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आरटीआई के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश सूचना आयोग ने उठाया ये कदम Thursday 04 August 2022 02:01 PM UTC+00 मध्यप्रदेश सूचना आयोग ने तकनीक के क्षेत्र में नया नवाचार किया है। राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार के तहत आने वाले मामलों की कार्यवाही करने के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में लाइव प्रसारण शुरू किया है। इसके पीछे आयोग की मंशा है कि आयोग से जुड़ी कार्यवाही में पारदर्शिता रहे दूसरा कानून के बारे में लोगों के अंदर जागरूता आए साथ ही सूचना के अधिकार के प्रति आम लोगों का भरोसा और विश्वास भी बढ़ता है। आयोग का दावा है कि कार्यवाही का लाइव प्रासरण करने वाला देश का पहला राज्य सूचना आयोग है। हाईकोर्ट में तथ्यों के रूप में भेजे गए लाइव प्रसारण के लिंक राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि कई मर्तबा लोग सूचना अधिकारी फैसले को हाईकोर्ट में चैलेंज कर देते हैं। उनका हाईकोर्ट में ये कहना होता है कि सूचना आयोग में उनका पक्ष सुना ही नहीं गया और उन्हें मौका नहीं मिला। ऐसे मामलों में आयोग की ओर से लाइव प्रसारण का लिंक हाईकोर्ट में अहम तथ्य के रूप में दिया जाता है। और बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि लोक सूचना अधिकारी का पक्ष सुना गया या नहीं। धीरे- धीरे लोगों का बढ़ता गया रूझान सूचना आयोग की ओर से जब कार्यवाही का लाइव प्रसारण साल 2020 में शुरू किया गया तो लोगों का कोई खास रूझान सामने नहीं आया। लेकिन जब नियमित रूप से कार्यवाही का प्रसारण होने लगा तो लोग भी अपना रूझान दिखाने लगे। अब सूचना आयोग की एक कार्यवाही को हजारों लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखते हैं और अन्य जगहों पर साझा करते हैं। हाईटेक सुनवाई पर भी आयोग का फोकस सुनवाई के परंपरागत तरीकों को हाईटेक बनाने के लिए भी आयोग की ओर से लगातार कार्य किए जा रहे हैं। जहां पहले आयोग की सभी सुनवाई पत्राचार के जरिए होती थी। सुनवाई से पहले पत्र भेजे जाते थे और 15 से 20 दिन का वक्त एक सुनवाई में लग जाता था। लेकिन अब वाट्सएप से ही पत्राचार कर लिया जाता है। और भोपाल मुख्यालय में लगे स्पीकर से सुनवाई से जुड़े सभी पक्षों को वॉइस कॉल के जरिए जोड़ लिया जाता है। जिससे त्वरित सुनवाई होती है। साथ ही पत्राचार में लगने वाला वक्त और धन दोनों की बचत होती है। कम अमला हाईटेक की राह में बड़ी चुनौती राज्य सूचना आयोग के हाईटेक होने की राह में सबसे बड़ी चुनौती कम अमला का होना है। जिसके कारण कभी- कभी समस्या बढ़ जाती है। क्योंकि ऑनलाइन सुनवाई से पहले सभी पक्षों के फोन नंबर सहित तमाम प्रकार का डाटाबेस तैयार करना पड़ता है और उन्हें सुरक्षित भी रखना पड़ता है। यानी की कार्यवाही से जुड़े तमाम पक्षों के नंबर से लेकर मेल एड्रेस तक तमाम तमाम चीजें सुरक्षित रखनी पड़ती है जिसको मेंटेन करना एक पड़ी चुनौती है। वर्जन देश का पहला ऐसा कमीशन है जो लाइव सुनवाई करता है। यद्यपी मामले से जुड़े कई अधिकारियों को को इससे दिक्कत भी होती है। लेकिन इससे पारदर्शिता बरकरार रहती है। इसी के साथ डिजिटल सुनवाई पर भी फोकस है। मुझे लगता है अगर सभी आयोगों में डिजिटल सुनवाई होने लगे तो बेहद समय बचेगा। राहुल सिंह, राज्य सूचना आयुक्त |
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