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छिंदवाड़ा। कोरोना इलाज में उपयोग आने वाली सामग्री की बिल राशि में अनियमितता पाए जाने पर परासिया रोड स्थित एक निजी हॉस्पिटल पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने बताया कि एसडीएम छिंदवाड़ा के माध्यम से सीएमएचओ कार्यालय में शिकायतकर्ता नरेश साहू द्वारा कोरोना इलाज दौरान निजी हॉस्पिटल की शिकायत प्राप्त हुई थी। इस शिकायत की जांच के बाद हॉस्पिटल में बिल में वसूली गई फीस में अनियमितता पाई गई। इन अनियमितता के पाए जाने पर मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रुचोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम 1973, नर्सिंग होम एक्ट के तहत 50 हजार का जुर्माना निजी हॉस्पिटल पर अधिरोपित किया गया।
साथ ही अस्पताल के संचालक को चेतावनी दी गई कि यदि भविष्य में कोरोना मरीजों के उपचार में शिकायत प्राप्त होती है तो नर्सिंग होम एक्ट के तहत विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।
इस कार्यालय की जानकारी के अनुसार तीन अन्य निजी कोविड अस्पताल की उपचार संबंधी शिकायतें भी प्राप्त हुई है। शिकायत की जांच प्रक्रिया में है। अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

18 नए संक्रमित, 39 स्वस्थ
कोरोना संक्रमण में शुक्रवार को भी नए मरीज कम दिखाई दिए। केवल 18 नए संक्रमित पाए गए। लगातार दूसरे दिन 39 मरीज स्वस्थ हो गए। प्रशासन ने कोई मौत नहीं होना स्वीकार नहीं किया। जिला अस्पताल में 246 मरीज भर्ती रहे। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार अब तक आरटीपीसीआर टेस्ट में 6170 लोग कोरोना पॉजीटिव पाए गए। इनमें से 5806 स्वस्थ हो गए। अभी तक 118 मरीजों की मौत हो गई। टीकाकरण में 18 प्लस में 8231 व्यक्तियों को दो डोज लग चुके हैं। सभी वर्गो में 176050 को प्रथम डोज और 54784 को दूसरा डोज लग चुका है।

परतला में नौ मृतकों का अंतिम संस्कार
जिला अस्पताल में शुक्रवार को 9 मरीजों ने दम तोड़ दिया। उनका अंतिम संस्कार परतला मोक्षधाम में किया गया। कोरोना संक्रमण घटने से अस्पताल में होने वाली मौतों पर भी ब्रेक लगा है।

छिंदवाड़ा। राज्य शासन द्वारा पातालकोट को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित जरूर किया गया, लेकिन इस क्षेत्र के जंगली पेड़-पौधों एवं जड़ी-बूटियों के पारम्परिक ज्ञान को संरक्षित करने की कोई योजना अब तक नहीं बनाई गई है। विश्व जैव विविधता दिवस 22 मई को जब पूरा जिला अपनी इस प्राकृतिक सम्पदा को याद करेगा तो यह कमी सबसे ज्यादा अखरेगी।
10 जनवरी 2019 के राजपत्र में पातालकोट को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया गया था। राजपत्र की अधिसूचना के मुताबिक पातालकोट पूर्व एवं पश्चिम वन मंडल के अधीन संरक्षित वन क्षेत्र 8367.49 हैक्टेयर में फैला हुआ है। यह स्थल 1700 फीट गहरी घाटी तथा छह मिलियन वर्ष की अनुमानित आयु वाला पारिस्थितिकी एवं दुर्लभ वनस्पति तथा प्राणियों वाला क्षेत्र है। इसमें ब्रायोफा इट्स एवं टेरिडोफ गइटस भी है। इस क्षेत्र के समुदाय विशेषकर भारिया को जंगली पेड़-पौधे एवं जड़ी बूटियों का अनोखा पारम्परिक ज्ञान है जिसका उपयोग वे औषधियां प्रभावी बनाने करते हैं। उस समय राज्य शासन ने राज्य जैव विविधता बोर्ड को इसके विकास का जिम्मा सौंपा था। अभी तक जैव विविधता बोर्ड भोपाल के अधिकारियों ने इस क्षेत्र को संरक्षित करने की कोई प्लानिंग नहीं बनाई है। जबकि इस क्षेत्र के जड़ी-बूटियों और उनके पारम्परिक ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता है।

ये जैव विविधता भी छिंदवाड़ा को रखती है हमेशा आगे
1. जिले के 11.80 लाख हैक्टेयर में से 3.51 लाख हैक्टेयर यानी कुल क्षेत्रफल के 29.73 प्रतिशत हिस्से में जंगल है। ये वन क्षेत्र न केवल पर्यावरण की दृष्टि से शुद्ध ऑक्सीजन, वर्षा जल और औषधियां उपलब्ध कराते हैं बल्कि स्थानीय रहवासियों के लिए रोजगार का भी साधन है।
2. छिंदवाड़ा को पेंच नेशनल पार्क और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच टाइगर के आवागमन का कॉरीडोर माना जाता है। घने और विरले
जंगलों से गुजरते कॉरीडोर में नियमित रूप से टाइगर समेत अन्य वन्य प्राणियों का आवागमन होता है।
3.पातालकोट में गिद्धों का आवास हैं तो वहीं हिरन, सांभर, पेंगोलिन समेत अन्य वन्य प्राणी पाए जाते हैं। अंधा बगुला, सारस, टिटहरी, तोता, कोयल, मोर समेत अन्य पक्षी प्रजातियों को सहज ही देखा जा सकता है।
4. जिले में 53 वानिकी प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें महुआ, तेन्दू, आचार, चिरोटा/चिरायता, कालमेघ,आम, वन तुलसी,बहेड़ा, जामुन, अर्जुन और बीजा आदि शामिल हैं।
5. जल संसाधन में पेंच, कन्हान, जाम, कुलबेहरा समेत अन्य नदियां हैं। इसके अलावा 138 छोटे-बड़े जलाशय हैं। इन पर पूरा जनजीवन निर्भर है।

पातालकोट में मिले थे हजारों साल पुराने जीवाश्म: दो साल पहले 2019 को कोलकाता के भू-वैज्ञानिक भूपेन्द्र सिंह ने पातालकोट में हर्राकछार के नजदीक पत्थर में तब्दील लकडिय़ों के हजारों साल पुराने जीवाश्म की खोज की थी। बाद में प्राकृतिक सौंदर्य के भरपूर जैवविविधता के रहस्य को समेटे इस घाटी की उम्र छह मिलियन वर्ष होने की वैज्ञानिक पुष्टि हुई। वैज्ञानिक सर्वे से यह स्पष्ट हुआ कि ये हजारों साल पुरानी लकडिय़ां है, जिसने पत्थरों की शक्ल ले ली है। ये जुरासिक समय की हो सकती है। इस खोज और अन्वेषण को भी आगे नहीं बढ़ाया गया है।


पातालकोट को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया गया है। इसके अनुरूप जड़ी-बूटियों और पेड़-पौधों के प्राकृतिक ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता है। जिसे हम अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रख सकें।
आरएस कुशवाहा, सेवानिवृत्त एसडीओ वन विभाग

जैव विविधता में पातालकोट का अहम् रोल है। इस क्षेत्र में जड़ी-बूटियों के संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को सहेजने का प्रोजेक्ट बनाकर राज्य शासन को भेजा गया है। इसकी सरकारी मंजूरी आते ही कुछ करना संभव हो पाएगा।
-केके भारद्वाज, सीसीएफ छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा। डेढ़ माह से ज्यादा समय से चल रहे कोरोना कर्फ्यू से छह हजार से ज्यादा गरीब और जरूरतमंद परिवारों का काम धंधा बंद हो गया है और उनके घरों में फांके की नौबत बन आई है। उन्होंने खाद्य विभाग को बिना पात्रता पर्ची अनाज योजना में घोषणा पत्र भी दे दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें अनाज वितरित नहीं किया गया है। इसके आवंटन को लेकर राशन दुकानदारों में भी असमंजस बना हुआ है।
जिले में इस समय करीब 3.40 लाख परिवारों को पात्रता पर्ची से राशन की पात्रता है। इन्हें इस समय अप्रैल से लेकर मई तक तीन माह का एकमुश्त अनाज राज्य शासन की ओर से दिया गया है तो प्रधानमंत्री योजना से दो माह का अतिरिक्त अनाज भी देने की योजना चल रही है। इन दोनों योजनाओं से अलग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिना पात्रता पर्ची वाले परिवारों को भी मुफ्त अनाज देने की घोषणा की है। इस पर जिलेभर के छह हजार परिवारों ने अपना दावा खाद्य आपूर्ति विभाग में घोषणा पत्र में पेश किया है। ये परिवार कफ्र्यू के समय काम धंधा बद होने से परेशान हैं। उनके घरों के चूल्हे मुश्किल से जल पा रहे हैं। ये लोग हर दिन मुफ्त अनाज की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

राशन दुकानों में नहीं आया आवंटन
शहर के राशन दुकानदारों से जानकारी लेने पर पता चला कि बिना पात्रता पर्ची वालों को राशन देने के बारे में न कोई आदेश आया है और ना ही अनाज का आवंटन दिया गया है। इससे दुकानदार भी असमंजस में हैं। उनके पास ऐसे गरीब पूछताछ करने रोज आ रहे हैं।

घोषणा पत्र देने की अंतिम तारीख आज
खा द्य आपूर्ति विभाग के अनुसार बिना पात्रता पर्ची वाले परिवार 22 मई तक अपना घोषणा पत्र वार्ड मोहर्रिर को दे सकते हैं। इस घोषणा पत्र में उनके दावे के आधार पर उन्हें तीन माह का राशन दिया जाएगा। वह भी तब, जब राज्य शासन से उसका आवंटन आएगा। सहायक खाद्य अधिकारी डीके मिश्रा का कहना पड़ा कि जैसे ही आवंटन आएगा, बिना पात्रता पर्ची वाले परिवारों को दिया जाएगा। फिलहाल इसकी तैयारी चल रही है।

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