पत्रिका अभियान
छतरपुर. अपने परिवार और खुद का भरण-पोषण करने के लिए शहर की सडक़ किनारे 500 से ज्यादा दुकानदार ठेले-गुमटियां लगाते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक ये लोग सडक़ के किनारे ही रहते हैं। दिनभर भारी वाहन सडक़ों से गुजरते हैं। जिससे होने वाली हर समस्या को ये लोग दिन भर सहते और देखते रहते हैं। भारी मालवाहकों से निकलता काला विषैला धुआं, धूल का गुबार, प्रेशर हॉर्न व अन्य संसाधनों से हो रहे ध्वनि प्रदूषण के बीच ही इन दुकानदारों की जिंदगी का आधा समय बीता और बीत रहा है। इन दुकानदारों पर ही सबसे ज्यादा प्रदूषण की मार पड़ रही है। कई वर्षो से समस्या को झेल रहे दुकानदार भी अब ये कहने लगे हैं, कि शहर का बाईपास जल्द बन जाए तो प्रदूषण, जाम से राहत मिले। शहर की सडक़े किसी के खून से लाल न हो। इधर, डॉक्टरों का कहना है कि बड़े वाहनों का प्रदूषण सडक पर ही होता है। प्रदूषण के बीच रहने से ही स्ट्रीट वेंडरों को खांसी,आंखों में जलन सबंधी दिक्कत होती है। ज्यादा लंबे समय से प्रदूषण की मार सह रहे लोगों को श्वांस, फेंफड़े सबंधी बीमारियां भी हो रही है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य को लेकर स्ट्रीट वेंडर भी चाहते हैं, कि बाईपास जल्द से जल्द बन जाए।
ये कहना है डॉक्टरों का
होम्योपैथिक डॉक्टर अब्दुल हकीम का कहना है कि उनके पास आने वाले मरीजों में ऐसे मरीज भी हैं, जो स्ट्रीट वेंडर हैं। दिनभर धुआं-धूल,ध्वनि प्रदूषण के बीच रहते हैं। लंबे समय में इन सब प्रदूषणों का स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। लोगों को सर्दी-खांसी जैसी समस्या वायु प्रदूषण के कारण ही बढ़ी है। वहीं,डॉक्टर हिमांशु बाथम का मानना है कि प्रदूषण के कारण लोगों में स्किन को लेकर भी समस्या हो रही है। जो लोग पूरे समय धूल, धुआं के संपर्क में रहते हैं, उनके शरीर में आंतरिक समस्या के साथ ही बाहरी समस्या भी होती है। डॉक्टर सुदीप जैन का कहना है कि हवा में धुआं, धूल के कण बढऩे से श्वांस संबंधी परेशानी होती है। खासकर बुजुर्ग व बच्चे प्रदूषित वायु के चलते ब्रोनकाइटिस जैसी बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। कुछ लोगों की समस्या बढक़र अस्थमा बन जाता है। एलर्जी के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। जिन्हें धूल व धुआं से एलर्जी हो रही है। डॉ. श्वेता गर्ग का कहना है कि बड़े वाहनों से इतना प्रदूषण शहर में हो रहा है कि मॉर्निंग वॉक में शुद्ध हवा लेने की चाह रखने वालों को शुद्ध हवा नहीं मिल पा रही। सुबह की हवा स्वच्छ मानी जाती है। लेकिन छतरपुर में प्रदूषण के कारण सुबह भी स्वच्छ वायु नहीं रहती।
ये कहना है दुकानदारों का
भारी वाहनों का शहर में प्रवेश न हो, इसके लिए रिंग रोड ही सबसे अच्छा उपाय है। भारी वाहनों के कारण धूल,धुंआ सडक़ किनारे बहुत होता है। शहर में जब सडक़ उखड़ी हो वहां के दुकानदारों का तो जीना मुश्किलहो जाता है।
प्रदीप चौरसिया,दुकानदार
सडक़ के दुकानदारों की स्थिति समझना हो तो शहर के किसी भी मार्ग पर पेड़ों के पत्ते देख लीजिए। धूल और धुएं की स्थिति खुद ही नजर आ जाएगी। इतनी ही धूल और धुआं की मार हर दुकानदार झेल रहा है।
हेमन्त यादव, दुकानदार
शहर में बाईपास जल्द बनना चाहिए, जिससे भारी वाहनों का दवाब शहर की सडक़ों पर से डायवर्ट हो जाए। बड़े वाहनों का शहर में आना न केवल जाम-दुर्घटना का कारण बन रहा है, बल्कि प्रदूषण होने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर हो रहा है।
सुरेन्द्र चौरसिया, दुकानदार
शहर में बड़े वाहन आने से दुर्घटना का संकट बना हुआ है। बाईपास बनाकर बड़े वाहन शहर के बाहर से ही निकालना चाहिए। शहर के अंदर जाम, दुर्घटना रोकने के लिए सरकार को जल्द कुछ करना चाहिए।
वासू साहू, दुकानदार
बड़े-बड़े ट्रक शहर में घुसते हैं, जिससे सडक़ जाम, सडक़ दुर्घटना, वायु प्रदूषण और न जाने कितनी समस्याएं हो रही हैं। सरकार को चाहिए कि जल्द से बाईपास बना दें, जिससे बड़े वाहन शहर से न गुजरे, शहर के बाहर से ही निकल जाए।
सरिता गुप्ता, दुकानदार
शहर में बड़े वाहनों के कारण इतना प्रदूषण है कि सुबह मॉर्निंग वॉक के समय जैसी हवा होती है,वैसी दोपहर और शाम को शहर के किसी भी हिस्से में नहीं रहती। हर समय हवा की क्वालिटी में अंतर अलग समझ आ रहा है।
स्वामी रैकवार,दुकानदार