>>: नदियों को जोड़कर बिजली-पानी, बाढ़ और सूखे के संकट से निपटेगी सरकार

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भोपाल। राष्ट्रीय जल संरक्षण प्राधिकरण (एनडब्ल्यूडीए) ने देश की 30 बड़ी नदियों को आपस में जोडऩे की रूप रेखा तैयार कर ली है। प्राधिकरण अब एक-एक कर दो या दो से अधिक राज्यों की बैठक कर इन नदियों को जोडऩे से राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आपदा से भी निपटने के रोडमैप से अवगत कराने का काम शुरू करने जा रहा है। इन परियोजनाओं में मध्य प्रदेश की सीधे तौर पर राष्ट्रीय नदी जोड़ो प्रोजेक्ट में केन-बेतवा लिंक परियोजना के अलावा पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा पार्वती-कुन्नु-सिंध शामिल हैं इसके अलावा दो नदियों (महानदी-गोदावरी और गोदावरी-कृष्णा) का प्रदेश में कैचमेंट है।
प्राधिकरण ने केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित आठ परियोजनाओं की डीपीआर और 22 परियोजनाओं की फिजिबिल्टी सर्वे भी कर लिया है।

इस संबंध में संबंधित राज्यों को भी इससे अवगत करा दिया है। नदियों को जोडऩे से प्रदेश में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ साथ बाढ़ तथा सूखे की समस्या से निजात मिलेगा। क्योंकि पिछले कई वर्षों से यह देखा जा रहा है कि कई राज्यों में भारी बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है और कई राज्यों में सूखे की स्थितियां बनी रहती हैं। राज्य बारिश के पानी को तीस फीसदी भी संरक्षित कर उसका उपयोग नहीं कर पाते हैं। नदी जोड़ प्रोजेक्ट पर दो या उससे अधिक राज्यों को मिलकर परियोजना पर काम करना होगा। इसके बाद ही इन नदियों को जोड़कर इन परियोजनाओं को 80-90 फीसदी तक राशि केन्द्र सरकार देगी, लेकिन दस-बीस फीसदी राशि राज्य सरकारों को देना होगा।

जल विवाद बड़ा विषय
राज्य सरकारों के बीच पानी बंटवारे को लेकर आपसी सहमति बनने के बाद ही इन परियोजनाओं को मूर्तरूप दिया जा सकता है। इन परियोजनाओं की फिजिबिल्टी सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद जिन राज्यों से नदिया निकलती हैं अथवा नदियों का कैचमेंट एरिया आ रहा है इससे उन्हें यह हिसाब किताब लगाना है कि उन्हें इससे कितना नफा और नुकसान है। कई राज्यों में सिर्फ बड़ी नदियों की सहायक नदियां हैं इससे राज्यों को उनका पानी रोकने के लिए खुद के पैसे से बांध बनाना पड़ेगा।

ये कहता है एनडब्लूडीए
एनडब्ल्यूडीए के निदेशक भोपाल सिंह का कहना है कि केन-बेतवा ***** परियोजना सहित आठ परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर ली है। 22 नदी जोड़ परियोजनाओं के फिजिबिल्टी रिपोर्ट के संबंध में भी राज्यों को जानकारी दे गई है। अब परियोजनाओं में शामिल दो या दो से अधिक राज्यों को बुलाकर उन्हें संबं?धित परियोनाओं के संबंध में बताने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्हें राज्यों को आपसी सहमति बनाने के संबंध में कोशिश की जाएगी। इसमें पानी बंटवारा बड़ा मुद्दा है, क्योंकि राज्य यह मानने को तैयार नहीं होते हैं कि उनके यहां अतिरिक्त पानी है।

ये कहते हैं एक्सपर्ट
नदियों को जोडऩे से प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नदियों पर बांध बनाने, बिजली उत्पादन संयंत्र लगाने और सिंचाई का सौ फीसदी रकबा बढ़ाया जा सकेगा। चुंकि सभी राज्यों की नदियों के बाढ़ का पानी और मप्र के बारिश का पानी सभी बड़ी नदियों में जाता है, इससे अक्सर यहां से बाध नियंत्रण पर काबू किया जा सकता है।
जीपी सोनी, सेवा निवृत्त चीफ इंजीनियर, जल संसाधन विभाग

ये हैं मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की सीधे तौर पर नदी जोड़ो परियोजनाएं
- केन-बेतवा लिंक परियोजना-- मध्य प्रदेश- उत्तर प्रदेश
- पार्वती-कालीसिंध-चंबल-- मध्य प्रदेश - उत्तर प्रदेश -राजस्थान
- पार्वती- कुन्नु- सिंध ---मध्य प्रदेश - -राजस्थान
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इनका प्रदेश में आएगा कैचमेंट और मिलेंगी सहायक नदियां
महानदी---मध्य प्रदेश के बालाघाट क्षेत्र की नदियां
गोदावारी - अनूपपुर और अमरकंटक क्षेत्र की नदियां

इन नदियों से उपलब्ध होगा बिजली, सिंचाई, पीने-उद्योग का पानी,
महानदी- गोदावरी--
सिंचाई 4.43 लाख हेक्टेयर
पीने और उद्योगों के लिए पानी-802 एमसीएम
बिजली 445 मेगावाट

गोदावरी-कृष्णा
सिंचाई 9 लाख हेक्टेयर
पीने और उद्योगों के लिए पानी-650 एमसीएम
बिजली 975 मेगावाट

केन-बेतवा
सिंचाई 10.62 लाख हेक्टेयर
पीने और उद्योगों के लिए पानी-228.9 एमसीएम
बिजली 130 मेगावाट

पार्वती-कालीसिंध-चंबल
सिंचाई 2.20 लाख हेक्टेयर
पीने और उद्योगों के लिए पानी-13.2 एमसीएम
बिजली 00 मेगावाट

- पार्वती- कुन्नु- सिंध- इसका आकलन रिपोर्ट तैयार नहीं हुआ है।

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