>>: भोपाल में लड़ी आजादी की लड़ाई, अमरीका में निवास, फिर भी दिल में बसा है हिन्दुस्तान

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भोपाल। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और अमेरिका में ह्दय रोग विशेषज्ञ 89 वर्षीय डॉ. बाहुबल कुमार उर्फ बी कुमार को भारत छोड़े आज करीब 46 साल हो चुके है। उनका परिवार वहां की नागरिकता लेकर बस तो गया है, लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी उनके परिवार ने नहीं छोड़ी है। भारत आज भी उनके दिलों में बसा हुआ है। यहां तक कि वे अपनी बेटी की शादी करने के लिए विशेषतौर पर भोपाल आए।

डॉ. बी कुमार बताते हैं कि मेरी बेटी न्यूरो सर्जन डॉ. स्मिता का विवाह ऑस्ट्रेलिया के युवक से होना था। बेटी ने मुझसे इच्छा जाहिर की कि हम हिंदुस्तान जाकर, हिंदुस्तानी रीति रिवाज के साथ विवाह करेंगे। इसके बाद हमने बेटी का विवाह 2012 में भोपाल के जहांनुमा पैलेस होटल से हमारी भारतीय परंपराओं और रीति रिवाज से ही किया। इसमें 70 विदेशी बाराती बनकर भारत आए थे।

डॉ. बीकुमार का जन्म 1934 में बरेली जिला रायसेन में हुआ था। वहां से अपने दो बड़े भाई बीएल दिवाकर व महेंद्र कुमार जैन के साथ 1946 में बरेली से भोपाल आ गए थे। इनके बड़े भाई बीएल दिवाकर भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। यह तीनों भाई भोपाल में इतवारा स्थित चंद्रभान भवन में रहते थे। वह बताते है कि बड़े भाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बीएल दिवाकर उस समय 'नव प्रभात' अखबार में पत्रकार थे। एक अंग्रेज अफसर के सामने बग्गी में जाते समय तिरंगा फहराने के चलते उनके पीछे पुलिस पड़ी हुई थी। मुझे 1948 में विलीनीकरण आंदोलन में शंकर दयाल शर्मा, उमराव सिंह, गुलाबचंद तामोड, लाल सिंह ठाकुर के साथ जेल में डाल दिया गया था।

जीएमसी के पहले बैच के विद्यार्थी रहे

डॉ. बी कुमार बताते है कि जब मुझे जेल हुई थी, तब मैं मिडिल स्कूल में पढ़ा करता था। उस समय 1952 से 1954 तक यूथ कांग्रेस का प्रेसिडेंट भी रहा। इसी समय अखबार नया समाज में भी काम किया। 1955 में गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रथम बैच का विद्यार्थी बना। यहां से मेडिकल की पढ़ाई 1960 में पूरी की। फिर 1962 से 1966 तक इंडियन मेडिकल काउंसिल का सेक्रेटरी रहा। डॉ कुमार का विवाह 1964 में कुसुम के साथ हुआ। शादी के 12 साल बाद 1976 में विदेश चले गए। उनके परिजन बताते है कि भोपाल के डॉ. एनपी मिश्रा जब भी न्यूयार्क जाते थे तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बी कुमार के घर मिलने जरूर जाते थे।

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