>>: Digest for June 18, 2022

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Table of Contents

शहडोल. बुढ़ार नगर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या को देखते हुए विभाग की ओर से नया पीटीआर मंगाया था। जिससे उसे स्थापित कर विद्युत सप्लाई बहाल की जा सके, लेकिन यह भी आधा-अधूरा मिला है। बुढ़ार उपकेन्द्र में 8 एमवीए (मेगा वोल्ट एम्पीयर) के पीटीआर की जगह महज 5 एमवीए का पीटीआर ही उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में यह महज वैकल्पिक व्यवस्था ही साबित होगा। समस्या का समाधान शायद ही हो। अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण फीडर से लोड डिवाइड कर विद्युत आपूर्ति प्रारंभ कर दी जाएगी लेकिन यह व्यवस्था कितने दिन तक चलेगी ये वे भी नहीं बता पा रहे हंै। इस व्यवस्था से जहां ग्रामीण फीडरों में दबाव बढ़ेगा वहीं 8 की जगह 5 एमवीए का पीटीआर कितने दिन साथ देगा यह कहना भी मुश्किल है। फिलहाल विद्युत विभाग ने देर शाम तक नए पीटीआर को व्यवस्थित कर टेस्टिंग करने के बाद उसे प्रारंभ करने की तैयारी बना ली थी।
चार दिन बाद आपूर्ति
नया पीटीआर लगने से देर शाम बुढ़ार टाउन में चार दिन से बनी ब्लैक आउट की स्थिति से निजात मिल सकी है। इससे पहले उपकेन्द्र बुढ़ार में काफी समय तक विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारी पीटीआर की टेस्टिंग कर विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था में लगे रहे। बताया जा रहा है कि देर शाम टेस्टिंग पूरी होने के बाद विधि विधान से पूजा अर्चना कर विद्युत आपूर्ति शुरु की गई।
जल गया था 8 एमवीए का पीटीआर
बुढ़ार उपकेन्द्र में लगा 8 एमवीए का पीटीआर चार दिन पहले जल गया था। जिसके बाद विद्युत विभाग ने ग्रामीण फीडर से लोड डिवाइड कर टाउन व शासकीय दफ्तरों में विद्युत की आपूर्ति कर रहा था। वहीं पिछले चार दिनो से पूरे क्षेत्र में ब्लैक आउट की स्थिति निर्मित रही। जिसके चलते शहर वासियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। विभाग ने समस्या समाधान के लिए नए पीटीआर की व्यवस्था की थी। विभाग को समुचित विद्युत सप्लाई के लिए 8 एमवीए के पीटीआर की आवश्यकता थी। यहां 8 एमवीए का पीटीआर ही चल पाएगा।
इनका कहना है
8 एमवीए का पीटीआर उपलब्ध नहीं था। यहां तत्काल व्यवस्था बनाना था जिस वजह से फिलहाल 5 एमवीए का पीटीआर लगाकर विद्युत आपूर्ति शुरु कर दी गई हैं।
इजराइल खान, एई, विद्युत विभाग, बुढ़ार।

शुभम सिंह बघेल

शहडोल. जल मिशन योजना से अरबों रुपए खर्च कर भले ही गांव-गांव शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा किया जा रहा है लेकिन गांवों में अभी भी पानी के लिए हर दिन जंग लडऩी पड़ रही है। शहडोल संभाग के आदिवासी इलाकों में ग्रामीणों को दो से तीन किमी पैदल चलने के बाद बाल्टीभर पानी नसीब होता है। सबसे खराब स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों की है। यहां बोर न होने की वजह से दशकों बाद भी पानी की व्यवस्था नहीं बन सकी है। आदिवासी गड्ढे और झिरिया के दूषित पानी से प्यास बुझाने मजबूर हैं। शहडोल-अनूपपुर की सीमा पर पहाड़ी क्षेत्र सरई पयारी गांव के ग्रामीण दशकों से गड्ढों से बूंद-बूंद रिसने वाले पानी से प्यास बुझा रहे हैं। पड़ोस की पंचायत तरंग से पेयजल टंकी बनाकर पानी सप्लाई की योजना बनाई थी लेकिन गांव तक पानी पहुंचाने में विभाग नाकाम रहा है। शहडोल के ब्यौहारी के दाल गांव सहित मंडला व डिंडौरी के दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां गर्मी में पेयजल संकट बड़ा मुद्दा बन जाता है।

धूप में दो किमी का सफर, छानकर पीते हैं पानी
अनूपपुर पयारी गांव के ग्रामीण बताते हैं, धूप में पानी के लिए दो किमी चलना पड़ता है। गड्ढों से निकलने वाले पानी में मवेशी बैठे रहते हैं, उन्हे हटाकर बाल्टीभर पानी मिलता है। दूषित पानी को छानकर पीने की मजबूरी है। एक दशक से ज्यादा समय से गांव में पेयजल संकट है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पुष्पराजगढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित, गड्ढे से निकाल रहे पानी
पुष्पराजगढ़ भीषण गर्मी में पेयजल की समस्या से सबसे प्रभावित है। जहां बोदा में स्थानीय ग्रामीणों को तालाब, नदी या हैंडपंप का पानी नहीं, बल्कि गड्ढे की खुदाई कर गंदे पानी से प्यास बुझाने मजबूर हैं। छिंदी टोला में 12 घरों में 48-50 सदस्यों की आबादी रहती है। यहां ग्रामीण गड्ढों के पानी से प्यास बुझा रहे हैं। हाल ही में एक हैंडपंप लगाया गया है लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

22 बहु ग्राम योजनाओं को मंजूरी, इस वर्ष जारी किए 5117 करोड़
ग्रामीण आबादी को नल से जल कनेक्शन देने के लिए 22 बहु-ग्राम योजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इन योजनाओं को प्रदेश के रीवा, सतना, सीहोर, सीधी, अलीराजपुर, बड़वानी, जबलपुर, पन्ना, मंडला, सागर, कटनी, धार, श्योपुर, उमरिया और खरगोन में शुरू की गई है। प्रदेश के 9240 गांवों के ग्रामीणों को इसका लाभ मिलेगा। 2023 तक सभी ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से पेयजल सप्लाई करना है। वर्ष 2021-22 में मध्यप्रदेश के लिए 5,117 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 2,558 करोड़ रुपए 'हर घर जल' कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए मध्य प्रदेश को पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं।

सरकारी दावा: पहले 11 प्रतिशत आपूर्ति, अब 40 फीसदी से ज्यादा का दावा
भले ही ग्रामीण आबादी को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा हो लेकिन सरकारी दावे लाखों घरों तक कनेक्शन पहुंचाने का है। रेकार्ड के अनुसार, 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन के शुभारंभ के समय मप्र में 13.53 लाख (11 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल से पेयजल की सप्लाई होती थी। लॉकडाउन की वजह से काम की रफ्तार कम हुई। हालांकि मप्र में 31.63 लाख (25.8 प्रतिशत) घरों में नल के पानी के कनेक्शन दिए गए। वर्तमान में 1.22 करोड़ ग्रामीण परिवारों में 45.16 लाख (36.93 प्रतिशत) के घर तक नल कनेक्शन दिया जा चुका है। 2021-22 में 22 लाख घरों तक कलेक्शन देने का लक्ष्य था।
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पानी के लिए हर रोज पैदल चलना पड़ता है। मजदूरी से ज्यादा जरूरी काम पेयजल हो गया है। गड्ढों से पानी लाते हैं। पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है।
श्यामकली, ग्रामीण

अधिकारी और जनप्रतिनिधि आते हैं, आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव में दशकों बाद भी पानी की व्यवस्था नहीं बन सकी है। बोर से भी पानी नहीं मिलता है। गड्ढों का दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
मंगलीबाई, ग्रामीण

गडढें से सिर्फ बाल्टीभर पानी मिल पाता है। घर पहुंचते-पहुंचते प्यास इतनी लग जाती है कि पानी खत्म हो जाता है। इस उम्र में भी पानी के लिए डिब्बे और बाल्टी लेकर पैदल कई किमी चलना पड़ रहा है।
धन्नूलाल बैगा, ग्रामीण
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जल मिशन से गांव-गांव पेयजल पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की समस्या है, यहां बोर कराकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी। अधिकारियों की टीम भेजेंगे।
राजीव शर्मा, कमिश्नर
संभाग- शहडोल

शहडोल. रक्तदान के क्षेत्र में 14 वर्षो से काम कर रही श्रीराम रक्तदान समिति ने अब तक करीब 5300 से अधिक जरूरतमंदो को खून देकर परोपकार किया है। नगर के साथ-साथ आसपास के जिलो में भी समिति के सदस्य सक्रिय भूमिका निभाते है। समिति के सक्रिय कार्यकर्ता सोशल मीडिया में करीब 150 से 200 लोगों का ग्रुप बनाया है। जहां जरूरतमंदो को खून की आवश्यकता की सूचना मिलने पर कार्यकर्ता मौके पर पहुंचकर रक्तदान करते है। श्रीराम रक्तदान समिति के संयोजक सिल्लू रजक ने बताया है कि शिकलसेल, थैलेसीमिया, एक्सीडेंट व प्रसूताओं को रक्त की कमी की सूचना मिलने पर तत्काल खून की व्यवस्था बनाई जाती है। नगर के साथ ही जबलपुर, बिलासपुर व रीवा से भी जरूरतमंदो का फोन आता है । सूचना मिलने पर उस क्षेत्र के सदस्यों को भेजकर खून की व्यवस्था बनाई जाती है। श्रीराम रक्तदान समिति रक्तदान के अलावा गौसेवा के लिए भी तत्पर काम कर रही है । गौवंश किसी मुसीबत पर होने की सूचना मिलते ही सदस्यों के माध्यम से बचाव कार्य किया जाता है। समिति में डॉक्टर, व्यापारी व युवा पीढ़ी जुड़कर लोगों के मदद के लिए आगे आ रहे है ।
रक्तदाताओं का हुआ सम्मान
जिला चिकित्सालय में बुधवार को रक्तदाताओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें ब्लड बैंक प्रबंधन ने रक्तदान कर दूसरों की जान बचाने वाले विभिन्न संगठनों, समितियों के साथ ही ब्लड पहुंच कर स्वयं से रक्तदान करने वालों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आर एस पाण्डेय, सिविल सर्जन डॉ जी एस परिहार, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ सुधा नामदेव, समाज सेवी रुपाली सिंघई, अजय बिजरा, सुशील छाबड़ा के साथ ब्लड बैंक का स्टॉफ के साथ ही बड़ी तादाद में रक्तदाता उपस्थित रहे। इस दौरान भारत विकास परिषद, रोटरी क्लब, मोजर वेयर, आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेज, निरंकारी मिशन, जैन समाज, विधिक सेवा प्राधिकरण, पूज्य सिंधी समाज बुढ़ार, जय हो संस्था, विराट परिवहन संघ, हरे माधव बुढ़ार, अग्रवाल समाज सहित अन्य सामाजिक संगठनों व रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र व शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।

शहडोल. नगर की सड़कों से कोयला लोड भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है। जिसके चलते सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है साथ ही भारी वाहनों की धमाचौकड़ी से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इन भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाये जाने की मांग को लेकर नपा उपाध्यक्ष कुलदीप निगम के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमित तिवारी को ज्ञापन सौंपा है। इसमें कहा गया है कि यदि 8 दिनों के अंदर व्यवस्था में परिवर्तन नहीं किया जाता है तो कांग्रेस पार्षद एवं आमजन गाडियां रोकेंगे एवं कॉलरी के सामने धरना प्रदर्शन करने बाध्य होंगे। ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया है कि कॉलरी खुल जाने के बाद से लगातार 16 चका, 20 चका कोयला लोडेड गाडियां रात्रि के समय पुरानी बस्ती वार्ड नं 36-37, अण्डरब्रिज वार्ड नं 10, बसंत नगर, कोतवाली, स्टेडियम होते हुए कलेक्ट्रेट रोड से सैकडों गाडियां निकलती हैं। इन कोयला लोड वाहनों के निकलने की वजह से उडने वाली डस्ट घरों तक प्रवेश करती है। जिस वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं। इन गाडियों के निकलने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। साथ ही भारी वाहनों के आवागमन की वजह से नगर की सडकें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। जिसे देखते हुए इन भारी वाहनों के आवागमन के लिए बाईपास रोड तय किया जाए और इनके आबादी क्षेत्र के अंदर से निकलने में प्रतिबंध लगाया जाए। कांग्रेस पार्षदों ने कहा है कि उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया तो वह उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। नगर वासियों में भी भारी वाहनों के प्रवेश को लेकर आक्रोश है।

शहडोल. भीषण गर्मी से जहां जनजीवन प्रभावित है। वहीं सब्जियों के दाम से भी लोगों के पसीने छूट रहे हैं। इस समय टमाटर जहां 80 रुपए किलो मिल रहा है, वहीं शिमला मिर्च 100 रुपए प्रति किलो है। लौकी और भिंडी को छोड़कर अन्य सब्जियों के दाम में 40 से 60 रुपए के बीच में हैं। पिछले करीब एक सप्ताह से लगातार कीमतों में इजाफा हो रहा है। एक सप्ताह पहले तक शहडोल मंडी में टमाटर 40 से 60 रुपए किलो बिक रहा था। वहीं परवल, करेला के दाम भी 50 रुपए थे। प्याज 10 से 15 रुपए, जबकि आलू 20 रुपए किलो मिल रहा था। वर्तमान में टमाटर जहां 80 रुपए हो गया है। वहीं परवल, करेला 60 रुपए, प्याज 20 रुपए और आलू 25 रुपए किलो बिक रहा है। सब्जी की बढ़ रही कीमतों से लोगों के थाली का जायका बिगड़ गया है। पहले छोलाभर सब्जी घर ले जाने वाले लोग अब आधा किलो और एक पाव सब्जी से काम चला रहे हैं।
पेट्रोल का दाम भी कारण
सब्जी कारोबारियों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें भी सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी का कारण है। पहले जबलपुर से सब्जी की गाड़ी 5 हजार रुपए में आ जाती थी। अब सात से आठ हजार रुपए लग जाते हैं। खर्च बढऩे पर उसका असर सामान पर पड़ता ही है। सब्जी के साथ-साथ अन्य सामान के दाम भी ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढऩे के कारण बढ़ रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि आने वाले एक सप्ताह तक सब्जी के इसी तरह के भाव रहेंगे। टमाटर की कीमतों में फिलहाल नरमी आने की संभावना नहीं है। बारिश के बाद लोकल सब्जी की आवक बढऩे से कीमतों में कमी ओ की संभावना है।
4-5 किलो हो जाता है खराब
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि सब्जी के दाम बढऩे का प्रमुख कारण गर्मी है। गर्मी में सब्जियां खराब हो रही हैं। वहीं इस समय लोकल सब्जियां भी कम निकल रही हैं। सब्जी के थोक व फुटकर विक्रेता मो. आमिर ने बताया कि लोकल टमाटर बहुत ही कम आ रहा है। एक कैरेट में 24 से 25 किलो टमाटर रहता है। इसमें भी पांच से सात किलो खराब निकलता है। पांच किलो भी खराब निकला तो 250 से अधिक का नुकसान हो जाता है, यही कारण है कि रेट बढ़ गए हैं। वर्तमान में लौकी और भिंडी ही लोकल से निकल रही है, इसलिए इसके दाम कम हैं। अधिकांश सब्जियां बिलासपुर, जबलपुर, अनूपपुर से आलू इलाहाबाद से और प्याज सतना से आती है।
इनका कहना है
बढ़ती महंगाई से पहले ही बुरा हाल है। सब्जियों के बढ़े दाम से दो वक्त का खाना भी मुश्किल हो गया है। टमाटर का दाम तो कम हो ही नहीं रहा है।
निशा पाठक, गृहिणी।
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पिछले 15 दिनों से सब्जियों के दाम में कोई गिरावट नहीं आई है। टमाटर सबसे महंगा चल रहा है। वहीं अब आलू भी 25 रुपए किलो हो गया है।
उर्मिला सोनवानी, गृहिणी।

शहडोल. मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा होते ही प्रत्याशियों और दावेदारों द्वारा जीत दर्ज कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, कहीं जीत के लिए नींबू मिर्ची कट रहे हैं, तो कहीं पर प्रत्याशी मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों में भी अपनी अर्जी लगाने पहुंच रहे हैं, हैरानी की बात तो यह है कि जहां अधिकतर उम्मीद्वार खुद की जीत के लिए हर जगह मत्था टेकने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, वहीं कुछ उम्मीद्वार ऐसे भी हैं, जो दूसरों को हार के लिए भी षडयंत्र रचने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से सामने आया है।

चुनाव से पहले श्मशान घाट में तंत्र विद्या, पुलिस से शिकायत
शहडाले जिले के धनपुरी में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर उम्मीदवारों में घमासान मचा हुआ है। उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क करना शुरू कर दिया है। इसी बीच एक तंत्र विद्या का मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता अजय शर्मा ने पुलिस को बताया कि श्मशान घाट में एक व्यक्ति ने छह उम्मीदवारों की फोटो,नींबू व चाकू रखकर तंत्र क्रिया कर रहा था। क्षेत्र में जैसे ही तंत्र क्रिया की खबर लोगों की बीच पहुंची तो चर्चा का विषय बन गया। वहीं शिकायत के आधार पर पुलिस जांच में जुटी हुई है। बताया गया कि ऐसे 5 कैंडिडेट्स है जिनकी फोटो में सिंदूर लगाकर नींबू, व नारियल जैसी अन्य चीजों को रखकर श्मशान घाट में फेंक दिया, जिसमे दो प्रमुख पार्टियों के अलावा निर्दलीय कैंडिडेट्स शामिल है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है।

चुनाव जीतने के लिए जोड़-तोड़ शुरू

नगरीय चुनावों में अपनी जीत दर्ज कराने के लिए प्रत्याशियों ने वे सभी कर्म करना शुरू कर दिए हैं, जिनसे उन्हें जीत हासिल होने की उम्मीद है। प्रत्याशी अब उन लोगों के भी हाथ जोड़ते नजर आ रहे हैं, जिनसे वे कभी मिले भी नहीं हैं, सोशल मीडिया पर अब प्रत्याशियों के जन सम्पर्क, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे जाने के फोटो वायरल होने लगे हैं, अब प्रत्याशी घर से बाहर निकलने पर भी ईश्वर की आराधना कर रहे हैं, वहीं कोई दही खाकर निकल रहा है, तो कोई मुहं मीठा कर बाहर निकल रहे हैं, इस समय प्रत्याशियों की पूरी तरह नींद उड़ चुकी है। वे देर रात तक चुनाव जीतने के जोड़ तोड़ में लगे हैं।

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प्रत्याशियों के नाम पर कटने लगे नींबू, मिर्ची और श्मशानों में हो रहे तंत्र-मंत्र

मंदिरों में हो रही पूजा अर्चना
चुनाव आते ही प्रत्याशियों द्वारा मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की जा रही है, इसी के चलते मध्यप्रदेश के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी प्रत्याशियों द्वारा खुद की जीत के लिए पंडितों के कहे अनुसार पूजा अर्चना करवाई जा रही है, वे अपने चुनाव चिन्ह और नाम के पर्चे भी मंदिर में रखकर पूजा अर्चना करवा रहे हैं।

शहडोल. स्कूलों का नया शिक्षण सत्र 17 जून से प्रारंभ हो रहा है। रुचिकर भोज के साथ प्रवेशोत्सव मनाया जाएगा। जून में विद्यार्थियों के प्रवेश विभिन्न योजनाओं हेतु पात्रता का निर्धारण एवं सत्र की अन्य प्रारंभिक तैयारियां पूर्ण करने के साथ विद्यार्थियों में विज्ञान, गणित एवं भाषा विषय की कठिन अवधारणाओं का अभ्यास कराया जाएगा। ताकि जून से पाठ्यक्रम अनुसार पढ़ाई में कोई कठिनाई न हो। स्कूल चले हम अभियान तीन चरणों में संचालित किया जाएगा। प्रथम चरण 17 जून से 31 जुलाई तक संचालित किया जाएगा जिसमें जिला एवं विकासखंड स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्राथमिक माध्यमिक हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी में 17 जून को शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की बैठक का आयोजन किया जाएगा जिसमें उपस्थित सदस्यों को अप्रैल माह में छात्रों के नामांकन उपस्थिति छात्रों की उपलब्धि स्तर तथा शासन की ओर से समय-समय पर जारी नवीन शैक्षणिक निर्देश के साथ अध्ययन-अध्यापन की प्रस्तावित कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। शुक्रवार को प्रत्येक विद्यालयों में प्रवेशोत्सव मनाया जाएगा जिसमें विशेष मध्यान भोजन का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों का प्रवेश 17 जून से आरंभ किया जाएगा। इसके अंतर्गत अकादमिक सत्र 2022-23 में कक्षा 1 से 4 तक अध्ययनरत छात्रों को कक्षा 2 से 5 एवं 6 से 7 में अध्ययन बच्चों को कक्षा सात से आठ में प्रवेश दिया जाएगा। कक्षा 5 एवं 8 में अध्ययनरत बच्चों को कक्षा 6 तथा कक्षा 9 में प्रवेश दिया जाएगा कक्षा 9 से 11 तक अध्ययनरत छात्रों को कक्षा 10 से 12 में प्रवेश दिया जाएगा।
छात्रावासों में प्रवेश
शासन के नियमानुसार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एवं समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित छात्रावासों में कक्षा 6 से 8 तक एवं कक्षा 6 से 12 तक स्वीकृत संख्या बालक-बालिका के अनुसार छात्रावासों में प्रवेश दिलाए जाएगें। कक्षा 8 उत्तीर्ण बालिकाओं को समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित निकट के बालिका छात्रावास अथवा जनजाति कार्य विभाग के छात्रावासों में दर्ज कराए जाएंगे।
स्कूलों में हुई साफ-सफाई
नए सत्र की शुरुआत को लेकर स्कूलों की साफ-सफाई के साथ ही रंगरोगन का कार्य कराया गया है। अधिकांश स्कूलों में शिक्षा समिति के माध्यम से कार्य किया गया है। नए सत्र की शुरुआत को लेकर बच्चों में भी उत्साह देखा जा रहा है। बाजारों में स्कूल सामग्री के साथ ही यूनिफार्म की मांग बढ़ गई है। प्राइवेट स्कूलों में भी अभिवावक पहुंच कर एडमीशन कराने की प्रक्रिया पूर्ण कर रहे है।

शहडोल. बुढ़ार नगर में नया पीटीआर लगने के बाद भी बिजली सप्लाई सुचारू नहीं हुई है। बुधवार को लगातार पांचवें दिन आधे से अधिक शहर में बिजली नहीं रही। इस भीषण गर्मी में बिना बिजली एक-एक मिनट लोगों के लिए मुसीबत भरे रहे। बुढ़ार उप जेल भी पूरी रात सप्लाई बंद रही। टॉर्च के भरोसे पहरेदारी होती रही।
बुढ़ार टाउन में पीटीआर खराब होने के कारण पांच दिनों से बिजली सप्लाई प्रभावित है। बुधवार को 5 एमवीए का नया पीटीआर (पॉवर ट्रांसफार्मर) लगा कर विद्युत आपूर्ति शुरू की गई, लेकिन कुछ समय के बाद फाल्ट आना शुरू हो गया। इसके चलते आधे शहर में फिर अंधेरा छा गया। विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण उप जेल में भी बिजली बंद रही। जेल प्रबंधन द्वारा सितंबर 2019 में विद्युत वितरण कंपनी में 9 लाख जमा कराने के बाद जेल का फीडर अलग किया गया था, लेकिन बीते पांच दिनों से इसेे ग्रामीण फीडर से जोड़ दिया गया था। इस कारण बिजली ट्रिप होने लगी। जेल अधिक्षक की मानें तो बुधवार को रात भर जेल में बिजली आपूर्ति बंद रही। सुबह भी बिजली नहीं आई तो शिकायत की गई, इसके बाद जेल फीडर को
अलग किया।
पूरे जिले में बढ़ रही समस्या
बुढ़ार में 12 जून से बिजली सप्लाई बंद है। 12 जून को अचानक उपकेन्द्र में लगा 8 एमवीए का पीटीआर जल गया था। 8 एमवीए का पीटीआर नहीं मिलने पर बुधवार को 5 एमवीए का पीटीआर लगाया गया, लेकिन लोड अधिक होने के कारण कुछ समय बाद ही फाल्ट आने लगे। बिजली कंपनी ने इसमें सुधार भी नहीं करवाया और रात भर आधे शहर की बिजली बंद रही। इधर शहडोल शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजाना आधी रात के बाद बिजली की समस्या शुरू हो जाती है। बुधवार व गुरुवार की दरम्यानी रात नगर के गुरूनानक चौक सहित घरौला मोहल्ला में रात करीब 11 बजे बिजली गुल हो गई। वहीं ग्रीमीण क्षेत्रों में रात होते ही ट्रिपिंग की समस्या शुरू हो जाती है।
इनका कहना है।
बुढ़ार में पावर ट्रांसफार्मर लगाने के बाद बिजली आपूर्ति शुरू हो गई है। रात को 11 केवी लाइन में खराबी आने से कुछ क्षेत्रों में लाइट बंद थी। विभाग के कर्मचारी सुधार कार्य में लगे थे।
डीएन चौकीकर, एसई, विद्युत वितरण कंपनी।
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कुछ क्षेत्रों का लोड मैनेज किया गया है। पीटीआर चेंज होने के बाद बुढ़ार में लाइट की समस्या खत्म हो गई है। इन्द्रा चौक के आगे एलटी लाइन के टूट जाने से रात को कुछ समय के लिए लाइट बंद थी।
आरसी पटेल, डीई, शहडोल।

शहडोल/धनपुरी. शहर की सड़कें पहले से ही लोगों के लिए समस्या का कारण बनी हुई थी। बारिश में अब समस्या और बढ़ जाएगी। कोयलांचल का संजय नगर रोड पर चलना पहले से ही कष्टदायी था अब बारिश में यह सड़क पूरी तरह से कीचड़ में तब्दील हो जाएगी। पिछले दिनों हुई बारिश के कारण 1 किलोमीटर की यह सड़क पूरी तरह से कीचड़ में बदल गई है। सड़क का हाल तो ऐसा नजर आता है जैसे यह सड़क नहीं बल्कि कोई मैदान हो। 7 साल से अधिक समय बीत चुका है सड़क निर्माण की मांग सालों से की जा रही है लेकिन इसके बाद भी सड़क निर्माण को लेकर जिम्मेदारों ने अपनी आंख में पट्टी बांध रखी है।
हजारों लोग हर दिन करते हैं आवागमन
इस सड़क से हजारों की संख्या में प्रतिदिन लोग आवागमन करते हैं फिर भी इसके सुधार को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। लोगों का कहना है कि यह सड़क पहले से ही समस्या का कारण थी और बारिश में इस पर चलना और कष्टदायी हो जाएगा। सड़क में मिट्टी होने के कारण एक किलोमीटर तक की पूरी सड़क में कीचड़ फैल जाता है जिससे दुर्घटनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। लोगों का यह तक कहना है कि प्रबंधन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना इस सड़क के कारण न हो जाए तब तक प्रबंधन इस ओर कोई ध्यान नहीं देगा। संजय नगर गेट के पास कीचड़ से सनी इस सड़क पर पैदल चलना भी काफी मुश्किलों भरा होता है। सालों पहले कोयला खदान खोलने के कारण मुख्य मार्ग को बंद करके इस नए मार्ग को शुरु कराया गया था। तब यह बात कही गई थी कि जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण कराया जाएगा लेकिन सड़क में मुरम डालकर खानापूर्ति कर ली गई।
सड़क पर बने जानलेवा गड्ढे
इसी तरह अमलाई ओपन कास्ट से होकर अमरकंटक की ओर जाने वाली सड़क दिन प्रतिदिन जर्जर होती जा रही है। इस मार्ग पर जानलेवा गड्ढे नजर आने लगे हैं। इस मार्ग से भी आवागमन करने में लोगों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के कारण समस्याओं में और भी इजाफा होता हुआ नजर आ रहा है। इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बड़े वाहनों के साथ लोगों का आवागमन होता है। वहीं दूसरी तरफ खदानों की सड़कों के परखच्चे उड़ गए और इनमें आवागमन करना आसान नहीं है। अमलाई ओपन कास्ट गेट से लेकर सवएरिया कार्यालय तक कि सड़क भी पिछले दिनों हुई बारिश के कारण कीचड़ में तब्दील हो गई। बरसात से पहले इस सड़क निर्माण कराने की मांग की जा रही थी लेकिन सिविल विभाग की उदासीनता के कारण इसका निर्माण नहीं हो सका जबकि सड़क का टेंडर हो चुका था और अगर समय रहते इसका निर्माण करा दिया गया होता तो इस बरसात में लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

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