>>: बारिश ने घटाई बिजली की मांग, चुनावी मौसम में सरकार को राहत

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भोपाल। प्रदेश में मानसून की मेहरबानी ने बिजली समस्या से सरकार के लिए राहत के हालात कर दिए हैं। प्रदेश में करीब डेढ़ हजार मेगावाट बिजली की मांग में कमी आ गई है, जिससे ट्रिपिंग भी बंद कर दी गई है और कोयले की किल्लत से भी फिलहाल मुक्ति मिल गई है। प्रदेश में बिजली का पूरा परिदृश्य फिलहाल बदल गया है। अब थर्मल की बजाए हाइडल प्लांट से उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया गया है। आने वाले दिनों में यदि बारिश इसी तरह बरसती रही, तो हाइडल प्लांट से ही मुख्य उत्पादन किया जाएगा।
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ये थी दिक्कत-
दरअसल, करीब दो महीने से प्रदेश में कोयले की कमी, गर्मी के कारण बिजली की मांग में बढ़ोत्तरी व हाईडल सहित अन्य पॉवर प्लांट से कम उत्पादन के कारण बिजली आपूर्ति की दिक्कत थी। सरप्लस स्टेट होने के बावजूद बिजली आपूर्ति में दिक्कतों के कारण अघोषित कटौती करना पड़ रही थी। गांवों में यह ट्रिपिंग ज्यादा थी। स्थानीय चुनाव के कारण सरकार के लिए इससे मुश्किल स्थिति हो रही थी। लेकिन, अब स्थिति बदली है। पहले प्रदेश में औसत 11000 से 11500 मेगावाट बिजली की मांग चल रही थी। अब यह घटकर सीधे औसत 9500 से 10 हजार मेगावाट हो गई है। इससे आपूर्ति में करीब डेढ़ हजार मेगावाट की राहत मिली है। अभी बारिश बढऩे पर यह मांग और घटैगी। संभावना है कि यह मांग 9 हजार मेगावाट के भीतर ही रहे।
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उत्पादन पैटर्न में भी बदलाव-
बिजली कंपनियों ने मानसून आने के साथ उत्पादन पैटर्न में भी बदलाव किया है। अभी तक सबसे ज्यादा उत्पादन थर्मल बिजली का था, लेकिन अब बारिश के कारण बांधों का जल स्तर फिर बढऩे लगा है। इससे वापस हाइडल उत्पादन शुरू कर दिया गया है। पहले हाइडल उत्पादन डेढ़ हजार मेगावाट व उससे भी नीचे हो गया था, लेकिन अब वापस ढ़ाई से तीन हजार मेगावाट तक हाइडल उत्पादन शुरू कर दिया गया है। वही थर्मल बिजली के उत्पादन में कमी की गई है।
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कोयले का रिजर्व स्टॉक फिर ठीक हालात में-
प्रदेश में 5 लाख टन तक न्यूनतम रिजर्व कोयले का स्टॉक होना अनिवार्य है, लेकिन यह बीते दिनों 2.33 लाख टन से भी नीचे चला गया था। अब यह वापस बढक़र 4 लाख टन से ज्यादा पहुंच गया है। आने वाले दिनों में यह फिर बढक़र निर्धारित स्टॉक लिमिट तक पहुंच जाएगा। नए नियमों के तहत 24 दिन का रिजर्व कोयला होना चाहिए, लेकिन औसतन 15 दिन का कोयला ही रहता है। इसलिए अब यह लिमिट भी 24 दिन तक पहुंचाई जाएगी।
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ऐसा है बिजली का परिदृश्य-
- 9500-10000 मेगावाट तक पहुंची मांग
- 11000-11500 मेगावाट तक थी पहले मांग
- 22500 मेगावाट बिजली उपलब्धता के हैं दावे
- 1500-2000 मेगावाट हाइडल उत्पादन अब बढ़ाया
- 2000 मेगावाट औसत नेशनल ग्रिड से ले रहे बिजली
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