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रिश्वत : भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीएम आशीर्वाद योजना, बाबू ने अनाथ बच्चों से मांगी 56000 में 36000 की घूस, दबोचा Saturday 13 April 2024 07:00 PM UTC+00 महिला सशक्तिकरण कार्यालय में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कल्याणकारी योजनाएं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के भेंट चढ़ गई है। हैरानी की बात यह कि कार्यालय में बैठे अधिकारी-कर्मचारी मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत अनाथ बच्चों की योजना में भी नहीं छोड़ रहे। मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना में कर्मचारी घूस लेने कार्यालय में पकड़े गए। इस दौरान कार्यालय के बाहर मौजूद हर किसी के जुबान पर एक ही सवाल था कि अनाथ बच्चों के साथ ऐसा नहीं चाहिए। अधिकारियों की नाक के नीचे बाबुओं का कमीशन का खेल कार्यालय में इस योजना में ही नहीं अन्य योजनाओं में अधिकारियों की नाक के नीचे बाबुओं का कमीशन का खेल लंबे समय से चल रहा है। महिला सशक्तिकरण कार्यालय में बाबू ने दो अनाथ बच्चों के खाते में 56 हजार रुपए किश्त भेजकर उनसे 36 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। इंदौर लोकायुक्त टीम ने दो बाबुओं को रंगे हांथ दबोच लिया। आरोपी बाबू ने अधिकारियों को जानकारी दी है कि इस योजना में 169 बच्चों लाभ दिया गया है। लंबे समय से गरम कर रहेे जेब सितंबर 2023 से मार्च तक की किश्त नहीं आई थी। अंतिम मार्च में एक साथ बजट जारी हुआ। बच्चों के लिए चार-चार हजार रुपए की दर से 28-28 हजार रुपए की दर से किश्त जारी की गई है। बच्चों की संख्या के आधार पर किश्त का कुल बजट 47.32 लाख होता है। आरोपी बाबुओं ने इस योजना में ही नहीं अन्य योजनाओं में अधिकारियों के नाम पर लंबे समय से जेब गरम कर रहेे हैं। पैसे टेबल पर फेक कर चला गया, मुझे जनवरी में मिला चार्ज कार्रवाई के बाद आरोपी बाबू ने अधिकारियों के पूछताछ में तर्क दिया कि पैसे हाथ में नहीं, टेबल पर फेंक कर चला गया। उस समय वह कुर्सी पर नहीं बैठा था। बाहर सिगरेट पीने बाहर गया था। यह बात मुझे एक अन्य बाबू बताता तो पता चला। बाबू का आरोप है कि मुझे फंसाने शीला और अंकिता नाम की महिला कर्मचारी ने जाल बुना है। मैं तो कार्यालय में आने वाले अनाथ बच्चों का सहयोग करता हूं। मुझे इस शाखा का चार्ज जनवरी 2024 में मिला। इससे पहले राजकुमार साहू इस शाखा को देख रहे थे। उनका स्थानांतरण छिंदवाड़ा हो गया। उनकी जगह हरदा जिले से संजय जगताप ने चार्ज लिया है। ऐसे समझें योजना ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता की मृत्यु किसी कारण से हो गई है। उन बच्चों की देखरेख किसी संस्था या फिर सगे संबंधियों के द्वारा की जा रही है। ऐसे बच्चों को मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत हर माह चार हजार की सहायता मिलती है। इस योजना को दो हिस्से में बांटा गया है। जिन बच्चों के माता-पिता दोनों में से किसी एक की मृत्यु हुई है तो उसे स्पॉन्सरशिप और यदि दोनों की मृत्यु हो गई है तो आफ्टर केयर योजना में शामिल गया है। हर साल रिन्युअल होता है। |
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