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अब देश के किसी भी कौने में अपराध करने वालों की खैर नहीं, सिर्फ एक क्लिक पर खुलेगी कुंडली Sunday 03 July 2022 01:45 PM UTC+00 भोपाल. अपराधी कितना भी झूठ बोले, पर मौके पर मिले साक्ष्य सच और झूठ का फर्क खत्म कर देते हैं। मौके से मिले फिंगर प्रिंट्स से न केवल अपराधियों की पहचान आसान हुई है, बल्कि अब अन्य राज्यों के अपराधियों की भी धरपकड़ संभव हो सकी है। ऐसा नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर आइडेंडिटी सिस्टम (नेफिस) से संभव हुआ है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने अप्रेल से मप्र समेत 18 प्रदेशों में अपडेट सिस्टम को लॉन्च किया है। अब मप्र के सभी थानों में आने वाले आदतन अपराधियों और गंभीर प्रकरणों के आरोपियों के फिंगर प्रिंट्स इसी सॉफ्टवेयर में फीड किए जा रहे हैं। मौका-ए-वारदात पर मिले फिंगर प्रिंट्स से प्रदेश ही नहीं देश के अन्य राज्यों के अपराधियों के फिंगर प्रिंट्स से इनका मिलान होता है। फिंगर प्रिंट्स का मिलान होते ही आरोपी की पूरी कुंडली कम्प्यूटर स्क्रीन पर होती है। प्रदेश में अभी तक 10.50 लाख अपराधियों के फिंगर प्रिंट्स इस सॉफ्टवेयर में अपलोड किए जा चुके हैं। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर में आवश्यकता के अनुसार दो से तीन फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट मुहैया कराए गए हैं। अन्य जिलों में एक-एक फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट हैं। गंभीर मामलों की जांच के दौरान ये फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट मौके से साक्ष्य इकट्ठा करते हैं, जिनका नेफिस सॉफ्टवेयर में दर्ज फिंगर प्रिंट्स से मिलान होता है।
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मप्र पुलिस, एससीआरबी के अन्य सॉफ्टवेयर स्टेट ऑटोमेटिक फिंगर आइडेंडिटी सिस्टम का उपयोग करते थे। इसमें मप्र के अपराधियों का डाटा सुरक्षित रहता है। यदि अन्य राज्यों से बदमाश अपराध को अंजाम देते थे तो पहचान मुश्किल होती थी।
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