>>: Digest for November 23, 2021

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Table of Contents

भोपाल. पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच शिवराज सरकार ने कमलनाथ सरकार का फैसला पलट दिया है। जिसके तहत ऐसी पंचायतों का परिसीमन निरस्त कर दिया है, जहां पिछले एक साल से चुनाव नहीं हुए हैं। अब ऐसी सभी जिला, जनपद या ग्राम पंचायतों में पुरानी व्यवस्था से चुनाव से होंगे। यह व्यवस्था उन पंचायतों में लागू नहीं होगी, जिसके क्षेत्र किसी नगरीय क्षेत्र में सम्मिलित किए गए हैं। इसके लिए सरकार ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश -2021 लागू कर दिया है, जिसकी रविवार को देर शाम अधिकसूचना जारी कर दी है।


जानकारी के अनुसार पंचायतों को परिसीमन चुनाव से पहले करने का प्रावधान है। इसलिए ऐसी पंचायतें जहां परिसीमन हो गया है, लेकिन उसके प्रकाशन से एक साल के अंदर चुनाव नहीं हुए हैं, तो उक्त परिसीमन को निरस्त माना जाएगा। इस कारण अब ऐसी व्यवस्था लागू हो जाएगी, जो परिसीमन के पहले थी। इसी के साथ आरक्षण भी वैसा ही रहेगा, जैसा पहले था।

इन जिलों में बनी अधिक पंचायतें, इनमें हुई समाप्त

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में 137, नरसिंहपुर में 103 और राजगढ़ में करीब 80 नई पंचायतें बनी, वहीं सागर में 25, खरगोन में 19 और शिवपुरी में 13 पंचायतों को समाप्त कर दिया गया।


1200 पंचायते बनाई थी नई
कमलनाथ सरकार ने 2019 में जिले से लेकर ग्राम पंचायतों तक नया परिसीमन कर करीब 1200 नई पंचायतें बनाई थी, वहीं दूसरी और 102 ग्राम पंचायतों को खत्म किया था, मध्यप्रदेश में करीब 23 हजार 835 ग्राम पंचायतें हैं। 904 जिला पंचायत सदस्य और 6035 जनपद सदस्य त्रि-स्तरीय पंचायत का प्रतिनिधित्व करते हैं। साल 2014-15 में हुए पंचायत चुनाव का 2020 तक कार्यकाल रहा।

भोपाल. भले ही हमीदिया अस्पताल में हुए हादसे को दो सप्ताह से अधिक बीत गए हैं। लेकिन आग की लपटें अभी भी परिजनों को झुलसा रही है। ऐसा ही एक मामला रविवार को उस समय सामने आया जब एक बच्चे का पीएम हुआ, परिजन यह जानकर हैरान रह गए कि जिस बच्चे का शव उन्हें थमाया गया है, उस पर किसी और माता-पिता का नाम लिखा है। ऐसे में रोता-बिलखता पिता बच्ची के शव को लेकर भटकता रहा, लेकिन कोई उसकी एक सुनने को तैयार नहीं था, चूंकि यह उसकी पहली संतान थी, इस कारण उसकी आंखों में जहां एक और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा था, वहीं आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।


यह है पूरा मामला
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 8 नवंबर को एसएनसीयू में लगी आग में झुलसी एक और बच्ची की मौत हो गई। शनिवार को हमीदिया अस्पताल से गैरतगंज निवासी नवीन विश्वकर्मा को उनकी बेटी का शव सौंपा। पिता रविवार को शव लेकर गैरतगंज पहुंचे, जहां बच्ची का सिर और हाथ झुलसा मिलने पर अन्य लोगों को जानकारी दी। खबर मिलते ही गैरतगंज में हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस के पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल के साथ परिजनों ने शव लेकर स्टेट हाइवे पर जाम लगाया। प्रशासन के बच्ची के शव का पीएम कराने की शर्त पर जाम खुला। पीएम करने वाले डॉक्टर ने बताया कि शव पर किसी अन्य माता-पिता पूजा/विक्रम के नाम की पर्ची है। तब नवीन शाम को निजी वाहन से शव को लेकर फिर हमीदिया गया, लापरवाही का आरोप लगाकर उसने बताया कि 16 अक्टूबर को जिला अस्पताल रायसेन में बेटी का जन्म हुआ। 21 अक्टूबर को उसे हमीदिया रेफर किया। 8 नवंबर को आग की घटना के बाद से वे बच्ची को तलाश रहे थे। शनिवार को बच्ची की मौत की जानकारी देते हुए शव दिया गया।

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पहली बेटी को ही खोया
नवीन की यह पहली बेटी थी, जिसे बड़ी मुश्किल से पाया था। वह भी हाथ से निकल गई। यह भी तय नहीं हो पा रहा है कि जिस बेटी का शव उसे दिया गया, वह उसकी ही है, या किसी ओर माता-पिता की जो अपनी बेटी को खोज रहे होंगे। दुख की बात ये है कि हादसे के बाद आंकड़ों को छिपाने की यह बाजीगरी कई मां-बाप को अपने बच्चों की असलियत का पता नहीं चलने दे रही है।

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हमारे यहां बच्चों के बदलने की गुंजाइश नहीं है। सबकी अलग-अलग एंट्री होती है। इस बच्चे को भी सौंपने से पहले हमने माता-पिता को दिखाया था। किसी भी बच्चे को स्लिप लगाकर माता पिता को नहीं सौंपा जाता। बच्ची की मौत सेप्टीसीमिया के कारण हुई है।
-डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव, विभाग अध्यक्ष शिशु रोग विभाग

भोपाल. सीबीआइ ने हाल ही में देश भर में छापे मारकर बच्चों के लैगिंक शोषण कर उनके वीडियो बनाने और प्रसारित करने वाले गिरोह का खुलासा किया है।


मुरैना में भी इस गिरोह से जुड़ा एक अपराधी मिला है। राजधानी में अब तक चाइल्ड पोर्नोग्राफी का कोई मामला भले ही सामने नहीं आया हो लेकिन बच्चोंं के यौन शोषण और लैगिंग अपराधों के कई मामले सामने आ चुके हैं। साफ है कि शहर के कई बच्चों पर भी अपराधियों की गंदी नजर पड़ चुकी है। ऐेसे में बच्चों को हमारे आपके बीच के इन अपराधियों और ऐेसे खतरनाक अपराध से बचाया जाना जरुरी है।


केस 1. प्यारे मियां कम उम्र की बच्चियों को पढ़ाई और परवरिश कराने के बहाने गोद लेता था। इन बच्चों को खास तरह की डाइट देकर जल्द बड़ा किया जाता था। फिर उन्हें नशे की लत लगाकर पार्टियों में रसूखदारों के सामने पेश किया जाता था। यौन शोषण के आरोप में प्यारे मियां जेल में बंद है वहीं इस मामले की कई परतें तो अब खुल ही नहीं सकीं।

केस 2. पुराने शहर में रहने वाले कुछ किशोरों ने लॉकडाउन में पोर्न मूवी देखी। इसके बाद 12 साल के बच्चे का लैगिंक शोषण भी किया। बच्चों के चाचा की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किशोरों को बाल सुधार गृह भेजा। वहां उनकी काउंसलिंग की गई। जिसमें सामने आया कि उन्हें लंबे समय से पोर्न देखने की आदत थी।


बच्चों के शोषण के खिलाफ बड़ा कानून
साइबर लॉ एक्सपर्ट यशदीप चतुर्वेदी बताते हैं, लैगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में भी बच्चों के लैगिंक शोषण पर कड़े प्रावधान हैं। इसमें बालक का मतलब 18 साल से कम के किसी भी किशोर-किशोरी या बच्चे से है। कानूनों के अनुसार बच्चों को शोषण से बचाने और उनके शोषण से जुड़ा कोई भी कंटेट प्रसारित होने से रोकने के लिए प्रावधान लागू है। इन कानूनों के अनुसार किसी भी ऐेसे वीडियो, फोटो, या ऐेसे किसी कंटेट जिसमें जिसमें बच्चों का अश्लील चित्रण या लैगिंग क्रियाओं में दिखाया गया हो अपराध है। एेसे कंटेट को रखना, देखना, प्रसारित करना, दिखाना या किसी भी तरह से हस्तांतरित या प्रचारित करना या किसी को देखने के लिए प्रोत्साहित करना गंभीर अपराध में आते हैं।

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शहर में अब तक पोनोग्राफी का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन पोर्न मटेरियल देखने और इसे देखकर शोषण के कई मामले सामने आ चुके हैं। बच्चों और किशोर-किशोरियों को शोषण से बचाने के साथ पोर्न से बचाना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
-अर्चना सहाय, डायरेक्टर, चाइल्ड लाइन

कलेजे के टुकड़े पर लिखा था किसी और माता-पिता का नाम-पीएम से हुआ बड़ा खुलासा


संक्रमण काल में बच्चे इंटरनेट पर बहुत निर्भर हो गए, पिछले दो सालों से वे इंटरनेट के माध्यम से ही पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो देखने या सर्फिंग के दौरान कई बार अश्लील विज्ञापन या अश्लील साइट की लिंक आ जाती है, बच्चे इस पर उत्सुकतावश क्लिक कर देते हैं जिनसे अश्लील कंटेट तक पहुंच जाते हैं। इस तरह से कई बच्चों के शिकार बनने तो कई बार विधि विरुद्ध जाने के मामले सामने आए हैं। बाल आयोग ने एेसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल सहित सम्बंधित विभागों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पत्र लिखा है। वहीं अन्य उपाय भी उठाए जाने की दिशा में कार्य चल रहा है।
-ब्रजेश चौहान, सदस्य, मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग

भोपाल. मध्यप्रदेश में कोविड प्रभावितों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इसके अंतर्गत कोरोना से मौत हो जाने पर मृतक के परिजन को अनुग्रह राशि दी जाएगी. परिजन को सहायता के रूप में 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टर को निर्देश जारी कर दिए हैं।

खास बात यह है कि आदेश में कहा गया है कि मुआवजा पाने के लिए डेथ सर्टिफिकेट में कोविड से मौत दर्ज होना जरूरी नहीं है। इस संबंध में दस्तावेज प्रमाणित करने के अधिकार एक कमेटी को दिए गए हैं जिसकी कलेक्टर अध्यक्षता करेंगे। यह कमेटी 30 दिन में निर्णय करेगी। जानकारी के अनुसार सरकार के ये नए नियम 31 दिसंबर तक लागू रहेंगे।

कोरोना से प्रदेश में कई मौतें हुईं. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक कोविड से अभी तक प्रदेश में 10,526 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। कोेरोना महामारी से कई अन्य लोगों की मौत भी हुई हैं, लेकिन सर्टिफिकेट में इसका जिक्र नहीं किया गया। नए निर्देश के बाद ऐसे लोगों के परिजनों को भी मुआवजा मिल सकेगा.

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इसके लिए मृतक के परिजन को डेथ सर्टिफिकेट पेश करना होगा। डेथ सर्टिफिकेट में कोरोना का जिक्र नहीं होने पर जिला स्तर पर गठित कोरोना संक्रमण कमेटी से मृत्यु प्रमाणित करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। सर्टिफिकेट में यदि मृतक के वारिस का उल्लेख नहीं है, तो भी यही प्रक्रिया अपनानी होगी.

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी किया था सर्कुलर
गौरतलब है कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था. इसके बाद गृह मंत्रालय ने राज्यों को सर्कुलर जारी किया था. इसमें यह भी कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 3 सितंबर को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे मृतकों के परिजनों के लिए भी अनुग्रह राशि लागू होती है, जो लोग राहत कार्यों या फिर तैयारी की गतिविधियों में शामिल थे।

 

भोपाल। मध्यप्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव की एक आत्मकथा की आज भी चर्चा होती है। किताब का पहला भाग आ चुका था, दूसरे भाग का इंतजार था। इस किताब में यादव कुछ ऐसी बातें लिखने वाले थे, जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ जाता। उन्होंने कहा भी था कि दूसरे भाग में वे व्यापमं से जुड़ी कुछ बातें लिखने वाले हैं। लोगों को इंतजार था। लेकिन, अफसोस, दूसरा भाग नहीं आ सका और देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटाले से जुड़ी कहानी अधूरी रह गई।


मध्यप्रदेश के राज्यपाल रहे रामनरेश यादव की पुण्य तिथि (22 नवंबर) के मौके पर प्रस्तुत है, उनसे जुड़े किस्से...।

 

 

 

 

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में 1 जुलाई 1928 को जन्मे रामनरेश यादव जो लिख रहे थे, उसका इंतजार सभी को था। खासकर मध्यप्रदेश के लोगों को। क्योंकि देश का सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला यहीं हुआ था। जिसे आज भी लोग व्यापमं के नाम से जानते हैं। यादव की आत्मकथा का पहला भाग रिलीज हो चुका था, दूसरे की तैयारी चल रही थी। किसी को नहीं पता था कि इससे पहले ही उनका निधन हो जाएगा। निधन के बाद तक वे खुद भी व्यापमं घोटाले से बरी नहीं हो पाए थे।

 

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200 पन्नों की थी 'मेरी कहानी'

राज्यपाल पद पर रहते हुए रामनरेश यादव ने 'मेरी कहानी' नामक एक राजनीतिक जिंदगा का सफरनामा लिखा। 200 पन्नों की इस किताब में कांग्रेस के प्रति आभार व्यक्त किया गया था, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी, चरण सिंह और वीपी सिंह जैसे उनके जमाने के तमाम दिग्गजों का नाम तक नहीं लिया गया था। लेकिन, ये किताब इसलिए अधूरी नहीं है। अधूरा रहने की वजह यह है, इस किताब में व्यापमं घोटाले में उनकी भूमिका और संलिप्तता का उल्लेख न मिलना।


यह बात सही है कि जब व्यापमं से पर्दा उठा तो धड़ाधड़ गिरफ्तारियां होने लगी थीं, जांच कमेटी अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ लगा रही थी। तब संवैधानिक पद पर होने के कारण नाम आने के बावजूद यादव को गिरफ्तार नहीं किया गया। लेकिन, उनकी व्यापमं मामले में संलिप्तता सामने आना बड़ी बात थी। इससे भी बड़ी बात थी, उनके बेटे शैलेष यादव की मौत। व्यापमं घोटाले में फंसे उनके बेटे शैलेष की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत होने के बाद भी उनकी आत्मकथा में इस घटना को जगह नहीं मिली।

 

वो यादें भी नदारद

अपनी कहानी में यादव ने ईमानदारी के साथ इस बात की चर्चा की थी कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह उन पर आंख बंद करके भरोसा करते थे, पर व्यापमं वाले हिस्से को वे नहीं लिख पाए, जबकि इस घोटाले मे फंसे उनके बेटे शैलेष यादव की रहस्यमय मौत हो गई थी और उनका विश्वसनीय ओएसडी धनराज यादव भर्तियों के बदले घूस लेने के आरोप में जेल चले गया।

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बेटे ने कर ली थी खुदकुशी

व्यापमं महाघोटाले के चलते ये पहलू सबसे ज्यादा चर्चा में रहा कि अपनी गिरफ्तारी के डर के कारण और पिता की प्रतिष्ठा दांव पर लगते देख उनके बेटे शैलेष यादव ने खुदकुशी कर ली। वास्तविक कारण जो भी रहा हो, अपनी किताब में रामनरेश यादव इससे भी कन्नी काट गए थे।

 

 

रामनरेश यादव की 'मेरी कहानी' में उनके राजनीतिक सफर की कहानी ही भरपूर है। इस किताब में उन्‍होंने कांग्रेस में आने, सीएम बनने और यूपी में उनके सीएम रहते समय हुए सांप्रदायिक दंगों को सुलझाने के घटनाक्रम के बारे में काफी कुछ बताया, लेकिन राज्यपाल के तौर पर उनके कार्यों को किताब में न के बराबर ही जगह मिली है।

रामनरेश यादव का 89 वर्ष की उम्र में 22 नवंबर 2016 को निधन हो गया था। मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभालने वाले रामनरेश यादव मुद्दतों तक व्यापमं महाघोटाले की वजह से चर्चाओं में याद किए जाते हैं।

 

  • यहां देखें व्यापमं से जुड़े कुछ पुराने वीडियो

भोपाल। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) के भाव में गिरावट देखने को मिल रही है. वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. भारतीय तेल कंपनियों ने आज (सोमवार) भी ईंधन की कीमतों (Fuel Prices) में कोई बदलाव नहीं किया है. बता दें कि अक्टूबर में रिकॉर्ड महंगाई के बाद नवंबर महीने में दिवाली से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

क्या है भोपाल का रेट

आज 22 नवंबर को राजधानी भोपाल में पेट्रोल 107.23 रुपये लीटर और डीजल 90.87 रुपये लीटर के करीब बिक रहा है। बता दें कि एक्साइज ड्यूटी कम किए जाने के बाद कई राज्यों ने अपने यहां वैट में कटौती की थी। पंजाब, कर्नाटक, पुडुचेरी, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, असम, सिक्किम, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गोवा, गुजरात, दादर, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, मेघालय और लद्दाख शामिल हैं।

जानिए बाकी राजधानियों के हाल

>> दिल्ली पेट्रोल 103.97 रुपये और डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर
>> मुंबई पेट्रोल 109.98 रुपये और डीजल 94.14 रुपये प्रति लीटर
>> चेन्नई पेट्रोल 101.40 रुपये और डीजल 91.43 रुपये प्रति लीटर
>> कोलकाता पेट्रोल 104.67 रुपये और डीजल 89.79 रुपये प्रति लीटर
>> श्रीगंगानगर पेट्रोल 114.01 रुपये और डीजल 98.39 रुपये प्रति लीटर

सुबह 6 बजे कीमतों में होता है बदलाव

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव रोजाना सुबह 6 बजे होता है। सुबह 6 बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड-र्व की क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है।

जानिए आपके शहर में कितना है दाम

पेट्रोल-डीजल की कीमत आप एसएमएस के जरिए भी जान सकते हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, आपको RSP और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा। हर शहर का कोड अलग-अलग है, जो आपको आईओसीएल की वेबसाइट से मिल जाएगा।

रावण या कुंभकरण दो ऐसे नाम जो दुनिया में केवल एक बार ही सामने आए और फिर कभी किसी ने अपने बच्चों के ये नाम नहीं रखे। वहीं इनके पृथ्वी पर तीन बार आने पर भी इनके उन अवतारों में रखे गए नाम भी एकाएक कोई नहीं रखता। इन दोनों ने हर बार अपने अवतार में राक्षस मूल को चुना।

दरअसल राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को 'दशानन' के नाम से भी जाना जाता है। रावण को लंका का एक तमिल राजा कहा जाता है। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का जानकार होने के साथ ही ब्रह्मज्ञानी व कई तरह की विद्याओं का भी जानकार था।

इन्द्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानने के कारण ही रावण को 'मायावी' भी कहा जाता था। उसके पास पुष्पक नामक एक ऐसा विमान भी था, जो किसी दूसरे के पास नहीं था। ये ही वे मुख्य कारण थे जिसके चलते सभी उससे डरते थे।

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कौन था रावण?
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार रावण व कुंभकरण अपने जन्म से पूर्व में भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय थे। एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सनक, सनंदन आदि ऋषि भगवान विष्णु के दर्शन के लिए विष्णुलोक पहुंचे, परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें द्वार पर ही रोककर अंदर जाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि अभी भगवान अभी विश्राम कर रहे हैं।

जय व विजय की इस घ्रष्टता पर ऋषियों ने क्रोध में आकर उन दोनों को शाप देते हुए कहा कि 'जाओ तुम राक्षस बन जाओ।' इसके बाद जय और विजय ने अपने अपराध के लिए ऋषियों से क्षमा मांगी। साथ ही भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से इन्हें क्षमा करने को कहा।

इस पर ऋषियों ने कहा कि हमारा शाप खाली नहीं जा सकता। हां, इसमें यह परिवर्तन हो सकता है कि तुम हमेशा के लिए राक्षस नहीं रहोगे, लेकिन कम से कम 3 जन्मों तक तो तुम्हें राक्षस योनि में रहना ही होगा और उसके बाद तुम पुन: इस पद पर प्रतिष्ठित हो सकोगे।

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परंतु इसके साथ एक और शर्त यह है कि भगवान विष्णु या उनके किसी अवतारी-स्वरूप के हाथों तुम्हारा मरना अनिवार्य होगा। वहीं इस दौरान ऋषियों ने यह भी कहा यदि तुम अपने इन जन्मों के दौरान भी भगवान विष्णु भक्त बने रहे, तो तुम्हें पांच जन्म लेने होंगे, वहीं यदि तुम इन जन्मों के दौरान विष्णु विरोधी बने तो तुम तीन जन्मों के बाद ही अपना स्थान वापस पा सकोगे।

ऋषियों के इसी शाप के चलते भगवान विष्णु के इन द्वारपालों (जय-विजय) ने सतयुग में अपने पहले जन्म में हिरण्याक्ष (विजय) व हिरण्यकशिपु (जय) राक्षसों के रूप में जन्म लिया। हिरण्याक्ष राक्षस बहुत शक्तिशाली था। जो पृथ्वी को लेकर जल में चला गया था।

ऐसे में पृथ्वी को जल से बाहर निकालने के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार लेना पड़ा। इस अवतार में उन्होंने धरती पर से जल को हटाने के लिए काफी कार्य करना पड़ा। उनके इस कार्य में हिरण्याक्ष बार-बार विघ्न डालता था, अत: अंत में श्रीविष्णु ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को बाहर निकाला और उसके बाद धरती को पुन: मनुष्यों के रहने लायक स्थान बनाया।

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वहीं हिरण्याक्ष का भाई हिरण्यकशिपु भी ताकतवर राक्षस था और उसने तप करके ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था। वरदान में उसने जो मांगा उसके अनुसार उसे न कोई आकाश में मार सकता है और न धरती में और न ही पाताल में। न दिन में और न रात में। न कोई देव, न राक्षस और न मनुष्य मार सकता है तो फिर चिंता किस बात की? यही सब विचार करने के बाद उसने खुद को ईश्वर घोषित कर दिया था।

भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करने के कारण वह भगवान विष्णु विरोधी हो गया, लेकिन जब उसे पता चला कि उसका पुत्र प्रहलाद विष्णुभक्त है। तो उसने उसे मरवाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन वह अपने पुत्र को मार नहीं सका। जबकि अंत में उसने एक खंभे में तलवार मारकर प्रहलाद से पूछा- 'यदि तेरा भगवान सभी जगह है तो क्या इस खंभे में भी है?'

खंभे में तलवार मारते ही खंभे से भगवान विष्णु नृसिंह रूप में प्रकट हुए, जो न देव थे और न राक्षस और न मनुष्य। और उस समय न रात थी न दिन यानि शाम का समय था। इस नृसिंह अवतार में भगवान विष्णु अर्धमानव और अर्धपशु थे। और उन्होंने संध्याकाल में हिरण्यकशिपु को अपनी जंघा पर बिठाकर (यानि न धरती पर न आकाश में) उसका वध कर दिया।

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IMAGE CREDIT: patrika

वध होने के बाद ये ही दोनों भाई त्रेतायुग में रावण(जय) और कुंभकर्ण (विजय) के रूप में पैदा हुए और फिर श्रीविष्णु अवतार भगवान श्रीराम के हाथों मारे गए। अंत में वे तीसरे जन्म में द्वापर युग में दंतवक्त्र (वहीं कुछ लोग इसे कंस बताते हैं(जय)) व शिशुपाल(विजय) नाम के अनाचारी के रूप में पैदा हुए। इन दोनों का भी वध भी भगवान श्रीविष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के हाथों हुआ।

रावण के कुछ खास गुण :
रावण के बारे में वाल्मीकि रामायण के अलावा श्रीमद्भागवत पुराण, कूर्मपुराण,पद्मपुराण सहित कई ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है। भगवान रामचंद्र का विरोधी और शत्रु होने के बावजूद रावण 'सिर्फ बुरा' ही नहीं था। उसमें कई विशेष गुण भी थे।

दरअसल रावण बहुत बड़ा शिवभक्त था, जिसने शिव तांडव स्तोत्र की रचना करने के साथ ही अन्य कई तंत्र ग्रंथों की भी रचना की थी। माना जाता है कि लाल किताब (ज्योतिष का प्राचीन ग्रंथ) भी रावण संहिता का अंश है।

इसके साथ ही रावण एक महापंडित भी था, जो समस्त वेदों, शास्त्रों व पुराणों का जानकार था। रावण ने ही शिव की स्तुति में तांडव स्तोत्र के अलावा अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी।

जब रावण मृत्युशैया पर पड़ा था, तब राम के कहने पर उसके पास आए लक्ष्मण को रावण ने राजनीति के कई गूढ़ रहस्य बताए थे। रावण अपने युग का प्रकांड पंडित ही नहीं, वैज्ञानिक भी था। आयुर्वेद, तंत्र और ज्योतिष के क्षेत्र में उसका योगदान महत्वपूर्ण है।
रावण ने असंगठित राक्षस समाज को एकत्रित कर उनके कल्याण के लिए कई कार्य किए थे। रावण के शासनकाल में जनता सुखी और समृद्ध थी।

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भोपाल। कोरोना को लेकर लगाए गए प्रतिबंध हटते ही शादियों, बाजारों, मंडियों, सरकारी दफ्तरों में 95 फीसदी लोगों के चेहरों से मास्क गायब हो गया। सोशल डिस्टेंस तो अब दिखना ही बंद हो गई। हाथ धोना तो दूर लोग अब सैनिटाइजर भी साथ नहीं रखते। सबसे बड़ी चिंता का विषय ये है कि भोपाल में ही करीब 5.50 लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगना बाकी है। जबकि अन्य जिलों में ये संख्या काफी ज्यादा है। शादियों में शामिल होने अन्य राज्यों और विदेशों तक से आ रहे हैं। जहां कोरोना की रफ्तार तेज है। ऐसे में शादी सीजन में बरती जा रही लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए। इसलिए अभी कुछ और माह संभलकर रहने की जरूरत है।

भोपाल में ही चंद दिनों में दो हजार से ज्यादा शादियां हैं। शहर में छोटे बड़े होटल से लेकर लॉज यहां तक की धर्मशालाओं तक के कमरे फुल है। बच्चे बड़े और बुजुर्ग सभी बाहर से आ रहे हैं। कुछ दिन पहले हमीदिया की एक डॉक्टर की मौत कोरोना से हुई। है, जिनको दोनों टीके लगे थे। ऐसे में अभी ये मानलेना कि कोरोना चला गया, जल्दबाजी होगी। शहर में कई लोग तो ऐसे हैं जो फोन करने के बाद भी वैक्सीन सेंटरों पर नहीं पहुंच रहे। बात आकड़ों की करें तो रविवार को कोरोना के १७ मरीज पॉजिटिव आए थे, वहीं पिछले २४ घंटे में कोरोना के एक दर्जन से अधिक मरीज सामने आए हैं। कोरोना से प्रभावित एक चिकित्सक के सम्पर्क में आने के बाद जब कुछ लोगों की कोरोना जांच करवाई तो उसमें करीब १५ मरीज हाईरिस्क वाले सामने आए हैं।

सर्दी, खांसी, जुकाम आम बात

इन दिनों सर्दी, खांसी जुकाम आम बात बनी हुई है। डॉक्टरों के पास जाने पर उसे सामान्य डेंगू टेस्ट कराने की सलाह दी जा रही है। लेकिन कोरोना का टेस्ट कराने की सलाह किसी को नहीं दे रहे। जानकारों का कहना है कि अगर कोरोना की सही टेस्टिंग शुरू हो जाए तो शहर में पचास से ज्यादा मरीज प्रतिदिन सामने आ सकते हैं।

क्यूआरटी कई महीने से गायब

दूसरी लहर में अनलॉक के बाद थाने के बीट सिस्टम की तरह नगर निगम, पुलिस और प्रशासन के कर्मचारियों की एक क्यूआरटी (क्विक रिएक्शन टीम) बनाई थी। इसका काम लोगों को मास्क लगवाना, नियमों का पालन करना था। ये टीम शुरू से ही कागजों में काम कर रहे है। जमीन पर इसका कोई काम दिखाई नहीं देता।

भोपाल/श्योपुर. केंद्रीय नागर विमानन मंत्री (aviation minister) ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि श्योपुर में हवाई पट्टी बनाए जाने को चर्चा हुई है। अगले चरण में छोटे शहरों में हवाई सेवा शुरू करने का काम होगा। इससे पहले उज्जैन में एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन आवंटन करने और 200 करोड़ रुपए जारी करने के लिए उड्डयन मंत्री ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी जल्द ही जमीन और रुपए सेंक्शन करने की बात कही थी।

 

केन्द्रीय मंत्री सिंधिया (jyotiraditya स scindia) ने कहा कि हवाई पट्टी 3 किलोमीटर की हो जिससे छोटे प्लेन उतर सकें। इसको लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा हो रही है। इसकी शुरूआत हम कुछ जिलों में करेंगे। प्रदेश में 424 फ्लाइट प्रतिवर्ष चलती थी अब 850 फ्लाइट चल रही हैं। हमने इसे दुगना कर दिया है। उन्होंने कहा कि हम कूनो पालपुर में चीता जल्द से जल्द लाने के प्रयास कर रहे हैं। इससे पर्यटन की संभावना बढ़ेगी।

 

 

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उल्लेखनीय है कि आठ साल पहले श्योपुर में हवाई पट्टी प्रस्तावित की गई थी, लेकिन अब तक इसका काम शुरू नहीं हो सका है। साथ ही इसके लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा 9 करोड़ का प्राकलन भी तैयार किया गया था। इसलिए केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सिंधिया से इस को लेकर सवाल किया गया था।

निजी कार्यक्रमों में शिरकत करने आए सिंधिया

सिंधिया रविवार को दो विवाह कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। श्योपुर में पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान की बिटिया के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए और पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के यहां विवाह समारोह में शामिल हुए।

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भोपाल. मध्यप्रदेश में लगातार कोरोना के केस बढ़ते जा रहा है। हर दिन एक से डेढ़ दर्जन कोरोना के मरीज सामने आने से लोगों में भी भय हो गया है। जहां रविवार को कोरोना के 17 मरीज पॉजिटिव आए थे, वहीं पिछले 24 घंटे में कोरोना के एक दर्जन से अधिक मरीज सामने आए हैं। ऐसे में महाराष्ट्र से हवाई यात्रा कर मध्यप्रदेश आनेवाले यात्रियों की जांच रिपोर्ट भी अनिवार्य कर दी है।


राजधानी में 15 मरीज हाईरिस्की
कोरोना से प्रभावित एक चिकित्सक के सम्पर्क में आने के बाद जब कुछ लोगों की कोरोना जांच करवाई तो उसमें करीब 15 मरीज हाईरिस्क वाले सामने आए हैं। दरअसल जेपी अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद करीब 150 गर्भवति महिलाओं की जांच करवाई गई थी, कोरोना के जो मरीज सामने आए हैं, उनमें से अधिकतर मरीज 27 से 56 साल की उम्र के बीच के हैं।


इस तरह जानें कोरोना की बढ़ती रफ्तार

  • यहां इतनें केस- 21 नवंबर को मध्यप्रदेश के इंदौर में 6, भोपाल में 5, दमोह में 4 और शहडाले में 2 केस सामने आए हैं।
  • पश्चिम बंगाल -दमोह का एक कर्मचारी दीपावली मनाने पश्चिम बंगाल गया था, जिसके लौटने के बाद वह खुद पॉजिटिव पाया गया, वहीं उसके सम्पर्क में आए करीब चार लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।
  • कोरोना से मौत- कोरोना के कारण पिछले कुछ ही दिनों में इंदौर दो मरीजों की मौत हो गई है। वहीं भोपाल में कोरोना के कारण एक महिला चिकित्सक की मौत हुई है।
  • रोज डेढ़ दर्जन केस- मध्यप्रदेश में रोज करीब एक से डेढ़ दर्जन केस सामने आ रहे हैं। 21 तारीख को कोरोना के 17 केस सामने आए थे, वहीं पिछले 24 घंटे में कोरोना के 13 केस सामने आए हैं।
  • कोरोना रिपोर्ट- महाराष्ट्र से एमपी आनेवाले हवाई यात्रियों को कोरोना की रिपोर्ट साथ में लाना जरूरी है। वहीं भी नेगेटिव होना चाहिए।
  • आर्मी कैंप में दो केस- डॉ. आंबेडकर नगर महू में करीब दो माह बाद फिर से सेना में नए संक्रमित मरीज सामने आए है। शनिवार को सेना के चार कोविड-19 संक्रमित मरीज निकले है। जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। सभी का इलाज आर्मी अस्पताल में जारी है।

हवाई यात्रियों को सफर से पहले कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी

सावधानी नहीं तो तीसरी लहर का खतरा

जिस प्रकार कोरोना के केस लगातार सामने आ रहे हैं। उससे लोगों को तीसरी लहर का खतरा साफ नजर आ रहा है, ऐसे में आपको सावधानी रखना बहुत जरूरी है। अगर आप आज से ही सावधानी बरतना शुरू कर देंगे, तो निश्चित ही कोरोना के खतरे को कम किया जा सकता है।

भोपाल. खजूरी इलाके के कोकलिया गांव में बन रहे वेयरहाउस की दीवार गिरने से एक मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
हादसा उस वक्त हुआ जब गांव में किशन पाटीदार नामक व्यक्ति के निर्माणाधीन वेयरहाउस पर जेसीबी चालक मशीन चला रहा था। जेसीबी की टक्कर से मौके पर मजदूरी का काम करने वाले बलराम बारेला की 6 वर्षीय बेटी नम्रता चपेट में आ गई। जेसीबी की टक्कर से दीवार भरभरा कर गिर इसकी दूसरी तरफ खड़ी मासूम बच्ची चपेट में आने से मलबे के नीचे दब गई। मौके पर मौजूद पिता ने अपने साथियों के साथ बच्ची को मलबे से बाहर निकाला और एक निजी अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। खजूरी थाना प्रभारी संध्या मिश्रा ने बताया कि इस मामले में जेसीबी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

भोपाल. शहर के कोतवाली थाना इलाके में स्थित एक अपार्टमेंट में चोरों ने एक साथ दो फ्लैटों के ताले तोड़ दिए। बदमाश यहां से करीब 2.50 लाख का माल साफ कर भाग निकले। दोनों फ्लैट दो सगे भाइयों के हैं। आरोपियों का फिलहाल पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है।
कोतवाली पुलिस के अनुसार अनम फारूकी पुत्र जफर फरूकी (42) निवासी अंजुम अपार्टमेंट निजी जॉब करते हैं। उनके भाई भी इसी अपार्टमेंट में रहते हैं और फारूक के फ्लैट के ठीक सामने वाला फ्लैट उनका है। शनिवार रात आठ बजे फारूक की पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई थी। कुछ देर बाद में सामने रहने वाले उनके देवर भी अपने परिवार को लेकर बाहर चले गए। इसी बीच चोरों ने दोनों फ्लैटों में धावा बोला। यहां से चोर 90 हजार की नकदी सहित सोने चांदी के जेवरात लेकर चंपत हो गए। मामले में पुलिस अपार्टमेंट में रहने वाले अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है।

मनीष कुशवाह. भोपाल. करीब डेढ़ साल तक स्कूल बंद रहने से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई. ऑनलाइन पढ़ाई होने से बच्चों की शैक्षणिक क्षमता प्रभावित हुई है। यही कारण है कि त्रैमासिक परीक्षा के परिणाम अपेक्षित नहीं रहे। परीक्षा सितंबर में हुई थी। इसमें दसवीं में तो ज्यादा परीक्षार्थी फेल हो गए. मुख्य परीक्षाओं से पहले आए ऐसे परिणाम ने सभी की चिंता बढ़ा दी है.

रिजल्ट के अनुसार 10 वीं में 54 प्रतिशत तो 12वीं के 31 प्रतिशत विद्यार्थी असफल रहे। इससे वार्षिक परीक्षा में अच्छे परिणाम को लेकर असमंजस है। नतीजतन स्कूल शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाओंं की तैयारी के लिए रणनीति बनाई है। इसमें मूल्यांकन, रेमेडियल कक्षाएं, समीक्षा और कार्यशाला को शामिल किया गया है।

जानकारों के मुताबिक कोरोना के चलते मौजूदा सत्र का अधिकतर समय ऑनलाइन पढ़ाई में गया। इससे बोर्ड कक्षाओं का कोर्स तक पूरा नहीं हो सका है। कक्षा नौ से 12वीं की त्रैमासिक परीक्षाओं के परिणाम खराब आए हैं। कक्षा नौ के 62 फीसदी बच्चे तो दसवीं के 54 फीसदी बच्चे डी और ई ग्रेड में आए हैं। 11वीं के 48 फीसदी और 12वीं के 31 फीसदी बच्चों ने इन ग्रेड में स्थान पाया है।

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दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 12 फरवरी से होंगी। लिहाजा तैयारियों के लिए कम समय है। इसको लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है।

इन तरीकों से परिणाम बेहतर करने की कवायद
रेमेडियल कक्षाएं: त्रैमासिक परीक्षाओं में सी, डी और ई ग्रेड पाने वाले 10वीं-12वीं के विद्यार्थियों के लिए नौ दिसंबर से रेमेडियल कक्षाएं लगाई जाएंगी। इसमें दो कालखंड होंगे।
मूल्यांकन: विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए 29 नवंबर से अद्र्धवार्षिक और जनवरी के पहले सप्ताह में प्री बोर्ड परीक्षाएं होंगी। इनके जरिये विद्यार्थियों का लर्निंग लेवल जानने के साथ ही बोर्ड परीक्षा संबधित प्रश्नों को हल करने के प्रयास किए जाएंगे।
टिप्स एंड ट्रिक्स वर्कशॉप: ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न पत्र हल कराने, स्वयं अध्ययन की रणनीति बनाने में विद्यार्थियों को मदद की जाएगी। प्रदेश से जिला स्तर पर हर 15 दिन में समीक्षा बैठक होगी।

भोपाल। राजधानी सहित प्रदेश भर में पिछले तीन-चार दिन से बादल और हल्की बूंदाबांदी की स्थिति बनी है। इसके कारण न्यूनतम तापमान बढ़ने लगा है। रात में ठंडक भी कम हो गई है, लेकिन अब बादल छंटने का सिलसिला शुरू हो गया है। मंगलवार तक पूरी तरह बादल छंट जाएंगे। इसके बाद प्रदेश में तेजी से तापमान में गिरावट की संभावना है।

प्रदेश में रविवार को भी छिंदवाड़ा, सिवनी सहित कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हुई। मौसम विज्ञानी के मुताबिक मंगलवार तक बादल पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। इन दिनों हवा का रुख उत्तर पूर्वी बना हुआ है। ऐसे में मंगलवार से प्रदेश भर में कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री तक की गिरावट हो सकती है।

रविवार को शहर में मौसम के तेवर बदल गए। बादल छंटने के बाद दिन का तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ऐसा 15 दिन बाद हुआ, जब दिन में पारा 30 डिग्री इन पार पहुंचा हो। इससे पहले 6 नवंबर ची को दिन का तापमान 30.1 डिग्री ही सेल्सियस दर्ज किया गया था। रात का तापमान 18.4 डिग्री दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में इसमें 0.2 डिग्री का और इजाफा हुआ।

इसलिए पड़ेगी तेज ठंड

दिसंबर के पहले हफ्ते में भी एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस होगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक दो-तीन दिन बाद उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस पहुंच रहा है। इसके गुजर जाने के बाद हमारे यहां रात के तापमान में तेजी से गिरावट होगी। दिसंबर के पहले सप्ताह में भी एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस के पहुंचने की संभावना है। इस कारण इस बार पिछले साल के मुकाबले दिसंबर में ज्यादा ठंड पड़ सकती है। साथ ही जनवरी और फरवरी में बारिश के साथ ओले गिरने की भी संभावना है।

भोपाल। पिछले कुछ समय से पार्टी लाइन से किनारे चल रही पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने एक बार फिर अपनी ही सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों को वापस लेने पर प्रतिक्रिया दी है।

उमा भारती का कहना है कि यदि हम सब लोग किसानों से ठीक संपर्क और संवाद स्थापित कर लेते तो कानून वापसी की नौबत नहीं आती। उमा ने कहा कि हम लोग विपक्ष के दुष्प्रचार का सामना नहीं कर पाए।

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कानून वापसी की घोषणा के तीन दिन बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोमवार को एक के बाद एक सात ट्वीट कर अपने विचार व्यक्त कर कहा है कि वे इस फैसले से बहुत व्यथित हैं। उन्होंने अपने सभी ट्वीट को पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखे हैं।

 

 

यह है उमा के ट्वीट
1) मैं पिछले 4 दिनों से वाराणसी में गंगा किनारे हूँ । दिनांक 19 नवम्बर 2021 को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जब तीनों कृषि क़ानूनों की वापसी की घोषणा की तो मैं अवाक रह गई इसलिए 3 दिन बाद प्रतिक्रिया दे रही हूँ।

2) माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कानूनों के वापसी करते समय जो कहा- वह मेरे जैसे लोगों को बहुत व्यथित कर गया।

3) अगर कृषि क़ानूनों की महत्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को नहीं समझा पाए तो उसमें हम सब भाजपा के कार्यकर्ताओं की कमी हैं। हम क्यूँ नहीं किसानों से ठीक से सम्पर्क एवं संवाद कर सके।

4) नरेंद्र मोदीजी बहुत गहरी सोच एवं समस्या के जड़ को समझने वाले प्रधानमंत्री हैं। जो समस्या की जड़ समझता है वह समाधान भी पूर्णतः से करता हैं।

5) भारत की जनता एवं नरेंद्र मोदी जी का आपस का समन्वय, विश्व के राजनीतिक, लोकतांत्रिक इतिहास में अभूतपूर्व हैं।

6) कृषि कानूनों के सम्बन्ध में विपक्ष के निरन्तर दुष्प्रचार का सामना हम नहीं कर सके। इसी कारण से उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन से मैं बहुत व्यथित हो रही थी।

7) मेरे नेता माननीय नरेंद्र मोदीजी ने तो कानूनों को वापस लेते हुए भी अपनी महानता स्थापित की। हमारे देश का ऐसा अनोखा नेता युग-युग जीये, सफल रहे। यही मैं बाबा विश्वनाथ एवं माँ गंगा से प्रार्थना करती हूँ।

 

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Kaal Bhairav Jayanti 2021 : हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कालाष्टमी (Kalashtami 2021) होती है। इस दिन को भगवान भैरव का विशेष दिन माना जाता है। इसे काला अष्‍टमी भी कहते हैं। यह तिथि भगवान भैरव की विशेष पूजा का दिन मानी गई है, अत: इस दिन पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व है।

वहीं दूसरी ओर हिंदू कैलेंडर के मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी को काल भैरव अष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami 2021) के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान काल भैरव का इसी दिन अवतरण हुआ था। ऐसे में इस साल यानि 2021 में काल भैरव जंयती शनिवार,27 नवंबर को मनाई जाएगी। भगवान काल भैरव को भगवान शिव (Lord Shiva) का रुद्र स्वरुप माना जाता है।

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जानकारों के अनुसार काल भैरव अष्टमी तंत्र साधना के लिए अति विशेष मानी जाती है। मान्यता के अनुसार काल भैरव भगवान शिव का ही एक रुप हैं, और भैरव की साधना भक्तों के सभी संकटों को दूर कर देती है। इनकी साधनाओं को अत्यंत कठिन माना जाता है, जिसके तहत इस दौरान मन की सात्विकता और एकाग्रता का पूरा ख्याल रखना होता है।

पौराणिक मान्यताओं के आधार स्वरूप मार्गशीर्ष कृष्ष्ण पक्ष अष्टमी के दिन भगवान शिव, भैरव रूप में प्रकट हुए थे, अत: इसी उपलक्ष्य में इस तिथि को व्रत व पूजा का विशेष विधान है।

काल भैरव की पूजा से ये होते हैं विशेष लाभ
माना जाता है कि भैरवाष्टमी या कालाष्टमी के दिन पूजा उपासना से शत्रुओं और पापी शक्तियों का नाश होता है और सभी प्रकार के पाप, ताप व कष्ट दूर हो जाते हैं।

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भैरवाष्टमी के दिन व्रत और षोड्षोपचार पूजन अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है। मान्यता के अनुसार इस दिन श्री कालभैरव जी का दर्शन-पूजन शुभ फल देने वाला होता है।

भैरव के भक्तों के अनुसार भैरव जी की पूजा उपासना मनोवांछित फल देने वाली होती है। साथ ही साधक इस दिन भैरव जी की पूजा अर्चना करके तंत्र-मंत्र की विद्याओं को पाने में भी समर्थ होता है। वहीं इनका आश्रय प्राप्त करने वाला भक्त निर्भय हो जाने के साथ ही सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है।

यह भी माना जाता है कि भैरव उपासना जहां क्रूर ग्रहों के प्रभाव को समाप्त करती है, वहीं इससे भैरव जी के राजस, तामस व सात्विक तीनों प्रकार के साधना तंत्र प्राप्त होते हैं।

कहा जाता है कि भैरव साधना स्तंभन, वशीकरण, उच्चाटन और सम्मोहन जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए कि जाती है, इनकी साधना करके सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव को नष्ट किया जा सकता है। आमर्दक पीठ पर छ: मास तक जो लोग अपने इष्ट देव का जप करते हैं, वे समस्त वाचिक, मानसिक व कायिक पापों में लिप्त नहीं होते।

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shiv dham where even death says no to come IMAGE CREDIT: shiv dham where even death says no to come

संकटों का नाश करती है भैरव की अराधना
मान्यता के अनुसार भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है, व्यक्ति में साहस का संचार होता है। वहीं ये भी माना जाता है कि इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है, रविवार और मंगलवार के दिन इनकी पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।

भैरव साधना और आराधना से पहले अनैतिक कृत्य आदि से दूर रहना चाहिए। माना जाता है कि पवित्र होकर की गई सात्विक आराधना ही फलदायक होती है। भैरव तंत्र में भैरव पद या भैरवी पद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने देवी के समक्ष अनेक विधियों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से इन अवस्था को प्राप्त हुआ जा सकता है।

काल भैरव अष्टमी का पूजन
पंडित एलडी पंत के अनुसार भगवान शिव के काल भैरव रुप की उपासना षोड्षोपचार पूजन सहित करनी चाहिए। वहीं इस तिथि पर रात्रि जागरण करते हुए इनके मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए। इसके अलावा भजन कीर्तन के साथ ही भैरव कथा व आरती भी करनी चाहिए, वहीं कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ माना जाता है। मान्यता अनुसार इस दिन भैरव जी की पूजा व व्रत करने वालों के सभी विघ्न समाप्त होने के साथ ही भूत, पिशाच व काल भी दूर रहते हैं।

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भैरव साधना का महत्व
भैरव साधना के संबंध में माना जाता है कि इनकी साधना से भय का नाश होता है। हिंदू देवताओं में भैरव जी का विशेष महत्व है, यह दिशाओं के रक्षक और काशी के संरक्षक कहे जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव से ही भैरव जी की उत्पत्ति हुई।

यह कई रुपों में विराजमान हैं भैरव
यूं तो भैरव के प्रमुख रूपों में बटुक भैरव और काल भैरव ही हैं, वहीं इन्हें रुद्र, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहारक भी कहा जाता है। भैरव को भैरवनाथ भी कहा जाता है और नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व रहा है।

ऐसे हुई भैरव की उत्पत्ति
कथा के अनुसार एक समय ब्रह्मा और विष्णु में विवाद छिड़ा कि परम तत्व कौन है ? उस समय वेदों से दोनों ने पूछा तो वेदों ने कहा कि सबसे श्रेष्ठ शंकर हैं। ब्रह्मा जी के पहले पांच मस्तक थे। उनके पांचवें मस्तक ने शिव का उपहास करते हुए, कहा कि रुद्र तो मेरे भाल स्थल से प्रकट हुए थे, इसलिए मैंने उनका नाम "रुद्र' रखा है। अपने सामने शंकर को प्रकट हुए देख उस मस्तक ने कहा कि हे बेटा ! तुम मेरी शरण में आओ, मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा।

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इस प्रकार गर्व युक्त ब्रह्मा जी की बातें सुनकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे और अपने अंश से भैरवाकृति को प्रकट किया। शिव ने उससे कहा कि "काल भैरव'! तुम इस पर शासन करो। साथ ही उन्होंने कहा कि तुम साक्षात "काल' के भी कालराज हो। तुम विश्व का भरण करनें में समर्थ होंगे, अत: तुम्हारा नाम "भैरव' भी होगा।

तुमसे काल भी डरेगा, इसलिए तुम्हें "काल भैरव' भी कहा जाएगा। दुष्टात्माओं का तुम नाश करोगे, अत: तुम्हें "आमर्दक' नाम से भी लोग जानेंगे। हमारे और अपने भक्तों के पापों का तुम तत्क्षण भक्षण करोगे, फलत: तुम्हारा एक नाम "पापभक्षण' भी होगा।

भगवान शंकर ने कहा कि हे कालराज ! हमारी सबसे बड़ी मुक्तिपुरी 'काशी' में तुम्हारा आधिपत्य रहेगा। वहां के पापियों को तुम्हीं दण्ड दोगे, क्योंकि "चित्रगुप्त' काशीवासियों के पापों का लेखा- जोखा नहीं रख सकेंगे। वह सब तुम्हें ही रखना होगा।

शंकर की इतनी बातें सुनकर उस आकृति 'भैरव' ने ब्रह्मा के उस पांचवें मस्तक को अपने नखाग्र भाग से काट लिया। इस पर भगवान शंकर ने अपनी दूसरी मूर्ति भैरव से कहा कि तुम ब्रह्मा के इस कपाल को धारण करो। तुम्हें अब ब्रह्म-हत्या लगी है।

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इसके निवारण के लिए "कापालिक' व्रत ग्रहण कर लोगों को शिक्षा देने के लिए सर्वत्र भिक्षा मांगो और कापालिक वेश में भ्रमण करो। ब्रह्मा के उस कपाल को अपने हाथों में लेकर कपर्दी भैरव चले और हत्या उनके पीछे चली। हत्या लगते ही भैरव काले पड़ गये। इसके बाद तीनों लोक में भ्रमण करते हुए वह काशी आए।

श्री भैरव काशी की सीमा के भीतर चले आए, परंतु उनके पीछे आने वाली हत्या वहीं सीमा पर रुक गयी। वह प्रवेश नहीं कर सकी। फलत: वहीं पर वह धरती में चिग्घाड़ मारते हुए समा गयी। हत्या के पृथ्वी में धंसते ही भैरव के हाथ में ब्रह्मा का मस्तक गिर पड़ा।

ब्रह्म- हत्या से पिण्ड छूटा, इस प्रसन्नता में भैरव नाचने लगे। बाद में यह स्थान ब्रह्म कपाल ही कपाल मोचन तीर्थ नाम से विख्यात हुआ और वहां पर कपर्दी भैरव, कपाल भैरव नाम से (लाट भैरव)विख्यात हुए। यहां पर श्री काल भैरव काशीवासियों के पापों का भक्षण करते हैं। वहीं कपाल भैरव का सेवक पापों से भय नहीं खाता।

भैरव के भक्तों से यमराज भी डरते हैं
काशीवासी भैरव के सेवक होने के कारण भक्त कलि और काल से नहीं डरते। माना जाता है कि भैरव के समीप अगहन बदी अष्टमी को उपवास करते हुए रात्रि में जागरण करने वाला मनुष्य महापापों से मुक्त हो जाता है। भैरव के सेवकों से यमराज भय खाते हैं।

समाज को सही मार्ग देना है भैरव जी का कार्य
भैरव जी शिव और दुर्गा के भक्त हैं व इनका चरित्र बहुत ही सौम्य, सात्विक और साहसिक माना गया है न की डर उत्पन्न करने वाला। मान्यता के अनुसार इनका कार्य सुरक्षा करना और कमजोरों को साहस देना व समाज को सही मार्ग देना है।

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काशी में स्थित भैरव मंदिर सर्वश्रेष्ठ स्थान पाता है, इसके अलावा शक्तिपीठों के पास स्थित भैरव मंदिरों का महत्व माना गया है, माना जाता है कि इन्हें स्वयं भगवान शिव ने स्थापित किया था। वहीं उज्जैन में स्थित कालभैरव मंदिर भी अतिविशिष्ट है।

काशी के कालभैरव की विशेषता
: काशी में भैरव का दर्शन करने से सभी अशुभ कर्म शुभ हो जाते हैं। सभी जीवों के जन्मांतरों के पापों का नाश हो जाता है।
: अगहन की अष्टमी को विधिपूर्वक पूजन करने वालों के पापों का नाश श्री भैरव करते हैं।
: मंगलवार या रविवार को जब अष्टमी या चतुर्दशी तिथि पड़े, तो काशी में भैरव की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। इस यात्रा को करने से जीव समस्त पापो से मुक्त हो जाता है।
: जो मूर्ख काशी में भैरव के भक्तों को कष्ट देते हैं, उन्हें दुर्गति भोगनी पड़ती है।
: जो मनुष्य श्री विश्वेश्वर की भक्ति करता है और भैरव की भक्ति नहीं करता, उसे पग-पग पर कष्ट भोगना पड़ता है।
: जानकारों के अनुसार पापभक्षण भैरव की प्रतिदिन आठ प्रदक्षिणा करनी चाहिए।
: वहीं जो लोग काशी में वास करते हुए भी भैरव की सेवा, पूजा या भजन नहीं करे, उनका पतन होता है।

साक्षात् रुद्र हैं श्री भैरवनाथ
श्री भैरवनाथ साक्षात रुद्र माने जाते हैं। वेदों में जिस परमपुरुष का नाम रुद्र है, तंत्रशास्त्र में उसी का भैरव के नाम से वर्णन हुआ है। तंत्रालोक की विवेक टीका में भैरव शब्द की यह व्युत्पत्ति दी गई है- बिभॢत धारयतिपुष्णातिरचयतीतिभैरव: अर्थात् जो देव सृष्टि की रचना, पालन और संहार में समर्थ है, वह भैरव है।

शिवपुराण में भैरव को भगवान शंकर का पूर्णरूप बतलाया गया है। तत्वज्ञानी भगवान शंकर और भैरवनाथ में कोई अंतर नहीं मानते हैं। वे इन दोनों में अभेद दृष्टि रखते हैं।

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भोपाल. वर्चुअल वल्र्ड में इस समय एक अपराध टैंड कर रहा है। इसकी गिरफ्त में युवा, डॉक्टर, इंजीनियर सरकारी अधिकारी सहित कई नामी हस्तियां आ रही है। युवतियां इन प्रतिष्ठित व्यक्तियों को अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल करती है। फरियादी जब कॉल अटेंड करता है तो सामने वाली महिला कपड़े उतारते हुए दिखाई देता है या फिर पोर्न वीडियो शुरू हो जाता है। आरोपी कॉल स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर लेते हैं, बाद में रैकेट के सदस्य बड़ी सफाई से स्क्रीन रिकॉर्डिंग से स्क्रीन शॉट्स लेते हैं। इन्हें देखकर यह प्रतीत होता है कि उसमें फरियादी के कहने पर ही महिला अपने कपड़े उतार रही होगी। फिर इस स्क्रीन शॉट्स को फरियादी को भेज उसे वायरल करने की धमकी देते हुए ब्लैकमेल किया जाता है। पिछले दो साल में इस तरह के केस शहर में तेजी से बढ़े हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है, बहुत से फरियादी ऐसे होते हैं जो सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण शिकायत भी नहीं दर्ज कराते।

डरें नहीं, डाटा भी डिलिट न करें

क्राइम ब्रांच एएसपी गुरुप्रसाद पाराशर ने बताया, इस प्रकार मामले में बदनामी से बचने के लिए शिकायतकर्ता सबसे पहले सोशल मीडिया अकाउंट ही डिलिट कर देते हैं। यह कार्य 70 फीसदी से ज्यादा केस में होता है। बाद में जय वह शिकायत करने आते हैं तो पुलिस के पास कार्रवाई के लिए। कोई प्रमाण नहीं दे पाते। एएसपी बताते हैं, इस प्रकार की घटना अगर हो जाए तो डरें नहीं, फौरन पुलिस को जानकारी दें। उनके पास आए लिंक, फ्रैंड रिक्वेस्ट समेत अन्य चीजों से ठगों की जानकारी प्राप्त की सकती है।

इस प्रकार बढ़ रहे केस
इस प्रकार के मामले साल 2019 में 10, साल 2020 में 25 और 2021 में 50 मामले सामने आए हैं। इस प्रकार ऐसे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, इस कारण आपका जागरूक होना बहुत जरूरी है।

यह रखें सावधानी, फ्रंट कैमरे पर अंगुली लगाकर उठाए कॉल

सायबर एक्सपर्ट एडीजी वरुण कपूर बताते हैं कि अगर कोई अंजान या अपरिचित नंबर से वीडियो कॉल आ रहा है तो रिसिव ही नहीं करें। लेकिन यदि कोई बार-बार आपको कॉल करता है तो अपने कैमरे के ऊपर अपनी अंगुली रख लें या उठाने से पहले कैमरे का फेस चेंज कर दें मतलब सामने से न उठाते हुए बैंक से ही मोबाइल को उठाएं। पहले बात कर लें। नाम पूछ लें। उसके बाद ही बात करें।

कोरोना अलर्ट-एमपी में लगातार बढ़ रहे कोरोना केस, तीसरी लहर का खतरा

अनजान नंबरों से बातचीत करते समय सावधानी बरतें।

  • डेटिंग ऐप या साइट का उपयोग करने से बचना चाहिए।
  • अनजान लोगों से चैट करने से पहले उसको जानकारी लें।
  • वीडियो कॉल पर अनजान लोगों से बात न करें। वीडियो कॉल रिकॉर्ड करने के कई ऐप है, इसलिए सावधानी बरते।
  • वीसी को रिकॉर्ड करके दो लोगों के बातचीत को टेंपर किया जा सकता है रखें।

भोपाल. मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी पर एक और व्हाइट वाॅटर स्पोर्ट्स सेंटर बन रहा है. यह प्रदेश का दूसरा व्हाइट वाॅटर स्पोर्ट्स सेंटर होगा. रेहटी के नहलाई घाट पर आकार ले रहे इस सेंटर पर अगले महीने नेशनल टूर्नामेंट भी आयोजित होगा. इसके लिए नहलाई घाट पर खिलाड़ी अभ्यास भी करने लगे हैं।

मप्र कयाकिंग-केनोइंग एसोसिएशन रेहटी से करीब 15 किलोमीटर दूर नहलाई घाट पर यह सेंटर शुरू करने जा रहा है। कयाकिंग-केनोइंग एसोसिएशन ने चार साल पहले महेश्वर में वाटर स्पोर्ट्स सेंटर प्रारंभ किया था. यहां से करीब दो दर्जन नेशनल और इंटरनेशनल स्तर के खिलाड़ी मिले जिससे उत्साहित होकर एसोसिएशन ने दूसरो सेंटर प्रारंभ करने का निर्णय लिया.

 

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खास बात यह है कि नहलाई घाट की वाटर-बाॅडी भी महेश्वर की वाटर बाॅडी के समान ही है। यहां कयाकिंग-केनोइंग के अलावा व्हाइट वाटर स्पोर्ट्स के लिए भी बहुत संभावना आंकी जा रही है। इसलिए यहां पर केनो सलालम के प्रशिक्षण की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। ज्ञातव्य है कि केनो सलालम अभी नया खेल है पर इसमें ओलिंपिक, एशियाड में कई पदक होते हैं।

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भारतीय कयाकिंग केनोइंग फेडरेशन के सचिव प्रशांत कुशवाह बताते हैं कि केनो सलालम का नेशनल टूर्नामेंट इस बार नहलाई घाट पर होगा। यह दिसंबर में होना है जिसमें देश भर के खिलाड़ी शामिल होंगे। टूर्नामेंट की तैयारी के लिए भारतीय फेडरेशन और मप्र एसोसिएशन के खिलाड़ी यहां पर अभ्यास करने लगे हैं।

भोपाल। कोरोना से राहत मिलने के बाद मध्‍य प्रदेश में कोरोना प्रतिबंध पूरी तरह से हटा दिए गए हैं। वहीं अब स्कूल पूरी क्षमता से खोलने की तैयारी शुरु हो गई है। आज शाम तक स्कूलों को खोलने के आदेश जारी होने की संभावना है। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग (MP School Education Department) ने कक्षा 1 से 5वीं के छात्रों का भी स्कूल पूरी क्षमता के साथ खोलने का फैसला किया है। इसके लिए सीएम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रस्ताव भेजा गया है। संभावना जताई जा रही है कि आज शाम तक इस संबंध में आदेश जारी हो सकता है। इसको लेकर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी संकेत दिए है।

जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के गृहमंत्री डाक्‍टर नरोत्‍तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। इससे पहले प्रदेश के स्‍कूल शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने भी वीडियो जारी कर इस बारे में कहा था। परमार ने कहा था कि यशश्वी मुख्यमंत्री माननीय शिवराज जी के द्वारा कोरोना की समीक्षा कर प्रदेश में कोविड-19 के सारे प्रतिबन्धों को समाप्त किया है। परीक्षा के लिए समय कम है इसलिए सभी शिक्षक बन्धु/भगिनी बच्चों को कक्षा में अच्छे से पढ़ाये एवं उन्हें उत्साहित करें।

हालांकि अभी आदेश आना बाकी है सभी स्थिति स्पष्ट हो पाए गी लेकिन माना जा रहा है कि प्री-नसरी, नर्सरी, केजी-01, केजी-02 की कक्षाएं भी 100 फ़ीसदी क्षमता के साथ खोलने की तैयारी है। फिलहाल विंटर सीजन और मौजूदा हालात को देखते हुए स्कूल संचालक छोटे बच्चों की क्लासेस 2 घंटे के लिए ही संचालित करेंगे। प्री-नर्सरी, नर्सरी, केजी 01 और केजी 02 के बच्चों की क्लासेस सुबह 10 बजे से 12 बजे तक लगाई जाएंगी।

भोपाल. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान सबसे ज्यादा डराने वाले म्यूकोमाइकोसिस (ब्लैक फंगस ) के प्रकोप से उबर चुके मरीजों को अब नई परेशानी घेर रही है। फंगस का असर कम करने के लिए कई मरीजों की चिक बोन (गाल की हड्डी) काटनी पड़ रही है। हड्डी ना होने से अब इन मरीजों को कृत्रिम जबड़ा नहीं लग पा रहा है।

यही नहीं मुंह और नाक का छेद एक हो गया है जिससे मुंह से कुछ भी खाते हैं तो वह नाक के छेद से बाहर आ रहा है। अकेले हमीदिया अस्पताल के दंत रोग विभाग में 46 मरीजों के जबड़े और तालू निकाले गए हैं।

इस संबंध में गांधी मेडिकल कॉलेज के दंतरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज भार्गव बताते हैं कि प्रदेश में सिर्फ एक सरकारी प्रोस्थेटिक इंप्लांट लैब इंदौर डेंटल कॉलेज में ही है। हम लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं। लैब के लिए टेक्नीशियन की जरूरत है। लैब बनेगी तो मरीजों को फायदा होगा।

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केस 1— होशंगाबाद के रहने वाले मो. इमरान (56 साल) कोरोना संक्रमित होने के बाद ब्लैक फंगस की जद में आ गए। हमीदिया के दंत रोग विभाग में उन्हें भर्ती कराया गया। यहां हुई जांच के बाद पता चला कि आंख के साथ ऊपरी जबड़ा भी खराब हो गया है। डॉक्टरों को उनके ऊपर का पूरा जबड़ा निकालना पड़ा।
केस 2. राजधानी के एक मरीज को ब्लैक फंगस के चलते अस्पताल में एडमिट कराया गया। गाल की हड्डी पूरी तरह सडऩे से ऊपरी जबड़ा निकालना पड़ा। अब उन्हें कृत्रिम जबड़ा भी नहीं लग सकता। बड़े सेंटर में जाकर इलाज पर लाखों रुपए खर्च करने की स्थिति नहीं है।

डराता आंकड़ा
18 लोगों का एक साइड का तालु और ऊपर का जबड़ा दांतों सहित निकाला गया
06 का एक तरफ की गाल की हड्डी या उसका कुछ हिस्सा निकाला गया
10 का दोनों तरफ का तालु और ऊपर का जबड़ा दांतों सहित निकाला गया
10 का जबड़ों का कुछ ही हिस्सा निकाला गया

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प्रदेश में केवल इंदौर में इसके लिए लैब
चिकित्सकों की मानें तो जिन मरीजों की चिन बोन निकाली गई है, उन्हें जाइगोमेटिक इप्लांट लगवाना पड़ेगा। हालांकि चिक बोन ना होने पर पहले यहां ऑप्च्यूरेटर लगाए जाते हैं जिससे नाक और मुंह की खुली जगह भरते हैं। इस पर दो टाइटेनियक के दो स्क्रू कसे जाते हैं। इन स्क्रूपर प्रोस्थेटिक जबड़ेे कसे जाते हैं।

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निजी अस्पतालों में पूरी प्रक्रिया में चार से पांच लाख रुपए खर्च होते हैं। हालांकि कृत्रिम जबड़े बनाने वाली प्रोस्थेसिस लैब इंदौर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज में है लेकिन यहां वेटिंग को छोडकर किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं हैं, लेकिन यहां भी लंबी वेटिंग रहती है।

भोपाल। अगर आप सफर करने जा रहे है तो जान लें कि आने वाले दिनों में कई ट्रेनों को कैंसिल किया गया है। जानकारी के मुताबिर दक्षिण मध्य रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन में हो रही भारी बारिश के कारण पुडुगुपाडु- नेल्लोर स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया है। यही कारण है कि इस मार्ग से होकर चलने वाली कुछ ट्रेनों को प्रारंभिक स्टेशन से ही निरस्त किया गया है। ट्रेन नंबर 12687 मदुरै-चंडीगढ़ एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12295 बेंगलुरू-दानापुर निरस्त कर दी गई। यह ट्रेन भोपाल नहीं पहुंची।

यह ट्रेनें निरस्त

- 12707 संपर्क क्रांति एक्सप्रेस सोमवार के लिए निरस्त की गई है। जिसके कारण हजरत निजामुद्दीन तिरुपति बुधवार को नहीं चलेगी।

-12625 तिरुवनंतपुरम सेंट्रल -नई दिल्ली केरला एक्सप्रेस रविवार को प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त की गई है।

- 12615 जीटी एक्सप्रेस रविवार को प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रही, इसलिए ट्रेन नंबर 12616 जीटी एक्सप्रेस मंगलवार को निरस्त रहेगी।

- 2269 दुरंतो एक्सप्रेस सोमवार को प्रारंभिक स्टेशन से नहीं चली। इस कारण ट्रेन नंबर 12270 दुरंतो एक्सप्रेस मंगलवार को निरस्त रहेगी.

- 2621 चेन्नई सेंट्रल-नई दिल्ली एक्सप्रेस नहीं चली। इस कारण दिल्ली -चेन्नई एक्सप्रेस मंगलवार को निरस्त रहेगी।

भोपाल. मध्यप्रदेश में एक पति ने अपनी पत्नी को ऐसा अनमोल तोहफा दिया है। दरअसल इस पति ने अपनी पत्नी को ताजमहल सा नजर आने वाला घर तोहफे में दिया है। यह भी कोई मामूली घर नहीं है, यह बाहर से पूरी तरह ताजमहल सा नजर आता है और इसके अंदर सभी आधुनिक सुख-सुविधाएं हैं। जिसे पाकर उनकी पत्नी भी बेहद खुश हैं।


4 बेडरूम का है ताजमहल
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में एक शिक्षाविद आनंद चौकसे ने अपनी पत्नी मंजूषा को यह बेशकीमती उपहार तोहफे में दिया है। इसमें 4 बेडरूम, एक मेडिटेशन रूम, एक किचन और लाइब्रेरी सहित कई कक्ष हैं। इस ताजमहल नुमा दिखने वाले बंगले में सभी आधुनिक सुख सुविधाएं हैं। जिसे तैयार करने में करीब 3 साल का समय लगा है। इस घर का क्षेत्रफल भी 90 गुणा 90 है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसे तैयार करने में आगरा के ही कारीगरों को बुलाया था।


ताजमहल की तरह दिखती है मीनारें
इस ताजमहल जैसे दिखने वाले महलनुमा मकान में लगने वाले बेशकीमती पत्थर भी राजस्थान के मकराना से बुलवाए गए हैं, वहीं इस घर के अंदर तैयार हुआ फर्नीचर बॉम्बे के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। इस महल में लगाई गई लाईटें जलने से यहां ताजमहल जैसी फिलिंग आती है। यह अंधेरे में ताजमहल की तरह ही जगमगाता है। इसकी मीनारें भी ताजमहल सी नजर आती है।


आगरा में ताजमहल, बुरहानपुर में हुई थी मुमताज की मौत
जानकारी के अनुसार मुमताज की मौत बुरहानपुर में हुई थी, उन्हें वहीं पर दफनाया भी गया था, शहजहां ने आगरा में ताजमहल बनवाया। बताया जाता है कि जयपुर से संगमरमर पत्थर बुरहानपुर लाना आसान नहीं था, इस कारण इसे आगरा में तैयार करवाया गया। ऐसे में बुरहानपुर के आनंद चौकसे को हमेशा इस बात का रंज है कि संसार में मशहूर प्यार की निशानी बुरहानपुर में होनी चाहिए थी, उनकी भी तमन्ना थी कि वे अपनी पत्नी को भी इसी तरह ताजमहल तोहफे में दें, जो उन्होंने कर दिखाया है। मुगल इतिहास में इस बात का जिक्र है शाहजहां की बेगम मुमताज की मौत बुरहानपुर में हुई थी और शाहजहां ने ताजमहल बनवाने के लिए ताप्ती नदी का किनारा ही चुना था, लेकिन पत्थर की सप्लाई आगरा में आसानी से हो जाती, इस कारण शाहजहां ने आगरा में ताजमहल बनवाया था, ऐसे में आनंद चौकसे ने अपनी पत्नी को ताजमहल नुमा घर बनाकर तोहफे में दिया है, यह भी दुनिया हमेशा याद रहेगी।

 

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महाराष्ट्र में भी है एक ताजमहल
आपको बतादें कि ताजमहल सा दिखने वाला एक ताजमहल महाराष्ट्र के औरंगाबाद में भी स्थित है, जिसे बीबी का मकबरा के नाम से जाना जाता है, अब बुरहानपुर में भी एक पति ने अपनी पत्नी को ताजमहल सा दिखने वाला घर उपहार में दिया है।

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मुश्किल था यह काम, लेकिन कर दिखाया
ताजमहल सा घर बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था, ऐसे में इंजीनियरों को भी इसे तैयार करवाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन जब मन में ठान लिया तो यह भी कर दिखाया, इसे तैयार करने से पहले इंजीनियर प्रवीण चौकसे, आनंद चौकसे और उनकी पत्नी मंजूषा ताजमहल देखने के लिए आगरा भी गए थे, उन्होंने बहुत नजदीक से ताजमहल को देखा और उसके जैसा बनाने की पूरी कोशिश की है।

भोपाल. राज्य में दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए काम कर रही कांग्रेस का फोकस अब 16 से 18 वर्ष तक के युवाओं पर है। पार्टी इन्हें बाल कांग्रेस की सदस्यता दिलाकर पार्टी से जोड़ रही है। हाल ही में गठित बाल कांग्रेस के लिए सदस्यता अभियान चल रहा है। लक्ष्य है कि एक साल में पांच लाख युवाओं को इससे जोड़ लिया जाए। इसके लिए पार्टी पूरी रणनीति के साथ काम कर रही है। इनमें से ज्यादातर सदस्यों को चुनाव आने तक मतदान करने का अधिकार भी मिल जाएगा। इस तरह कांग्रेस अपने पक्ष में युवाओं को जोड़ रही है।

बाल दिवस पर गठित बाल कांग्रेस के पहले दिन एक हजार सदस्य बन गए थे। अब यह संख्या पांच हजार तक जा पहुंची है। प्रदेश स्तर पर इसकी कमान इंदौर के स्कूली छात्र लक्ष्य गुप्ता को मिली है। अब ये सदस्यता अभियान के साथ अपनी टीम तैयार करने में जुटे हैं। जल्द ही बाल कांग्रेस की प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर तक की टीम बनेगी।

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अभी जुड़ेंगे तो अगले चुनाव में मतदाता भी होंगे
कांग्रेस का मानना है कि बाल कांग्रेस में जो युवा अभी जुड़ेंगे वे अगले विधानसभा चुनाव में मतदाता भी होंगे। इसलिए एक साल में पांच लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ये बड़ा वोट बैंक सीधे तौर पर कांग्रेस का होगा। बाल कांग्रेस से जुड़े युवाओं में सक्रियता बनी रहे इसके लिए इन्हें कार्यक्रमों की जिम्मेदारी रहेगी। इसमें धार्मिक, सामाजिक सहित अन्य कार्यक्रम कर सकते हैं। वे अपने स्तर पर ऑनलाइन ऑफलाइन कार्यक्रमों को प्लान कर सकते हैं। इसके लिए जोन,ब्लॉक, जिला स्तर पर प्रभारी कांग्रेस कमेटी के होंगे, जिससे कार्यक्रम आयोजित करने में यवाओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

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कांग्रेस में प्रदेश, जिला, ब्लॉक स्तर पर मुखिया को अध्यक्ष पदनाम दिया जाता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होगा। इसका सेटअप ही एकदम अलग हटकर तैयार किया गया है। जिससे बच्चे अधिक आकर्षित हों। इसलिए अध्यक्ष की जगह कैप्टन पदनाम दिया गया है। जिस तरह से बाल कांग्रेस में प्रदेश के कैप्टन लक्ष्य गुप्ता बनाए गए हैं। उसी तरह जोनल, डिस्ट्रिक और ब्लॉक कैप्टन होंगे।

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भोपाल. पंचायत चुनाव में मंत्री, मंत्री दर्जा प्राप्त, सांसद, विधायक किसी भी अभ्यर्थी के मतगणना एजेंट नहीं बनाए जा सकेंगे। मंत्री मतगणना केंद्र पर सिर्फ अभ्यर्थी के रूप में जा सकेंगे। सरपंच से लेकर जिला पंचायत सदस्यों के लिए मतगणना ब्लॉक स्तर पर होगी। हर राउंड की मतगणना के लिए एजेंटों को अलग-अलग कलर के पास जारी होंगे। एक राउंड की गिनती के बाद उन्हें स्थल से बाहर जाना होगा।

मप्र राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार एजेंट मतगणना टेबल से इधर-उधर भ्रमण नहीं कर सकेंगे। स्थल पर एजेंटों के साथ साथ अधिकारी भी मोबाइल फोन पर बातचीत नहीं कर सकेंगे, लेकिन बहां तक फोन ले जाने की अनुमति जिला. निर्वाचन अधिकारी से मिल सकेगी।

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नीला होगा सरपंच का प्रमाण-पत्र
पंच के लिए निर्वाचन प्रमाण पत्र सफेद, सरपंच के लिए नीला, जनपद पंचायत का पीला, जिला पंचायत सदस्यों का प्रमाण-पत्र गुलाबी होगा। मतदान के समय सरपंच और पंचायतों के लिए मतपत्रों, जपं और जिप॑ सदस्यों के लिए भी ईवीएम में लगाए जाने वाले बैलेट पेपर कलरों को इसी क्रम में लगाया जाएगा।

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मध्यप्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव में इस बार उम्मीद्वारों को नामांकन पत्र ऑनलाइन दाखिल करने होंगे। निर्वाचन आयोग एक दो दिन में पंचायत चुनावों की तारीखों की घोषणा करने वाला है, इसके बाद क्षेत्र में पंचायत चुनाव की लहर दौड़ पड़ेगी, इसको लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां भी अंतिम दौर में चल रही हैं। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार सोमवार को पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाएगी। इसी के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही चुनावी माहौल मध्यप्रदेश में शुरू हो जाएगा।

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अधिकारियों को दिए नामांकन संबंधी दिशा-निर्देश
मध्यप्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की तैयारियां लगभग पूर्ण सी हो गई है। निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा भरे जाने वाले नामांकन से संबंधित दिशा निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दे दिए हैं। इस बार पंचायत चुनाव में उम्मीद्वारों को नामांकन पत्र ऑनलाइन भरने होंगे। जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया में दस्तावेजों संबंधी दिशा निर्देश आधिकारियों को दिए हैं। ताकि नामांकन संबंधी प्रक्रिया में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना किसी को नहीं करना पड़े।

भोपाल. कोरोना से जान गवाने वालों के परिवार को 50 हजार रुपए मुआवजा देने के ऐलान के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए एक क्लेम फॉर्मेट भी जारी कर दिया है। यानी कोरोना के कारण मध्य प्रदेश के जिस भी व्यक्ति की मौत हुई, उनके परिवार को 50 हजार की अनुग्रह राशि सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके आवेदन के लिए राज्य सरकार द्वारा दो अलग-अलग फॉर्मेट जारी किए गए हैं।


पहला फॉर्मेट- कोरोना से मौता का प्रमाण पत्र होने की स्थिति में ये फॉर्म भरें

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पहले फॉर्मेट के तहत जिन लोगों के पास कोरोना से मृत्यु का प्रमाण पत्र है यानी कोविड की आरटीपीसीआर रिपोर्ट उन्हें इस फॉर्मेट को भरकर मुआवजा राशि के लिए क्लेम करना होगा।


दूसरा फॉर्मेट- मृत्यु के संबंध में RT-PCR जांच रिपोर्ट न हो तो ये फॉर्म भरें

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दूसरे फॉर्मेट के तहत जिन लोगों के पास सिर्फ जांच रिपोर्ट है, लेकिन मौत का कारण नहीं है। उन्हें ये फॉर्म भरना होगा। सरकार की ओर से इसके लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है। कमेटी इसपर जांच और विचार करने के बाद मृतक के परिवार को प्रमाण पत्र जारी करेगी। इस प्रमाण पर से ये साबित होगा कि, पीड़ित को मुआवजा देना है या नहीं।

 

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कमेटी 30 दिन में लेगी निर्णय

आपको बता दें कि, मुआवजा पाने के लिए डेथ सर्टिफिकेट में कोविड से मौत दर्ज होना जरूरी नहीं है। फॉर्म के जरिए दस्तावेज प्रमाणित करने के अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी को दिए गए हैं। ये कमेटी 30 दिन में निर्णय लेगी। नियम 31 दिसंबर तक लागू रहेंगे।


सरकारी आकड़ों के अनुसार, इतने लोगों ने गवाई कोरोना से जान

आपको बता दें कि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर में कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान अब तक 10,526 मौतें हुई हैं। इसके अलावा भी इस महामारी से कई लोगों की मौत हुई हैं, लेकिन सर्टिफिकेट में इसका जिक्र नहीं हो सका है। ऐसे में सरकार द्वारा वैकल्पिक तरीकों के जरिए भी मुआवजा देने की व्यवस्था की है।

 

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भोपाल. दूसरे लॉकडाउन के बाद से पहली बार नेशनल रोड बाइक साइकिलिंग का आयोजन हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किया जा रहा है। जिसके लिए मध्यप्रदेश टीम की घोषणा कर दी गई है। जिला साइकिलिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएन सिंह ने बताया कि साइकिल फेडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय रोड बाइक चैंपियनशिप में शहर से विधि बोंडे, कनिष्का सिंह, अनंत मेहरा और स्वरुप सिंह का चयन हुआ है।

इन चारों ने राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया था। प्रदेश से अलग 9 अलग श्रेणियों में 25 साइकिलिस्ट चयनित हुए हैं। यह दल 23 नवंबर को कुरुक्षेत्र के लिए रवाना। प्रतियोगिता 25 से 28 नवंबर तक आयोजित की जाएगी। जिसमें देश के समस्त प्रदेशों के प्रतिभागी सम्मिलित होंगे।

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रजा इलेवन और नगर निगम ने जीते मुकाबले
ओल्ड कैंपियन मैदान में खेली जा रही रियान कप क्रिकेट लीग में रजा इलेवन और नगर निगम की टीमों ने जीत दर्ज की। पहले मैच में रजा एकादश ने आर्किटेक्ट एकादश को 10 विकेट से पराजित किया। वहीं, दूसरे मुकाबले में नगर निगम ने एसपीए को नौ विकेट से हराया। आर्किटेक्ट एकादश ने 18 ओवर में पांच विकेट खोकर 166 रन बनाए। घनश्याम ने शतक जड़ा। अजहर ने दो, शारिक और वकार ने एक-एक विकेट चटकाए। जवाब में रजा एकादश ने 14.4 ओवर में 167 रन बनाकर मैच दस विकेट से जीता। शिवम सिंह ने 88 व सैयद अदीब रजा ने 66 रनों की नाबाद पारियां खेली। शिवम, अजय सिंह मैन ऑफ द मैच बने। एसपीए ने 20 ओवर में नौ विकेट खोकर 131 रन बनाए। जवाब में नगर निगम ने 7.2 ओवर में एक विकेट खोकर 135 रनों का लक्ष्य प्राप्त किया। रवि नरवरे मैन ऑफ द मैच बने।

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भोपाल. माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं सालाना परीक्षा का टाइम टेबल जारी कर दिया है। इस संबंध में एमपी बोर्ड द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के तहत 10वीं की परीक्षाएं 18 फरवरी से 10 मार्च तक होंगी जबकि और 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 12 मार्च तक चलेंगी।


गौरतलब है कि, कोरोना के चलते पिछले दो वर्षों से बोर्ड समेत अन्य कक्षाओं की सालाना परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की गई थी, लेकिन इस बार संकर्मण की रफ्तार बेहद कम होने के कारण स बर परीक्षा विधिवत रूप से ऑफलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

 

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माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी किया गया ये टाइम टेबल...

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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतिवर्ष 15 नवम्बर को पूरे देश में जनजातीय गौरव दिवस मनाने तथा एक सप्ताह तक जनजातीय गौरव के विभिन्न कार्यक्रम देश के कोने-कोने में आयोजित किये जाने का निर्णय लिया और भोपाल से इस अभियान की शुरूआत की। आज मंडला में जनजातीय गौरव दिवस सप्ताह का समापन हो रहा है। यह आयोजन जनजातियों की जिंदगी बदलने का अभियान है। जनजातियों का आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातियों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान एवं उनके गौरव को दुनिया में पुन: स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 52 गढ़ों वाले गोंडवाना राज्य का गौरवशाली इतिहास रहा है। गोंड राजा प्रजापालक एवं कुशल प्रबंधक थे। उनके श्रेष्ठ जल-प्रबंधन को आज भी याद किया जाता है।

मुख्यमंत्री चौहान रामनगर मंडला में जनजातीय गौरव सप्ताह के समापन समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल से 600 करोड़ रूपये से अधिक की लागत वाले विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातीय वर्ग को सामुदायिक वन प्रबंधन का अधिकार दिया जाएगा, वे जंगल लगाएंगे तथा उसकी लकड़ी, फल पर उनका ही अधिकार होगा। मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में उन्हें आवासीय भूमि अधिकार-पत्र प्रदान किये जायेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के 89 जनजातीय विकासखंडों में "राशन आपके गाँव" योजना शुरू की गई, जिसमें गाँव में ही उचित मूल्य राशन वाहनों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। राशन-प्रदाय वाहन जनजातीय युवाओं को बैंकों के माध्यम से सरकार की गारंटी पर ऋण दिलाकर क्रय होंगे। मार्जन मनी सरकार देगी। वाहनों के लिये प्रतिमाह 26 हजार रूपये का किराया दिया जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना प्रारंभ की जा रही है, जिसमें 25 हजार रूपये से 10 लाख रूपये तक का ऋण सरकार अपनी गारंटी पर स्व-रोजगार के लिये दिलवाएगी।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सरकार नई आबकारी नीति बना रही है, जिसमें जनजातीय वर्ग पारंपरिक रूप से महुआ से शराब बना पाएगा। इस हेरिटेज शराब को बेचने का अधिकार भी जनजातियों को दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातियों के विरूद्ध दायर छोटे-छोटे और झूठे मुकदमे वापस लिये जाएंगे। जनजातीय समुदाय को प्रधानमंत्री आवास बनाने के लिये रेत मुफ्त में प्रदान की जाएगी। अगले वर्ष से तेंदूपत्ता बेचने का अधिकार जनजातियों को दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। यह कार्य वन समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 20 अगस्त 2020 तक जनजातीय समुदाय को निजी साहूकारों द्वारा अधिक ब्याज दर पर दिये गये ऋण समाप्त हो जाएंगे। हर गाँव में 4 ग्रामीण इंजीनियर नियुक्त किये जाएंगे, जो जनजातीय समाज के होंगे। पुलिस एवं सेना की भर्ती के लिये जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिलावाया जाएगा। हर घर तक नल के माध्यम से पानी पहुँचाया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 613 करोड़ 30 लाख रूपये की हालोन समूह जल प्रदाय योजना से मंडला जिले के 446 गाँवों में पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुँचाया जाएगा। नारायणगंज बीजाडोंडी समूह जल प्रदाय योजना से 182 गाँवों में पानी पहुँचाया जाएगा। मंडला में कम्प्यूटर कौशल केन्द्र-सह-पुस्तकालय का नाम राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह पुस्तकालय होगा। महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज मंडला का नाम रानी फूल कंवर पॉलिटेक्निक कॉलेज होगा। मंडला जिले में जनजातीय वर्ग को आय बढ़ाने के लिये एक लाख बाँस के पौधे प्रदाय किये जाएंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मंडला में मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा, जिसका नाम राजा हृदय शाह मेडिकल कॉलेज होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, मानपुर का नाम टंट्या भील स्वास्थ्य केन्द्र होगा। पाताल पानी स्थित टंट्या भील मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम टंट्या भील रेलवे स्टेशन होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि इंदौर स्थित भंवर कुआं चौराहे का नाम टंट्या भील चौराहा होगा। इसी प्रकार इंदौर में एमआर-10 बस स्टेण्ड का नाम टंट्या भील बस स्टेण्ड किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातीय विद्यार्थी प्रदेश के विभिन्न संभागों में अध्ययन के लिये जाते हैं, उनकी समस्याओं के समाधान के लिये संभाग स्तर पर संभागीय सुविधा केन्द्र खोले जाएंगे।


भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकारी पैसे के खर्च में शुचिता, पारदर्शिता और मितव्ययता जरूरी है। ऑडिटर देखते हैं कि सरकारी पैसे के खर्च में शुचिता, पारदर्शिता और मितव्ययता के सिद्धांतों का पालन हो। ऑडिटर अनुपयोगी खर्च रोकने में सरकार की मदद करते हैं। इसलिए ऑडिट की नकारात्मक छवि को बदलना जरूरी है। ऑडिटर वास्तविक रूप में सजग, सचेत और सतर्क रहते हुए सरकार के हिसाब-किताब की बारीकी से जाँच करते हैं। ऑडिटर अनुपयोगी खर्च रोकने में सरकार के मददगार हैं।
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यह बात शिवराज ने सोमवार को मिंटो हॉल में लेखा परीक्षा जागरूकता सप्ताह में शासन के सुधार में लेखा परीक्षा की भूमिका विषय पर संगोष्ठी के शुभारंभ मौके पर कही। यहां शिवराज ने कहा कि देश में सरकारें अनेक प्रकार के दिवसों जैसे पर्यावरण दिवस, खेल दिवस, शिक्षक दिवस आदि का आयोजन करती हैं, लेकिन यह विडंबना रही है कि ऑडिट पर केंद्रित किसी दिवस का हमने विशेष रूप से आयोजन नहीं किया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का ही प्रभाव है कि उन्होंने ऑडिट संस्थाओं की नकारात्मक छवि को मिटाने के लिए पहली बार 16 नवंबर 2021 को ऑडिट दिवस मनाया। शिवराज ने कहा कि भारत में लेखा परीक्षा का इतिहास 160 वर्ष से भी अधिक पुराना है। एक संवैधानिक संस्था के रूप में सीएजी संस्था ने सरकार के हिसाब- किताब को अधिक से अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
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सीएजी का महत्व समझो-
शिवराज ने कहा कि सीएजी संस्था के महत्व को समझने की जरूरत है। सीएजी की कर्त्तव्य-परायणता, संविधान के प्रति निष्ठा को ध्यान में रखते हुए सीएजी को सरकार का मित्र, पूरक और सहयोगी के रूप में देखने की आवश्यकता है। सीएजी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह सदा सजग, सचेत और सतर्क रहते हैं। ऑडिटर हर मामले पर अपनी निष्पक्ष और स्वतंत्र राय रखते हैं। वह सरकार के हिसाब- किताब की बारीकी से जाँच करते हैं। लोक लेखा, सार्वजनिक उपक्रम और प्राक्कलन समिति सदन के आँख- नाक- कान की तरह सहयोगी भूमिका निभाते हैं। प्रदेश में प्रधान महालेखाकार सभी विभागों के प्रमुख सचिवों, कार्यालय प्रमुख, जिला कलेक्टर्स, जन-प्रतिनिधियों आदि से मुलाकात कर लेखा परीक्षा कार्य-योजना के संबंध में विषयों और क्षेत्रों का निर्धारण कर रहे हैं। यह निश्चित ही एक सराहनीय पहल है। शिवराज ने निंदक नियरे राखिए- आँगन कुटी छवाय बिन पानी बिन साबुना निर्मल करे सुभाय दोहे का जिक्र करते हुए कहा कि लेखा परीक्षा करने वाले हमें यह बताते हैं कि काम में कहाँ-कहाँ सुधार की जरूरत है।
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समयबध्द कार्रवाई की जरूरत-
शिवराज ने कहा कि लेखा परीक्षक प्रतिवेदनों का अध्ययन कर उसमें उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेकर समयबद्ध कार्यवाही की जाना सुनिश्चित की जाए। लंबित ऑडिट कंडिकाओं का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। लेखा परीक्षा के लिए जो भी रिकॉर्ड माँगा जाए उसे बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। लेखा परीक्षक भी गवर्नेंस की नई तकनीकों और पद्धतियों के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करें। संगोष्ठी को प्रधान महालेखाकार डी साहू ने भी संबोधित किया।
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भोपाल। प्रदेश के भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली के प्रस्ताव का ड्राफ्ट सोमवार को तैयार हो गया है। इसे अब पीएचक्यू की ओर से पुलिस महकमे को भेजा जाएगा, जिसके बाद शासन स्तर पर परीक्षण करके क्रियान्वयन संबंधित निर्णय लिए जाएंगे। खास बात ये कि सरकार के स्तर पर प्रणाली को लागू करने के लिए नियमों को खंगाल लिया गया है। इसके तहत विधेयक या अध्यादेश की जरूरत नहीं रहेगी, बल्कि सरकार विभिन्न एक्ट में संशोधन करके चरणबध्द तरीके से प्रणाली को लागू कर सकती है। इसमें विभिन्न एक्ट में संशोधन की प्रक्रिया को जरूर पूरा करना होगा, जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य रूप से लगेगी। इसके चलते अब शासन स्तर पर तय होना है कि किस प्रक्रिया के तहत प्रणाली को लागू किया जाए। एक संभावना यह भी है कि दिसंबर में होने वाले विधानसभा सत्र के हिसाब से इस प्रणाली को लागू करने विधेयक लाने की तैयारी की जाएगी। सीएम के स्तर पर इस पर निर्णय होगा।
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अधिकारों से संबंधित हर एक्ट में होगा संशोधन-
सरकार को पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू करने के लिए अधिकारों से संबंधित हर एक्ट में संशोधन करना होगा। इसमें अपराध रोकथाम से संबंधित आईपीसी की धाराओं को लेकर संशोधन एक बार में ए ही एक्ट के जरिए हो सकता है। इसके अलावा आबकारी, शस्त्र लायसेंस, लाठीचार्ज सहित अन्य मामलों के लिए संबंधित एक्ट में अलग संशोधन करना होंगे। इसमें जितने एक्ट से संबंधित संशोधन होंगे, उतने नोटिफिकेशन जारी करना होंगे।
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यूं आगे बढ़ेगे कदम-
सोमवार को देर शाम तक प्रणाली का ड्राफ्ट प्रारंभिक रूप से तैयार हो गया है। हालांकि इसका मसौदा काफी हद तक 2017 से ही बनकर तैयार था, लेकिन आंशिक फेरबदल के साथ उसे अब शासन को भेजा जाना है। गृह विभाग के स्तर पर इसका परीक्षण होगा। इसके बाद सीएम सचिवालय को भी भेजा जाएगा। सीएम के रजामंदी के बाद इसे कैबिनेट में लाया जाएगा। इसके बाद नोटिफिकेशन होगा।
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क्षेत्र परिधि तय करना सबसे अहम-
पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू करने के लिए सबसे अहम उसकी क्षेत्र परिधि तय करना है। यह प्रणाली शहरी क्षेत्र में ही लागू होती है, जबकि अभी कई पुलिस थानों में ग्रामीण क्षेत्र भी आते हैं। इसलिए सबसे पहले क्षेत्र परिधि तय करना होगी। बकायदा इसका नोटिफिकेशन भी जारी होगा। इसमें मेट्रो पोलिटियन एरिया तय होगा।
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ये है मामला-
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बीते रविवार को भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का ऐलान किया है। इसके तहत अब प्रणाली को लागू करने के लिए प्रशासनिक कदम उठने हैं। इस पर काम शुरू हो गया है। सीएम ने बढ़ती आबादी के कारण दोनों शहरों में यह प्रणाली लागू करना बताया है।
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भोपाल :मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से रिन्यू पॉवर प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी सुमंत सिन्हा ने निवास पर भेंट कर मध्यप्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की। कम्पनी मध्यप्रदेश में 50 किलो टन क्षमता के ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की परियोजना लगाने की इच्छुक है, जो विश्व में इस क्षमता की प्रथम परियोजना होगी। सिन्हा ने कहा कि ग्रीन एनर्जी से बनने वाली ग्रीन हाइड्रोजन पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बहुत उपयोगी है। मध्यप्रदेश में उपलब्ध भरपूर सोलर तथा विंड एनर्जी को देखते हुए प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की पर्याप्त संभावना है। रिन्यू पॉवर प्रस्तावित परियोजना में 18 हजार करोड़ रुपए का निवेश करने को तैयार है। इससे लगभग दो हजार व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित गतिविधियों के लिए राज्य सरकार सकारात्मक एवं संवेदनशील है। मुख्यमंत्री को सुमंत सिन्हा ने पौधा तथा भारत में नवकरणीय ऊर्जा पर लिखित पुस्तक "फॉसिल फ्री" भेंट की। प्रमुख सचिव ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा संजय दुबे, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन संजय शुक्ला तथा रिन्यू पॉवर प्राइवेट लिमिटेड के मध्यप्रदेश प्रमुख केशव कानूनगो उपस्थित थे।

भोपाल. टीवी चैनल देखना 1 दिसंबर से और महंगा होने वाला है। ऐसा ट्राई द्वारा रेट बढ़ाए जाने को लेकर जारी किए गए एनटीओ-2 से होने वाला है। इसके चलते प्रमुख चैनल करीब 50 फीसदी तक महंगे हो जाएंगे। ट्राई के इस फैसले से जहां उपभोक्ताओं की जेब पर भार पड़ेगा, वहीं एमपी के केबल ऑपरेटर भी इस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।

ट्राई ने वर्ष 2018 एनटीओ-1 लागू किया था। इसके चलते चैनलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई थी। पूर्व में केबल ऑपरेटर 250 रुपए तक में सारे चैनल दिखाते थे वह इस टैरिफ बढ़ोतरी से 350 से 400 रुपए तक महंगे हो गए थे। वहीं अब ट्राई के एनटीओ पार्ट-2 को लागू कर दिया है। इससे पे टीवी ब्रॉडकास्टर ने अपने चैनलों और चैनल बुके की दरों में बढ़ोतरी करने जा रहे है। इससे 50 फीसदी डीं तक चैनल महंगा हो जाएंगे।

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दरअसल ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क्स द्वारा अब तक अपने चैनलों का एक बुके बनाया हुआ था। उसमें आठ नों दस चैनलों को एक साथ रखकर उनके दाम 20 से 35 रुपए तक रखे ए गए थे। अब यही दाम 30 से 45 वह रुपए हो जाएंगे। केबल ऑपरेटर बता रहे हैं कि नेटवर्क्स कंपनियां अब अपने बुके में पहले आठ-दस ग्रुप चैनल हुआ करते थे उनमें से कुछ टीवी को हटाकर उनके अलग से कीमत और निर्धारण करेगी। ऐसे में बुके के साथ इन चैनलों को लेने पर अतिरिक्त राशि देना पड़ेगी।

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ऑपरेटरों की मानें तो नए टैरिफ से अभी जो चैनल 350 रुपए में दिखाए जा रहे हैं वह बढ़कर 450 रुपए तक पहुंच सकते हैं। वहीं लोगों के पसंदीदा चैनलों को देखने के लिए पहले से ज्यादा कीमत अदा करना पड़ेगी। ट्राई के इस नए टैरिफ को लेकर कहा जा रहा है कि इससे दर्शकों को चैनलों के चयन और भुगतान का अगल विकल्प मिलेगा, जिससे उन्हें फायदा होगा।

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भोपाल। पूर्व सीएम उमा भारती ने सोमवार को सियासी मुद्दों पर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। उमा ने लिखा कि पीएम नरेंद्र मोदी के तीन कृषि कानून वापस लेने के फैसले से अवाक् रह गई। इसीलिए तीन दिन बाद प्रतिक्रिया दे रही हूं। उमा ने लिखा कि विपक्ष के निरन्तर दुष्प्रचार का सामना हम नही कर सके। मोदी ने क़ानूनों को वापस लेते हुए भी अपनी महानता स्थापित की। हमारे देश का ऐसा अनोखा नेता युग युग जीये , सफल रहे यही मैं बाबा विश्वनाथ एवं माँ गंगा से प्रार्थना करती हूँ ।

इसके अलावा उत्तरप्रदेश को लेकर ट्वीट किया कि उत्तरप्रदेश के जो हालात 15 साल में हो गए थे, उसमें आदित्य योगीनाथ से बेहतर कोई नही हो सकता था। उनमें शौर्य एवं धैर्य दोनो हैं। मुझमें धैर्य की कमी हैं, इसलिए मैं उनको अपना बेहतर वर्जन कहती हूँ। मैं कल दोपहर माँ विध्यवासिनी दरबार मीरजापुर पहुँच गयी । माँ गंगा और विंध्य पर्वत के दर्शन भी किए । हंस देवरहा बाबा का आशीर्वाद भी लिया । वह एक अलौकिक एवं दिव्य विभूति हैं । अन्य विषयों पर लिखा कि किसान को खाद, बीज और बिजली समय पर और अनाज मर्ज़ी से बेचने का अधिकार मिले तो यह ख़ुशहाली का सूत्र हो सकता हैं। खेती किसान की , तालाब मछुआरों के, मंदिर पुजारी का, जंगल आदिवासियों के और दुनिया भगवान की। बस बीच में और कोई ना आए तो सब कुछ ठीक रहेगा। इन्ही बातों को कभी विस्तार से और कहूँगी।
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भोपाल : उद्यमिता विकास केन्द्र द्वारा शिक्षित और अशिक्षित बेरोजगारों हेतु शुल्क आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं पशुपालन आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए पंजीयन प्रारंभ किया गया है। विभिन्न व्यावसायों के लिए पंजीयन की पृथक-पृथक तिथि निर्धारित की गई है।

ट्रेनिंग एसोसिएट संध्या जोशी ने बताया कि उद्यमिता विकास केन्द्र एम.एस.एम.ई. विभाग के अंतर्गत कार्यरत है, जो मध्यप्रदेश शासन केन्द्रीय वित्तीय संस्थाओं एवं राज्य के अग्रणी बैंकों द्वारा प्रवर्तित पंजीकृत संस्था है। केन्द्र द्वारा आगामी माहों में उद्यमिता एवं पशुपालन से संबंधित विषयों पर शुल्क आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बेरोजगार युवक-युवतियों को स्वयं के उद्यम अथवा उद्योग स्थापित करने तथा उसके सफल संचालन के लिये तैयार करना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शासकीय योजनाओं, इच्छित ट्रेड के लिये कच्चामाल, बाजार सर्वेक्षण, यूनिट प्रबंधन, विपणन, लेखा प्रबन्धन तथा करा-रोपण इत्यादि की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पश्चात प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये जायेंगे।

प्रशिक्षण सम्बन्धी जानकारी केन्द्र की समन्वयक श्रीमती संध्या जोशी से मोबाईल क्रमांक 8770555820 तथा कार्यालयीन समय में 0755-4000908 पर ली जा सकती है।

डेरी टेक्नोलोजी आधारित पशुपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 से 10 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 30 नवम्बर 2021 है। उद्यमिता एवं बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 से 17 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 08 दिसम्बर, उद्यमिता एवं मुर्गी पालन पॉल्ट्रीफार्म प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 से 24 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 10 दिसम्बर और खाद-प्रसंस्करण आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 से 31 दिसम्बर के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 15 दिसम्बर 2021 है। इन प्रशिक्षण के लिए रहवासी शुल्क 7500 और अरहवासी के शुल्क 3500 रूपये रहेगा।

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 से 6 जनवरी 2022 के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 20 दिसम्बर 2021 है। इस प्रशिक्षण के लिए रहवासी शुल्क 4500 और अरहवासी का शुल्क 2100 रूपये रहेगा। बीमा के क्षेत्र में कैरियर निर्माण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 से 21 जनवरी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 10 जनवरी 2022 निर्धारित है। इस प्रशिक्षण के लिए रहवासी शुल्क 3 हजार और अरहवासी का शुल्क 1400 रूपये रहेगा।

भोपाल. मध्य प्रदेश से कोरोना के सभी प्रतिबंध हटाने के बाद सोमवार शाम को प्रदेश सरकार द्वारा निजी स्कूलों को लेकर भी बड़ा आदेश जरी कर दिया है। पूरी क्षमता के साथ स्कूलों का संचालन करने के साथ साथ अब प्राइवेट स्कूल छात्रों से पूरी फीस भी ले सकेंगे। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के तहत कहा गया है कि, 8 जुलाई 2021 को जारी आदेश के सभी प्रतिबंध रद्द कर दिये गए हैं।

एसोसिएशन ऑफ अन एडेड प्राइवेट स्कूल के उपाध्यक्ष विनी राज मोदी के अनुसार, आदेश जारी होने के बाद अब से मध्य प्रदेश के सभी निजी स्कूल भी छात्रों से पूरी फीस ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि, अबतक सिर्फ मध्य प्रदेश ही ऐसा राज्या था, जहां के निजी स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले रहे थे।

 

पढ़ें ये खास खबर- जारी हुआ 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल, यहां देखें तारीख

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गृहमंत्री ने दिये थे संकेत

बता दें कि, इस संबंध में सोमवार सुबह ही मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी बयान दिया था। उन्होंने अपने ट्वीट पर लिखा था कि, 'प्रदेश में स्कूल पूरी क्षमता के साथ खोले जाएंगे। आज शाम तक स्कूलों को खोलने के आदेश जारी होने की संभावना है।'

भोपाल. माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने सोमवार को 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षाओं का टाइम टेबल जारी कर दिया है। टाइम टेबल के अनुसार 10 वीं की परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होकर 10 मार्च तक और 12 वीं की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च तक चलेंगी। कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष परीक्षाएं मार्च के बजाय फरवरी माह में ही शुरू हो जाएंगी और मार्च के दूसरे सप्ताह तक सम्पन्न हों जाएंगी।

टाइम टेबल के अनुसार सभी परीक्षाएं सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे के बीच आयोजित होंगी। कक्षा 10वीं और 12वीं के नियमित छात्रों की प्रायोगिक परीक्षाएं उनके विद्यालय में 12 फरवरी से 25 मार्च 2022 के बीच और स्वाध्यायी छात्रों की उन्हें आवंटित परीक्षा केंद्र पर 17 फरवरी से 20 मार्च 2022 के बीच संचालित की जाएंगी। परीक्षा कार्यक्रम मंडल की वेबसाइट 222.द्वश्चड्ढह्यद्ग.ठ्ठद्बष्.द्बठ्ठ पर भी देखे जा सकते हैं।

परीक्षा केंद्र पर सभी परीक्षार्थियों को सुबह 8.30 बजे तक उपस्थित होना अनिवार्य होगा। परीक्षा कक्ष में 9.45 बजे के बाद किसी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा प्रारंभ होने के 10 मिनट पहले छात्रों को उत्तर पुस्तिका और पांच मिनट पहले प्रश्न पत्र दिए जाएंगे। नियमित, स्वाध्यायी, दृष्टिहीन, मूकबधिर (दिव्यांग) परीक्षार्थियों की परीक्षाएं समान रूप से एक ही तिथि, दिवस और समय में संपन्न की जाएगी।--------

10 वीं की परीक्षा 18 फरवरी शुक्रवार को हिंदी, 22 फरवरी मंगलवार को गणित, 24 फरवरी गुरुवार उर्दू, 26 फरवरी शनिवार को सामाजिक विज्ञान, दो मार्च बुधवार को विज्ञान, पांच मार्च शनिवार को अंग्रेजी, आठ मार्च मंगलवार को संस्कृत, नौ मार्च बुधावार को मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, केवल मूक-बधिर के लिए पेटिंग, और दृष्टिबाधित के लिए संगीत की परीक्षा, 10 मार्च को नेशनल स्क्ल्सि क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क के समस्त विषय।

--------12 वीं की परीक्षा

17 फरवरी गुरुवार को अंग्रेजी, 19 फरवरी शनिवार को हिंदी, 21 फरवरी सोमवार को फिजिक्स, अर्थशास्त्र, एनिमल हस्बेंड्रीं, विज्ञान के तत्व, भारतीय कला का इतिहास, व्होकेशनल कोर्स के प्रथम प्रश्न पत्र। 23 फरवरी बुधवार को बॉयोटेक्नालॉजी, भारतीय संगीत, 24 फरवरी गुरुवार बायलॉजी, 25 फरवरी शुक्रवार को राजनीति शास्त्र, व्होकेशनल कोर्स का द्वितीय प्रश्नपत्र, 28 फरवरी सोमवार केमेस्ट्री, इतिहास,व्यवसाय अध्ययन , एलीऑफ साइंस एंड मेथेमेटिक्स यूजफुल फॉर एग्रीकल्चर, ड्राइंग एंड पेटिंग, गृह प्रबंध पोषण एवं वस्त्र विज्ञान। तृतीय प्रश्न व्होकेशनल कोर्स। तीन मार्च गुरुवार मेथेमेटिक्स, चार मार्च शुक्रवार समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, कृषि, होम साइंस , ड्राइंग एंड डिजाइनिंग, बुक कीपिंग एंड एकाउंटेंसी , इनवायरमेंटल एज्यूकेशन एंड रूरल डवलमेंट, इंटरप्रेनुअरशिप। सात मार्च सोमवार इन्फॉरमेतटिक प्रेक्टिसेस, नौ मार्च बुधवार भूगोल, क्रॉप प्रोडक्शन एंड हार्टिकल्चर, स्टिल लाईफ एंड डिजाइन, शरीर रचना क्रिया- विज्ञान एवं स्वास्थ्य,10 मार्च उर्दू, मराठी, 11 मार्च नेशनल स्किल्स क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क के समस्त विषय, शारीरिक शिक्षा, 13 मार्च संस्कृत।

भोपाल. सहालग में कोरोना को लेकर लगाए गए प्रतिबंध हटते ही शादियों, बाजारों, मंडियों, सरकारी दफ्तरों में 95 फीसदी लोगों के चेहरों से मास्क गायब हो गया। सोशल डिस्टेंस तो अब दिखना ही बंद हो गया, गोले भी दिखाई नहीं देते। हाथ धोना, सैनिटाइजर को भी लोग अब साथ नहीं रखते। सबसे बड़ी चिंता का विषय ये है कि भोपाल में ही करीब 5.50 लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगना बाकी है। जबकि अन्य जिलों में ये संख्या काफी ज्यादा है। सहालग में लोग मप्र ही नहीं देश के अन्य राज्यों और विदेशों तक से आ रहे हैं। जहां कोरोना की रफ्तार तेज है। ऐसे में शादी सीजन में बरती जा रही लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए। इसलिए अभी कुछ और माह संभलकर रहने की जरूरत है। भोपाल में ही चंद दिनों में दो हजार से ज्यादा शादियां हैं। शहर में छोटे बड़े होटल से लेकर लॉज यहां तक की धर्मशालाओं तक के कमरे बाहर से आए मेहमानों से फुल हैं। बच्चे बड़े और बुजुर्ग सभी बाहर से आ रहे हैं। जबकि बच्चों को लेकर केंद्र की तरफ से काफी पहले एडवाइजरी जारी हो चुकी है। इसके बाद भी माता-पिता छोटे बच्चों को मास्क तक नहीं लगा रहे।

कुछ दिन पहले हमीदिया की एक डॉक्टर की मौत कोरोना से हो चुकी है, जिनको दोनों टीके लगे थे। ऐसे में अभी ये मानलेना कि कोरोना चला गया, जल्दबाजी होगी। दोनों डोज लगने के बाद भी सावधानी बरतना जरूरी है। शहर में कई लोग तो ऐसे हैं जो फोन करने के बाद भी वैक्सीन सेंटरों पर नहीं पहुंच रहे। कोरोना कंट्रोल रूम प्रभारी डॉ. संगीता टांक का कहना है कि उनका पूरा अमला इन दिनों सेकेंड डोज न लगवाने वाले लोगों को फोन कर रहा है। लेकिन कम लोग ही दूसरा डोज लगवाने अपनी मर्जी से पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग शादियों का बहाना बना रहे हैं।

इन वार्डों में तो सेकेंड डोज न के बराबर लगी
- डीआईजी बंगला, जेपी नगर (12,14,16, 72, 73, 74, 75, 76, 77, 78, 79 ) में पहले डोज का प्रतिशत 102 तो दूसरे का 54 फीसदी ही है।

- चांदबड़ (8,10,11, 13, 15, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 69 ) में पहले डोज का प्रतिशत 104 तो दूसरे का 53 प्रतिशत है।
- मातियापार्क (2, 4, 5, 6, 7 ) में पहले डोज का प्रतिशत 104 और दूसरे डोज का 56 फीसदी ही पहुंचा है। इन वार्डों में ही काफी लोगों के यहां शादियां हैं। मेहमान बाहर से आ रहे हैं तो कई जा रहे हैं। किसे वैक्सीन लगी, किसे नहीं, किसी को कोई परवाह नही।

सर्दी, खांसी, जुकाम आम बात

इन दिनों सर्दी, खांसी जुकाम आम बात बनी हुई है। डॉक्टरों के पास जाने पर उसे सामान्य डेंगू टेस्ट कराने की सलाह दी जा रही है। लेकिन कोरोना का टेस्ट कराने की सलाह किसी को नहीं दे रहे। जानकारों का कहना है कि अगर कोरोना की सही टेस्टिंग शुरू हो जाए। तो आज भी शहर में पचास से ज्यादा मरीज प्रतिदिन सामने आ सकते हैं। वैसे भी शहर में कोरोना टेस्ट के लिए खोले गए सेंटर अब बंद हो चुके हैं।

क्यूआरटी कई माह से गायब

दूसरी लहर में अनलॉक के बाद थाने के बीट सिस्टम की तरह नगर निगम, पुलिस और प्रशासन के कर्मचारियों की एक क्यूआरटी (क्विक रिएक्शन टीम ) बनाई थी। इसका काम लोगों को मास्क लगवाना, कोविड के नियमों का पालन करना था। ये टीम शुरू से ही कागजों में काम कर रहे है। जमीन पर इसका कोई काम दिखाई नहीं देता।

भोपाल. नजीराबाद इलाके में रविवार को महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के अंदर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित ने प्रेम सम्बंधों में धोखा देने की शंका में हत्या करने की बात कबूल की है।
पुलिस ने बताया कि, रविवार को इलाके के कल्याणपुर गांव निवासी अनिल पिता तोरन सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि, किसी व्यक्ति ने मम्मी भूरीबाई की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी है। इसके बाद नजीराबाद पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी ।

जांच करने और लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि गांव के ही चंदरसिंह गुर्जर का प्रेम-संबंध मृतिका भूरीबाई के साथ था, भूरीबाई की मौत के बाद से वह घर पर नही है। पुलिस ने चंदरसिंह की तलाश शुरू की। कुछ ही घंटों में मुखबिर सूचना पर आरोपित चंदरसिंह गुर्जर (45) पिता दौलाजी गुर्जर को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में चंदरसिंह ने बताया कि, उसके एवं मृतिका भूरीबाई के बीच करीब 12 साल से प्रेम-संबंध थे। पिछले कई दिनो से आरोपी को संदेह था कि भूरीबाई अन्य व्यक्तियों से भी बातचीत करती है। यह चंदरसिंह को अच्छा नही लगता था। इसी शक के चलते उसने भूरीबाई के सिर एवं गर्दन और पीठ पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

भोपाल. कोरोना की दोनों डोज को लेकर अब लगातार प्रशासनिक अधिकारी बैठकें कर रहे हैं। सोमवार को कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कलेक्टोरेट में बैठक कर सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 24 नवंबर को होने वाले महावैक्सीनेशन अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों को दूसरा डोज लगवाने के लिए प्रेरित करें। सोमवार को राजधानी में 285 सेंटरों पर नौ हजार आठ सौ लोगों को टीका लगा है। कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे अपने परिवार, मोहल्ले और रिश्तेदारों से चर्चा करें और वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने के लिये कहें। ऐसा करने से ही सभी लोग सुरक्षित रहेंगे। बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मी को भी निर्देशित किया कि अपने कार्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से पूछे कि उन्होंने दोनों डोज लगवाये हैं या नहीं। अगर नहीं तो उनको टीका लगाने के लिए पे्ररित किया जाए।

अतिथियों से पूछे दोनों डोज लगे या नहीं
कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि जिन लोगों के यहां हाल ही में मेहमान आने वाले हैं या आ रहे हैं। ऐसे परिवार अतिथियों को एक बार फोन पर दोनों डोज को लेकर चर्चा अवश्य कर लें। अगर किसी को दोनों डोज पूरे नहीं लगे हैं तो उनको टीका लगवाने के लिए कहें, ताकि उनके साथ अन्य लोग भी सुरक्षित रह

सोमवार को भी भोपाल में 285 केन्द्रों पर टीकाकरण का काम जारी रहा। कलेक्टर ने सभी नागरिकों से अपील की है कि सार्वजनिक जगहों, शादी-पार्टी और अन्य समरोह में जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि दोनों डोज अवश्य लगे हों। इसके लिये सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। सभी आयोजन कर्ताओं से भी आग्रह किया गया है कि वह भी यह सुनिश्चित करें कि उनके यहाँ आने वाले सभी अतिथियों को दोनों डोज लगे हो और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क अनिवार्य रूप से पहने और हाथ साफ करने के लिये सेनेटाइजर रखें।

भोपाल. सरकार मिलावटखोरी को लेकर अभियान तो चला रही है, लेकिन शराब की जांच को लेकर अभी तक कोई सुगबुगाहट नहीं है। जबकि प्रदेश में जहरीली शराब से मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस गंभीर विषय पर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली (एफएसएसएआई) ने आयुक्त खाद्य को पत्र लिखकर राजधानी ही नहीं प्रदेश के सभी जिलों में देशी और विदेशी शराब सैम्पल की जांच के निर्देश दिए हैं। इस पत्र के आधार पर ही आयुक्त खाद्य की तरफ से सभी कलेक्टरों को आदेश जारी कर शराब के सैम्पल लेने के आदेश जारी हो चुके हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों ने अभी तक इस आदेश पर अमल नहीं किया। जब एफएसएसएआई के पत्र को अफसर अनदेखा कर रहे हैं तो किस की सुनेंगे। ऐसे में ये सवाल अब खड़ा होने लगा है।

अब खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी शराब के सैम्पल ले सकेंगे। दरअसल उज्जैन, जबलपुर, मुरैना से कई शिकायतें एफएसएसएआई को गईं। इसके बाद ही ये पत्र मप्र के आयुक्त खाद्य को लिखा गया है। आबकारी विभाग के मुताबिक शहर में हर रोज करीब 25 हजार अंग्रेजी शराब की बोतल, 20 हजार बियर की बोलत और 50 हजार लीटर देशी शराब की बिक्री होती है। लेकिन इसकी गुणवत्ता को कौन जांचे।

सब्जी के सैम्पल तक नहीं लिए
दीपावली से पूर्व पुराने शहर में एक युवक नाले के पानी से सब्जी धोने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद कलेक्टर अविनाश लवानिया ने अभिहित अधिकारी संजय श्रीवास्तव को निर्देश देकर एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों ने इसके बाद किसी सब्जी के सैम्पल लेना उचित नहीं समझा। उस समय ही मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र दुबे ने दीपावली के बाद सब्जी सैम्पल लेने की बात कही थी। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो रहा। शहर में रोजाना हजारों क्विंटल सब्जी ऐसे ही खप जाती है।

जहरीले तालाब के सिंघाड़े फिर से तोडऩे लगे

यूनियन कार्बाइड के पास जहरीले तालाबों में की जा रही सिंघाड़े की खेती पर एक बार नगर निगम और दूसरी बार एसडीएम गोविंदपुरा की टीम कार्रवाई कर चुकी है। यहां सिंघाडे की खेती को नष्ट कराने के बाद सिंघाड़े तोडऩे के लिए मौखिक रूप से मना किया है। कुछ दिन बाद यहां फिर से सिंघाड़ों की खेती और उन्हें तोडऩे वाले सक्रिय हो गए। इस मामले में भी खाद्य सुरक्षा अफसरों की जिम्मेदारी बनती है कि वे मौके पर जाकर सिंघाड़ों के सैम्पल लेकर उन्हें जांच के लिए भेजें। अफसरों ने यहां भी ध्यान नहंी दिया।

टोस्ट, मसाले, रेस्टोरेंट, हॉकर्स सब की जांच बंद
इन दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग का अमला न जाने कहां काम कर रहा है। कहने को पूरा अमला इतना व्यस्त है कि उसके पा समय नहीं है। लेकिन कार्रवाई कहां और क्या हो रही है किसी को नहीं पता। जबकि दो माह पूर्व तक यही अमला पुराने और नए शहर के टोस्ट कारखानों से मसालों की फैक्ट्री पर कार्रवाई कर सैम्पल लेता रहता था। यही नहीं ईट राइट के तहत हॉकर्स कॉर्नर और जले हुए तेल के संबंध में भी कार्रवाई होती थी। लेकिन अब एक दम पूरा मामला ठंडा पड़ गया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र दुबे अधिकतर समय व्यस्त ही रहते हैं?लेकिन कार्रवाई कहां हो रही, पता नहीं।

वर्जन

तहां तक मेरी जानकारी में है अमला काम कर रहा है। फिर भी एक बार और जानकारी की जाएगी। अगर सैम्पल नहीं हो रहे तो इसका पता किया जाएगा।
संजय श्रीवास्तव, अभिहित अधिकारी, जिला प्रशासन

भोपाल. पंचायत चुनावों को लेकर तस्वीर साफ होती जा रही है। वर्ष 2019 का परिसीमन समाप्त कर 2014 की स्थिति में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। इस स्थिति में बैरसिया की 10 नई पंचायतों के वोटरों को फिर से पुरानी पंचायतों में जोड़ा जाएगा। जिला निर्वाचन कार्यालय को तीन दिन के अंदर ये प्रक्रिया पूरी कर राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। वर्ष 2019 में कांग्रेस सरकार ने नए सिरे से पंचायतों का परिसीमन कराया था। इस दौरान बैरसिया के 13 गांव प्रभावित हुए थे, गांव के गांव 10 नई पंचायतों में शिफ्ट हो गए थे, इसकी नई मतदाता सूची भी तैयार हो चुकी है। उस समय पंचायतों की संख्या 197 हो गई थी। अब इनको फिर से पुरानी स्थिति में लाया जाएगा। 13 गांव के मतदाताओं की वोटर लिस्ट फिर से तैयार की जाएगी। सोमवार को हुई राज्य निर्वाचन आयोग की वीडियो कॉन्फ्रेंस में ये निर्देश जिले के अफसरों को दिए हैं।

वर्ष 2014 में अधिसूचना जारी होने के बाद 2015 में पंचायत चुनाव हुए थे। इस दौरान जो आरक्षण था उसी आरक्षण पर एक बार फिर से चुनाव कराया जाएगा। ऐसे में उन लोगों को फायदा हो गया जिनकी सीट पुरुष थी और 2019 में वार्ड आरक्षण के बाद महिला हो गई थी। सरकार के इस फैसले से पंचायतों में काफी कुछ समीकरण बदलेंगे या ये कहें के पुराने ही रहेंगे। मतदाता सूची में बदलाव होने से वोटर के गांव भी बदल सकते हैं। ये 13 गांव की नई मतदाता सूची बनने के बाद पता चलेगा।

पुराने लोगों को फायदा, यहां फंस सकता है पेंच

पंचायत का रिजर्वेशन चक्रिय होता है। पंचायत ग्रामीण विकास के नोटिफिकेशन में 2014 की स्थिति में चुनाव होंगे। ऐसे में रिजर्वेशन का चक्र पूरा नहीं हो पाएगा। जानकारों की मानें तो इन परिस्थितियों में मामला कोर्ट में जाकर फंस सकता है। 2019 में हुए वार्ड आरक्षण के बाद काफी कुछ बदलाव हुए थे। खुद जिला पंचायत अध्यक्ष मनमोहन नागर का वार्ड पुरुष से महिला हो गया था, पुरानी स्थिति में चुनाव कराने पर वह फिर से उसी सीट से चुनाव लड़ सकेंगे। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण हैं, जिनमें पंचायतों में पुराने लोगों को काफी फायदा होगा।

भोपाल. कोरोना में मारे गए लोगों के परिजनों ने कलेक्टोरेट में 50 हजार रुपए की अनुगृह राशि (मुआवजा) के लिए आवेदन किए हैं, उन्हें अपने आवेदन बदलने होंगे। सरकार की तरफ से भेजा गया नया फॉर्मेट अब सामने आया है। जिसको दो श्रेणियों में बांटा है, पहली में वे लोग हैं जिनके पास कोरोना मृतक संबंधी सभी प्रमाण पत्र मौजूद हैं। दूसरा वो जिसमें लोगों के पास आरटीपीसीआर रिपोर्ट से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र और उसमें कोरोना से मौत होने तक का उल्लेख नहीं है। ऐसे दो फॉर्म अलग-अलग तैयार किए गए हैं। इस कारण कलेक्टोरेट में अभी तक पहुंचे साढ़े चार सौ से ज्यादा आवेदन गलत हो गए हैं, उन्हें फिर से भरकर देने होंगे। इसमें कई प्रकार की जानकारी, कोरोना पॉजिटिव आने की आरटीपीसीआर या रैपिड एंटीजन रिपोर्ट से लेकर बीच-बीच में हुई जांच और डॉक्टरों की तरफ से कराई गई रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र लगाना होगा। अगर प्रमाण पत्र नहीं है तो उसका कारण भी बताना होगा। उसके लिए दूसरा फॉर्म भरना होगा।

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में राजधानी में 1002 लोगों की मौत कोरोना से होना बताया गया है। इसमें से काफी लोग दूसरे जिले के भी हैं। चार माह पूर्व मुआवजा मिलने की सुगबुगाहट होते ही किसी निजी ऑपरेटर ने अपने स्तर पर मुआवजे का फॉर्मेट तैयार किया और लोगों को बेचकर अपनी जेब भर ली। ऐसे ही कई अलग-अलग अन्य फॉर्मेट भरकर लोगों ने कलेक्टोरेट में मुआवजे के लिए जमा कर दिए। अब जब सरकार का फॉर्मेट सामने आया है तो उसे देखते हुए सभी निरस्त करने होंगे। एडीएम उमराव मारावी का कहना है कि अथॉर्टी तय करेगी मुआवजा, लेकिन अधिक जानकारी मंगलवार तक साफ हो जाएगी। अभी तक आए आवेदन नए फॉर्मेट में देने होंगे।

आठ सदस्यीय अथॉर्टी तय करेगी मौत कैसे हुई
आवेदन आने के बाद जिन लोगों के पास आरटीपीसीआर रिपोर्ट है और मृत्यु प्रमाण पत्र पर कोरोना से मौत लिखी है, ऐसे लोगों को कुछ अन्य प्रक्रियाएं पूरी कर मुआवजा मिल जाएगा। लेकिन जिन लोगों के पास कोरोना से मौत का प्रमाण नहीं है या पॉजिटिव की रिपोर्ट ही गुम हो गई है, उनके बारे में आठ सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉर्टी तय करेगी। हालांकि ये सभी आवेदन इसी अथॉर्टी के द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे।

ये लोग होंगे डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर अथॉर्टी में

1. डिप्टी कमिश्नर (चेयरपर्सन )
2. एसपी (मेम्बर )

3.सीएमओ (मेम्बर )
4. सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर ,पीडब्ल्यूडी )(मेम्बर )

5. सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर , पीएच )(मेम्बर )
6. सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर , एमपीपीपी )(मेम्बर )

7. चेयरपर्सन ऑफ जिला पंचायत (मेम्बर )
8. एडीएम (मेम्बर )

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ये समस्या भी आएंगी

- मुआवजे के लिए आवेदन कर रहे व्यक्ति से मृतक का संबंध क्या है। अगर किसी के तीन बेटे हैं, तीनों में पटती नहीं है। ऐसे में कौन आवेदन करेगा।
- जहां पूरे परिवार खत्म हो गए हैं, उनके मामलों में कौन आवेदन करेगा। ऐसे में दो दावेदार भी सामने आ सकते हैं।

- कई लोग ऐसे हैं जिनकी श्मशान की रसीदों पर ही कोरोना से मौत होना लिखा है, बाकी कोई प्रमाण नहीं है। ऐसे लोगों का क्या होगा? ऐसे कई सवाल अभी प्रशासन के सामने आने हैं।
- एक परिवार में चार लोगों की कोरोना से मौत हुई, दो के पास प्रमाण पत्र हैं, बाकी दो पर फैसला अथॉर्टी को करना होगा।

ये होंगे पहले हकदार

- पति नहीं है तो पत्नी, पत्नी नहीं है तो पति
- दोनों ही नहीं है तो अविवाहित संतान

- अगर पूरा परिवार ही नहीं है तो मृतक के माता-पिता

भोपाल. एम्स से लेकर करोद के 16.5 किमी मेट्रो रूट में से सुभाष नगर तक 6.22 किमी रूट का सिविल वर्क 70 फीसदी पूरा हो चुका है। इसी रूट पर सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। आखिरी बाधा सुभाष नगर पर 3.89 एकड़ जमीन जो रेलवे के नाम पर थी, वह भी मेट्रो कंपनी को सौंपी जाएगी। इसकी एनओसी रेलवे ने दे दी है। इस रूट पर बनने वाले आईकॉनिक स्टेशन अगले दो माह में आकार लेना शुरू हो जाएंगे। इस रूट पर आगे की चुनौती आजाद नगर पर बसी 280 झुग्गी हैं। मेट्रो कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि यहां बसे लोग भी मान गए हैं, इनको पहले नजदीकी सरकारी जमीन पर फिर धीरे-धीरे कर हाउसिंग फॉर ऑल के मकानों में शिफ्ट किया जाएगा। रहा सवाल 170 आरा मशीनों की तो इसके लिए चांदपुर में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 6.22 किमी रूट पर 228 पिलर पर मेट्रो गुजरेगी।

इस रूट की ये खासियत रहेगी
- पर्यटन की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए मेट्रो के एम्स से करोद तक के रूट पर चार और भदभदा स्क्वायर से रत्नागिरी के रूट की दो लोकेशनों पर समानांतर चलने वाली सड़कों को प्लांटेशन और आर्केटेक्ट की मदद से खूबसूरत बनाया जाएगा।

- 6.22 किमी रूट पर रानी कमलापति स्टेशन के पास आईकॉनिक स्टेशन बनाया जाएगा। यहां पर यात्रियों की सुविधा के अनुसार और ट्रेनों के टाइम टेबल अनुसार मेट्रो का आवागमन होगा। फिल्मों की शूटिंग भी होगी संभव
- सभी स्टेशनों पर कहां ड्रॉप एंड गो व पिकअप कर सकेंगे इसके लिए शहर की ट्रांसपोर्ट एजेंसियों को डिजाइनें सौंप दी हैं। स्टेशन की लोकेशन के अनुसार ही वे वाहनों का रूट तय कर रहे हैं। मेट्रो शुरू होने के बाद शहर की बड़ी आबादी को राहत मानकर पूरा प्लान तैयार किया गया है। मेट्रो रूट की कई लोकेशनों पर विदेशों जैसे नजारे आम होंगे, इससे फिल्मों की शूटिंग, पर्यटन क्षेत्र में खासा लाभ भविष्य में मिलेगा, सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।

650 कॉलोनी को मिलेगी राहत

एम्स से करोद तक पहले रूट के 15 स्टेशनों की 650 कॉलोनी, बस्ती, मल्टियों के करीब सात लाख से ज्यादा लोगों को बेहतर ट्रांसपोर्ट का लाभ मिलेगा। सात लोकेशन ऐसी हैं जहां सड़क और मेट्रो रूट साथ चलेंगे। सभी स्टेशन ऐसे डिजाइन किए गए हैं जहां ड्रॉप एंड गो को एयरपोर्ट की तर्ज पर रखा गया है। वाहनों के पार्र्किंग की व्यवस्था, किसी रूट के वाहन कहां से जाएंगे इसके लिए बाकायदा डिस्प्ले बोर्ड भी लगेंगे।

ये हैं स्टेशन:1. एम्स, 2. अल्कापुरी, 3. हबीबगंज नाका, 4. हबीबगंज स्टेशन/ मानसरोबर कॉम्पलेक्स, 5. सरगम सिनेमा, 6. डीबी सिटी, 7. केंद्रीय विद्यालय, 8. सुभाष नगर, 9. पुल बागेदा जंक्शन, 10. ऐशबाग क्रॉसिंग, 11. नादरा बस स्टैंड, 12. सिंधी कॉलोनी, 13. डीआईजी बंगला, 14. कृषि उपज मंडी, 15. करोद सर्किल।

वर्जन
मेट्रो के प्लान के अनुसार उनको जमीनें उपलब्ध करा दी हैं, एजेंसियां तालमेल से काम कर रही हैं। एम्स से सुभाष नगर तक के लगभग सभी पिलर का काम पूरा हो गया है। जो बाधाएं थीं वे दूर हो गईं हैं। जल्द ही शहर को बड़ी सौगात मिलेगी।

अविनाश लवानिया, कलेक्टर

भोपाल. इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है और बाजार गुलजार है। विवाह के लिए खरीदारी की शुभ घड़ी दो दिन बाद रहेगी। 25 नवम्बर को गुरु पुष्य योग का संयोग रहेगा। इस दिन गुरु पुष्य के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग भी रहेगा।

इस लिहाज से यह दिन अत्यंत शुभ फलदायी होगा। विवाह के लिए सभी प्रकार की खरीदारी के लिए यह दिन विशेष शुभ होगा। इन दिनों शहर में शादियों की रौनक है। लग्न सीजन होने के कारण बाजारों में भी खरीदारी का सिलसिला चल रहा है। ऐसे में इस शुभ मुहूर्त का आना सोने पर सुहागा जैसा है। गुरुपुष्य नक्षत्र भूमि, भवन, वाहन, आभूषण, व्यापारिक अनुबंध सहित सभी प्रकार की खरीद फरोख्त और शुभ कार्यों के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन गुरु पुष्य के साथ सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग आने से यह दिन और भी अधिक खास हो जाएगा।

स्थायित्व देती है गुरु पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदारी
ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम का कहना है कि गुरु पुष्य योग खरीदारी के लिए काफी शुभ माना जाता है। सभी प्रकार के नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। खासकर जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार और रविवार को आता है, तो यह क्रमश: गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग का संयोग बनता है। यह दोनों ही योग खरीदारी के लिए विशेष शुभ माने गए हैं। इसमें की गई खरीदारी स्थायित्व प्रदान करती है।

नामकरण, गृह प्रवेश, नवीन व्यापार के लिए शुभ
पं. प्रहलाद पंड्या के अनुसार पुष्य नक्षत्र 24 नवम्बर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से आएगा, जो अगले दिन 25 नवम्बर को दोपहर-3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। गुरुवार के दिन सूर्योदय से लेकर पुष्य नक्षत्र दोपहर बाद तक रहेगा। सूर्योदयकालीक होने के कारण पूरा दिन खरीदारी के लिए विशेष शुभ रहेगा। इस दिन कर्क राशि का चंद्र रहेगा, साथ ही सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग भी रहेगा। सभी प्रकार की खरीदारी और शुभ कार्य करने के लिए यह दिन उत्तम है। इसमें स्थायित्व देने वाली सामग्री की खरीदारी करना भी फलदायी है। साथ ही नामकरण, वधु प्रवेश, गृह प्रवेश, नवीन व्यापार का शुभारंभ भी फलदायी रहेगा।

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