं है, ये साक्षात कुंदकुंद स्वामी का रूप है। मैंने इस मुनि के साक्षात कुंदकुंद की छबि देखी है। इतना वीतरागी है कि पदों के चक्कर में नहीं पड़ेगा। इस विश्वास के साथ मैंने यह पद लिया। मुनि प्रमाण सागर ने संचालन करते हुए कहा कि आचार्य महाराज के गौरव को आगे बढ़ाने का ध्वजवाहक बनाया जा रहा है, ऐसे आचार्य समय सागर महाराज की जय।

दूसरा चरण, आचार्य आसन का लोकार्पण, मंत्रोच्चार के साथ विधि कराई गई संपन्न

You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at mpnews661@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription.