>>: Digest for August 22, 2021

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Table of Contents

भोपाल. कोरोना काल में प्रदेश के हजारों लोगों ने अपनों को खोया। इस महामारी से माता-पिता की मृत्यु होन से मप्र के 963 बच्चे अनाथ हुए। ऐसे में राज्य सरकार अब इन बच्चों के पालक की भूमिका निभाएगी। वह उनके पालन-पोषण के साथ ही शिक्षा सहित अन्य खर्च उठाएगी। इसी क्रम में सरकार ऐसे 780 बच्चों को 39 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दे चुकी है, वहीं 25 जिलों के 183 अनाथ बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें राहत राशि का इंतजार है। इधर, सरकार कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर अलर्ट है। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए बाल आयोग सक्रिय है। महिला एवं बाल विकास को जिम्मेदारी दी गई है कि वे बच्चों के संपर्क में रहें। जरूरत पडऩे पर उन्हें मदद पहुंचाई जा सके।
बच्चों को हक दिलाने प्रयास शुरू
प्रदेश में कई अनाथ बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता लाखों रुपए की अचल संपत्ति छोड़ गए हैं। आशंका है कि इस पर उनके रिश्तेदार या अन्य लोग संपत्ति हड़प न लें। सरकार ऐसे बच्चों के संबंधियों से संपर्क में है। यदि वे चाहें तो सरकार की निगरानी में इन बच्चों को अपने पास रख सकते हैं।
इन बच्चों को सहायता का इंतजार
सहायता राशि के इंतजार में सर्वाधिक 24 बच्चे जबलपुर के हैं। भोपाल के 12, खंडवा के 17 और इतने ही रतलाम के अनाथ बच्चे हैं। शाजापुर और होशंगाबाद जिले के 11-11 और शेष जिलों में ऐसे बच्चों की संख्या दस से कम है।
5000 रुपए प्रतिमाह पेंशन देगी सरकार
राज्य सरकार ने तय किया है कि जिस परिवार से पिता या कमाने वाले मुखिया का साया उठ गया है, उसे पांच हजार रुपए प्रतिमाह की पेंशन दी जाएगी। बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा का प्रबंध और राशन भी सरकार देगी। यदि किसी परिवार का सदस्या काम-धंधा करना चाहता है तो सरकार की गारंटी पर उसे बिना ब्याज का कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।

टॉप टेन जिले
अनाथ हुए बच्चों के मामले में टॉप-10 जिले
जिला---------अनाथ बच्चे
देवास---------- 50
बालाघाट------ 46
जबलपुर-------44
खंडवा-------42
ग्वालियर------40
होशंगाबाद---- 39
छिंदवाड़ा----- 38
रतलाम------- 37
इंदौर------- 36
भोपाल------ 36

भोपाल. मानसूनी गतिविधियों को बढ़ाने वाला कम दबाव का क्षेत्र प्रदेश के मुहाने पर पहुंचते-पहुंचते ही कमजोर हो गया है। यह सिस्टम शुक्रवार को कम दबाव के क्षेत्र से ऊपरी हवा के चक्रवात में बदल गया। यह उत्तर पूर्वी मप्र को पार कर चुका है जोकि शनिवार तक प्रदेश के उत्तर पश्चिमी हिस्से या इससे सटे उत्तर प्रदेश में पहुंच सकता है। सिस्टम के प्रदेश में आने से शुक्रवार को भी कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां हुई लेकिन अब धीरे-धीरे इनके कम होने का अनुमान है, अगले दो दिनों में बारिश कम होती जाएगी, जिसके बाद मौसम शुष्क होने लगेगा।
कई हिस्सों में अच्छी बारिश मिलने के बीच लम्बी समयावधि में मानसूनी बारिश सामान्य स्थिति में आ गई है। प्रदेश में शुक्रवार तक 664.6 मिमी बारिश दर्ज की गई जबकि 20 अगस्त तक बारिश का सामान्य स्तर 659.6 मिमी का है, इस तरह बारिश सामान्य से अधिक रही।

प्रदेश में शुक्रवार सुबह तक बीते 24 घंटों में रतलाम में तीन इंच, सतना में दो इंच, खंडवा और रायसेन में ढा़ई -ढ़ाई इंच, बैतूल, होशंागाबाद में लगभग एक इंच, भोपाल में आधा इंच बारिश हुई। इसके अलावा एक दर्जन शहरों में दो से पांच मिमी बारिश दर्ज हुई।
इसी क्रम में दिन में भी बारिश जारी रही और शुक्रवार शाम तक सतना, बालाघाट में लगभग पौने दो इंच, सागर, खंडवा में डेढ़ इंच, इंदौर, नौगांव में आधा इंच तो भोपाल रीवा में सात-सात मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं कई शहरों में एक से पांच मिमी बारिश हुई।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सिस्टम कमजोर होकर ऊपरी भाग का चक्रवात बन चुका है, वहीं मानसून द्रोणिका इस समय प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है जो सामान्य से दक्षिण की ओर है, इससे नमी आती रहेगी, जिससे एक दो दिनों तक मानसूनी वर्षा होते रहने का अनुमान है, लेकिन सिस्टम के कमजोर होने के साथ मानसून द्रोणिका के ऊपर जाते जाने और धीरे-धीरे हिमालय की तराई की ओर जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही बारिश में भी कमी आती जाएगी।

भोपाल. प्रदेश में पहुंच चुके सिस्टम के असर से कई हिस्सों सहित शहर में पिछले दो दिनों में शहर को मध्यम बारिश मिली है। शहर में शुक्रवार सुबह तक बीते 24 घंटों में लगभग आधा इंच तो शुक्रवार दिन भर में सात मिमी बारिश दर्ज हो गई। इन बौछारों के चलते तापमान में भी गिरावट आई है। रात का तापमान 22.4 डिग्री तक गिर गया जोकि सीजन का सबसे कम तापमान रहा।

लगातार बौछारों के चलते न्यूनतम तापमान गुरुवार की अपेक्षा आधा डिग्री और गिरकर 22.4 डिग्री दर्ज हुआ जोकि सामान्य स्तर पर रहा। वहीं दिन भर भी बादल छाए रहे और रुक-रुककर बौछारें पड़ी जिससे दिन का तापमान27.5 डिग्री दर्ज किया गया जोकि सामान्य स्तर से 1.1 डिग्री कम रहा।

शहर में अब तक 657.4 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है जोकि सामान्य स्तर से 83.6 मिमी कम है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में जिले में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पडऩे का अनुमान व्यक्त किया है। इस बीच मानसूनी सिस्टम कमजोर होता जाएगा, जिससे अगले 24 से 48 घंटों बाद मानसूनी गतिविधियां कम होने का अनुमान है।

भोपाल.उच्च शिक्षा विभाग एनसीटीई के पाठ्यक्रम में भी एडमिशन के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित कर रहा है। शारीरिक शिक्षा से संबंधित कोर्स एमपीएड के लिए तैयार मेरिट लिस्ट पर राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी आशा चौधरी ने सवाल खड़े किए हैं। इस खिलाड़ी ने आरोप लगाए हैं कि उसे मिले प्रमाणपत्रों के अंक नहीं दिए गए। दस्तावेजों का सत्यापन कराने और फिजिकल फिटनेस टेस्ट देने के बाद भी उसे सीट आवंटित नहीं की गई। जीरो अंक दिया गया। जबकि उसे मेरिट में पहला स्थान मिलना था।

आशा चौधरी एथेलेटिक्स लांग डिस्टेंस क्रॉस कंट्री रनर हैं। सीनियर नेशनल खिलाड़ी हैं। एथेलेटिक्स लांग डिस्टेंस क्रॉस कंट्री रनर हैं। सीनियर नेशनल स्तर पर खेल चुकी हैं। एनआईएस क्वालिफाइड कोच हैं। लेवल वन क्वालिफाइड कोच हैं। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से बीपीएड की छात्रा हैं। आशा का आरोप है कि उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। इस मामले में एमवीएम में क्रीड़ा अधिकारी डॉ.सीएस धाकड़ से बात की गई तो उनका कहना है कि जिस अधिकारी ने दस्तावेजों का सत्यापन किया है, वहीं से एडमिशन पोर्टल पर अंक दर्ज नहीं हुए होंगे। वहीं इन्होंने संजय बचले से बात कर आपत्ति दर्ज कराई तो उन्होंने दूसरे चरण की काउंसलिंग में शामिल होने का सुझाव दिया है। इसको लेकर छात्रा और उनके बीच हुई चर्चा के ऑडियो वायरल हो रहे हैं।

सीट आवंटन से पहले कॉमन मेरिट लिस्ट जारी करने कोई मतलब नहीं --

उच्च शिक्षा विभाग एनसीटीई के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीट आवंटन से पहले कॉमन मेरिट लिस्ट जारी करता है। लेकिन इसका कोई मतलब नहीं निकल रहा है। छात्रा ने कॉमन मेरिट लिस्ट जारी होते ही आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन उसमें सुधार नहीं किया गया । जबकि यह सुधार पहले होता तो उसे भी सीट आवंटित हो सकती थी।

एमपीएड में है 235 सीट --
एमपीएड 8 कॉलेजों सहित यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट में संचालित होता है। इसमें सिर्फ 235 सीट हैं। इसके लिए पहले राउंड में ही करीब 510 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया। इसमें से लगभग 469 ने च्वॉइस लॉक की और 399 ने सत्यापन कराया। इनमें से 214 को सीट आवंटित की गई। इसमें फीस जमा करने की अंतिम तारीख निकल चुकी है।

वर्जन...
हमारी ओर से कोई खामी नहीं हुई है। इस बार मेरे बेटे ने खुद एमपीएड में एडमिशन लेने के लिए आवेदन किया था। इसलिए मैने इस प्रक्रिया से अपने आपको दूर रखा। एक सीनियर के नाते मैंने मार्गदर्शन जरूर दिया। छात्रा को उसकी योग्यता के अनुसार अंक जरूर दिए गए होंगे। पोर्टल पर अंक दर्ज कैसे नहीं हुए। इसे दिखवाना पड़ेगा। यह हमारा कार्य नहीं था।

- डॉ. सीएस धाकड़, क्रीड़ा अधिकारी, एमवीएम

वर्जन...

अभी हमको इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। शिकायत प्राप्त होती है तो इस मामले की जांच कराई जाएगी। छात्रा के साथ अन्याय नहीं होगा।
डॉ.धीरेंद्र शुक्ल, ओएसडी, उच्च शिक्षा

भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग ने ई-प्रवेश प्रक्रिया के तहत बीए,बीएससी,बीकॉम के पहले वर्ष में एडमिशन के लिए शुक्रवार को 2 लाख 70 हजार 132 विद्यार्थियों को सीट आवंटन पत्र जारी कर दिए हैं। यह आवंटन पहले चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग के अंतर्गत किए गए हैं। लेकिन सत्र 2021-22 के लिए चल रही ई-प्रवेश प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन फीस जमा करने से पहले मेजर, माइनर,इंटर्नशिप के लिए विषयों का चयन करना होगा। लेकिन इस प्रक्रिया को समझने में कई छात्र परेशान हो रहे हैं। इसके चलते वे विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर रहे हैं। दरअसल, उन्हें अभी विभाग की ओर से मेजर,माइनर जैसे विषयों की जानकारी नहीं है। लेकिन, इन सभी छात्र-छात्राओं को 25 अगस्त तक इस प्रक्रिया को पूरा कर फीस जमा करनी होगी। इसके बाद ही उन्हें अंतिम रूप से एडमिशन मिल सकेगा। पहले दिन 5,217 ने फीस जमा कर एडमिशन ले लिया है। स्नातक में 4 लाख 1,887 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया था। इसमें से 3 लाख 81 हजार 455 ने च्वॉइस लॉक की थी। इसमें से 3 लाख 69 हजार 236 का सत्यापन हो सका था। इनको मेरिट के आधार पर सीट आवंटित की गई है। विद्यार्थियों को ईप्रवेश पोर्टल https://epravesh.mponline.gov.in/ से ही पूरी प्रक्रिया में शामिल होना है।

इसके साथ एनसीटीई के पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश के लिए प्रक्रिया जारी है। उसमें सबसे ज्यादा विद्यार्थी बीएड में प्रवेश ले रहे हैं। इसकी लगभग 37 हजार सीटें हैं। उनमें से पहले चरण में ही 34 हजार से अधिक सीटों पर रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।

भोपाल। एनटीए की ओर से जेईई मेंस के तीन सेशन आयोजित किए जा चुके हैं, वहीं, लास्ट टर्म का एग्जाम 2 सितम्बर तक है। तीन सेशन में अच्छे परेंटाइल हासिल करने वाले स्टूडेंट्स ने जेईई एडवांस की तैयारी भी शुरू कर दी है। यह एग्जाम 3 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। यानी तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के पास अब करीब 45 दिनों का ही समय बचा है, जिसमें वे अपनी प्रिपरेशन को फाइनल कर सकते हैं। एक्सपट्र्स का कहना है कि अब नए टॉपिक्स को पढऩे का बिल्कुल समय नहीं है। अब सिर्फ अपनी स्ट्रैन्थ पर फोकस करें। एग्जाम ऑनलाइन होगा तो मॉक टेस्ट की भी उसी हिसाब से तैयारी करें। इससे पैटर्न को समझने में आसानी होगी।

फॉर्मूलों को दिन में तीन बार पढ़ें
एक्सपर्ट सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि जेईई मेन्स और जेईई एडवांस की तैयारी में बहुत फर्क होता है। एडवांस के लिए इनडेफ्थ नॉलेज चाहिए। स्टूडेंट्स को थ्योरेटिकल रिव्यू अच्छे से करना होगा। स्टूडेंट्स जेईई की तैयारी दो से तीन साल पहले ही शुरू कर देते हैं तो अब वीकप्वाइंट के लिए परेशान होने की बजाए अपनी स्ट्रैन्थ पर ध्यान दें। जिन टॉपिक्स में कॉन्सेप्ट क्लियर हैं, उस पर ही फोकस करें। आइआइटी के लिए कटऑफ 37 से 38 प्रतिशत तक ही रहता है ऐसे में 70 प्रतिशत कोर्स में भी परफेक्शन है तो अच्छी रैंक मिलेगी। स्टूडेंट्स टाइम मैनेज करने के लिए कैमेस्ट्री को जल्दी सॉल्व कर बचा समय मैथ्स को देते हैं। इसके लिए फॉर्मूला याद रखना जरूरी है। इन्हें दिन में तीन बार जरूरी पढ़ें।

टाइम मैनेजमेंट सीखना होगा
एक्सपर्ट केके पांडे के अनुसार कम से कम दस सालों के पेपर रिवाइज करें। जो इंपोर्टेट टॉपिक्स हैं, उनके रीविजन पर ज्यादा ध्यान दें। कैमेस्ट्री में ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक पर ही फोकस रहता है। ज्यादातर सवाल एनसीइआरटी आधारित पूछे जाते हैं। अगर एनसीइआरटी बुक्स पर फोकस बढ़ाया जाए, तो इस सब्जेक्ट में स्कोरिंग अच्छी होगी। मैथ्स में कोऑर्डिनेट जेमेट्री, 3-डी वेक्टर, इंटीग्रेशन और डिफरेंशियल ईक्वेशंस को जरूर ध्यान से पढ़ लें। जेईई एडवांस्ड में हर साल की तरह इस बार भी कुछ सरप्राइज पैटर्न देखने को मिलेगा। प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई जरूर करें। मॉक टेस्ट देंगे तो एग्जाम में तीनों सब्जेक्ट के टाइम डिस्ट्रीब्यूशन को समझ पाएंगे। हर बार टेस्ट को एनालिसिस करेंगे तो नेगेटिव मार्किंग से भी बच सकेंगे।

अब नया टॉपिक बिल्कुल ना शुरू करें
एक्सपर्ट मितेश राठी ने बताया कि जिन टॉपिक्स को आपने पढ़ा है उन्हीं का रिवीजन करें। जेईई के लिए जो नोट्स तैयार किया है, उन्हें पढि़ए। फिजिक्स, कैमिस्ट्री जैसे सब्जेक्ट्स के फॉर्मूला को ज्यादा से ज्यादा दोहराते रहें। एग्जाम के दौरान स्टूडेंट्स अक्सर कुछ फॉर्मूला की वजह से सवाल नहीं हल कर पाते। एग्जाम में अब ज्यादा समय नहीं है तो पढ़े गए टॉपिक्स की ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें। जितना हो सके सब्जेक्ट्स को दोहराते रहें और क्वेश्चन बैंक को भी ध्यान से पढ़ते रहें। कम से कम पिछले तीन साल के जेईई क्वेश्चन पेपर जरूर पढ़ लें। इसके लिए मिनिमम और पर्याप्त स्टडी मटेरियल 12वीं का कोर्स ही है। इसलिए कोर्स को बढ़िया से दोहराए और जितना हो सके एनसीइआरटी की बुक्स पढ़ें। कॉन्सेप्ट क्लीयर रहेंगे तो स्पीड और एक्यूरेसी अपने आप आएगी। इसलिए रटने की बजाए कॉन्सेप्ट को समझें।

भोपाल. रक्षाबंधन के लिए राखियों की खरीदी जोरों पर है, वहीं दूर रहने वाले भाइयों को राखी पहुंचाने डाक विभाग ने भी व्यापक तैयारी की है। अवकाश के दिनों में भी राखियों की बुकिंग की जा रही है एवं उनका वितरण किया जा रहा है। इसके लिए स्पेशल लिफाफे बनाए गए हैं।

डाक विभाग का मानना है कि इन लिफाफों को खोलने से पहले ही देखने पर ही समझ में आ जाता है कि उनकी प्यारी बहना ने उनके लिए राखी भेजी है। कहना ना होगा कि ई-मेल, सोशल मीडिया के जमाने में भी डाक विभाग बहनों का सहयोगी बना हुआ है। राखियों के साथ शुद्घ गंगाजल भी भिजवाने की व्यवस्था की गई है।

दरअसल, डाक विभाग वैसे तो कई सालों से रक्षाबंधन पर्व पर राखियां भेजता रहा है, लेकिन इस बार आकर्षक लिफाफे तैयार करवाए हैं, जिनकी कीमत 12 रुपए रखी गई है। इसका वजन 4 से 5 ग्राम तक होता है। इसके बाद राखी के वजन के हिसाब से चार्ज लिया जाता है जिस पर अधिकतम 22 से 35 रुपए तक का खर्च आता है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनके विभाग का उद्देश्य राखियां भेजकर मुनाफा कमाना नहीं बल्कि भाइयों को बहनों द्वारा भेजे गए प्यार की खुशियां देना है।

बुक हो रही हैं राखियां
43 प्रधान डाकघरों में
970 उप डाकघरों में
7264 शाखा डाकघरों में

दूरी के हिसाब से भेजे जाते हैं लिफाफे
अक्सर रक्षाबंधन के बाद राखियां पहुंचती है। ऐसे में डाक विभाग ने व्यवस्था की है कि रक्षाबंधन तक किसी भी हालत में बुकिंग की गई राखियों की डिलीवरी हो। इसके लिए अवकाश के दिनों में काउंटर खोलकर बुकिंग हो रही है। लंबी दूरी की राखियों के लिफाफों को त्वरित भेजा जा रहा है। इसके लिए कर्मचारी और वाहन लगाए गए हैं।

विभाग में कर्मचारियों की अलग से ड्यूटी लगाई गई है, ताकि रक्षाबंधन पर्व के पहले राखियां मिल सकें।
चंद्रेश जैन, सहायक निदेशक, व्यवसाय एवं विकास, डाकघर

भोपाल। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्व. राजीव गांधी की 77 वीं जयंती पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेसियों ने उन्हें याद कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने कहा कि हम सौभाग्यशाली है जिसे उनके जैसा महान सपूत देश की सेवा के लिए मिला था। नए भारत की परिकल्पना, 21 वीं सदी का आगाज, कम्प्यूटर, टीवी, मोबाईल, आईटी के क्षेत्र में उनका अपूर्णीय योगदान रहा। उन्होंने नौजवानों के हित में मतदान का अधिकार 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का निर्णय लिया। राजीव गांधी पायलट के रूप में भोपाल आया करते थे, उस समय वे राजनीति में नहीं थे। उनका भोपालवासियों से विशेष लगाव था।

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि राजीव गांधी ने देश की अस्मिता के लिए अपना बलिदान दिया। वर्तमान सरकार तानाशाही रवैये से देश के संविधान और लोकतंत्र की हत्या कर रही है। आज सत्ता लोलुपताधारी लोगों द्वारा लोकसभा और विधानसभा सदन का अपमान किया जा रहा है। नौजवान, महिलाएं, किसान और सभी वर्गों को अधिकारों से वंचित कर रही है। आज राजीव जी के विचारधारा की जरूरत है। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजीव सिंह, उपाध्यक्ष सैयद साजिद अली, पूर्व महापौर दीपचंद यादव ने भी विचार व्यक्त किए।

भोपाल। प्रमोशन के इंतजार कर रहे राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों को चार साल बाद भी निराशा ही हाथ लगी है। प्रमोशन के 35 हजार से अधिक कर्मचारी रिटायर हो गए हैं, इस बीच सरकारी स्तर पर कई प्रयास हुए, वादे भी किए गए लेकिन सब कागजी ही रहा। डेढ़ साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय पर भी अमल नहीं हो सका। यह मामला फाइलों में ही उलझा है।

8 फरवरी 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया था कि जब तक पदोन्नति का प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है तब क आईएएस आईपीएस तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तरह उच्च पदों पर दी जाने वाली क्रमोन्नति सभी विभागों में लागू की जाए। इससे कर्मचारियों को उम्मीद बनी थी कि प्रमोशन के अभाव में उन्हें क्रमोन्नति मिल जाएगी। इससे उन्हें आर्थिक लाभ के साथ उच्च पद की जिम्मेदारी भी मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हाल ही में विधानसभा समाप्त हुए विधानसभा के मानसून सत्र में तत्कालीन सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद ङ्क्षसह को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखित जवाब में 8 फरवरी 2020 को हुई बैठक और उसमें क्र्रमोन्नति दिए जाने के निर्णय की बात तो स्वीकार की, यह भी बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए, लेकिन भर्ती नियमों में संशोधन और कितने लोगों को इसका लाभ मिला, इस सवाल पर यही कहा गया जानकारी एकत्रित की जा रही है। वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सभी के लिए एक समान होना चाहिए। जब आईएएस, आईपीएस, राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के प्रमोशन मिल सकता है तो वही नियम अन्य कर्मचारियों के लिए भी लागू होना चाहिए।

वर्ष 2016 नहीं हो रहे हैं प्रमोशन -

राज्य में वर्ष 2016 से प्रमोशन बंद हैं। हाईकोर्ट ने द्वारा राज्य के प्रमोशन नियम निरस्त किए जाने के कारण ऐसी स्थिति बनी है। इसके पीछे तर्क यह था कि आरक्षण का लाभ सेवाकाल में सिर्फ एक बार ही मिलना चाहिए। जबकि आरक्षित वर्ग के लिए नियुक्ति के समय इसका लाभ मिलता है और प्रमोशन में भी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है।

भोपाल. एमपी नगर नो पार्र्किंग एरिया में बाइक पार्क करने और फिर 600 रुपए के जुर्माने से शुरू हुआ विवाद ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर श्रीराम दुबे की मौत की वजह बन गया। दुबे ने सात अगस्त को कोलार निवासी नापतौल विभाग के इंस्पेक्टर सरनाम मीणा के बेटे हर्ष मीणा की बाइक को क्रेन से उठवा लिया था।

नाराज आरोपी ने दुबे पर चाकू से हमला कर दिया था। चाकू पेट में लगने के बाद पुलिस विभाग ने इसे कम गंभीर मानकर जेपी अस्पताल में दुबे का इलाज करवाया था। नौ अगस्त को तबीयत बिगडऩे के बाद दुबे को लेकर उनके परिजन एक निजी अस्पताल पहुंचे जहां ऑपरेशन की जरूरत बताई गई। 10 अगस्त को दुबे के पेट और आंत में फैल रहे संक्रमण को रोकने के लिए ऑपरेशन किया गया। मधुमेह की वजह से दुबे की हालत सुधरने की बजाए बिगड़ती जा रही थी जिसके बाद परिजन उन्हें 19 अगस्त को गंभीर हालत में एक अन्य अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन 20 अगस्त सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। दुबे की मौत की खबर के बाद पुलिस विभाग में मायूसी छा गई। जानलेवा हमले के आरोपी पहले से गिरफ्तार युवक पर हत्या का मुकदमा बनाया गया है।

ऐसे शुरू हुआ था विवाद

श्रीराम दुबे ट्रैफिक थाना में एसआई थे। सात अगस्त को दोपहर करीब एक बजे कोलार इलाके में रहने वाले इंजीनियर हर्ष मीणा (27) की ज्योति टॉकीज के पास नो-पार्किंग में बाइक खड़ी थी। ट्रैफिक पुलिस की क्रेन इसे उठाकर क्राइम ब्रांच थाना परिसर ले आई थी। दुबे ने उसका 600 रुपए चालान काट दिया था। चालान कटवाने के बाद हर्ष ने क्राइम ब्रांच थाने के गेट के पास उन पर चाकू से हमला कर दिया था। एमपी नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था।

पत्नी-तीन बच्चों को पीछे छोड़ गए दुबे: श्रीराम दुबे के परिवार में तीन बच्चे हैं। उनका बड़ा बेटा सत्यम हाल ही में तकनीकी शिक्षा पूरी कर चुका है और बीएचइएल में इंटर्नशिप कर रहा है। दूसरे नंबर की बेटी एवं तीसरे नंबर का बेटा अभी पढ़ाई कर रहे हैं। मूलत: नरसिंहपुर राजमार्ग क्षेत्र के रहने वाले दुबे का व्यवहार याद कर उनके साथियों की आंखें नम हो गईं। शुक्रवार को नेहरू नगर पुलिस लाइन स्थित उनके सरकारी निवास से अंतिम यात्रा में वरिष्ठ अफसर एवं साथी कर्मी शामिल हुए।

भोपाल. इस बार राखी के स्नेह पर महंगाई का बंधन है। दैनिक उपयोग की सभी वस्तुओं की कीमतों में 25 से 30 फीसदी तक उछाल आ गया है। बीते एक साल में पेट्रोल-डीजल के साथ खाद्य तेल और रसोई गैस के दामों ने भी रेकॉर्ड तोड़ दिया है। पेट्रोल 110 रुपए से ऊपर पहुंच गया है। डीजल के दाम भी शतक लगाने को तैयार हैं। ऐसे ही रसोई गैस की कीमत एक साल में 600 रुपए से बढ़कर 865 रुपए पर पहुंच गई है। दुग्ध उत्पादों में भी तेजी का क्रम जारी है। ऐसे ही बीते साल के मुकाबले इस साल राखियों के दाम भी तेज हैं। सूखे मेवे, दालें और सोया तेल-वनस्पति तेल के दामों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
इधर, त्योहार के पहले थोक बाजार में शक्कर 3400 से 3900 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है। सीधे-सीधे 5 रुपए किलो का अंतर करीब एक सप्ताह में आ गया है। तेल-शक्कर ब्रोकर रमाकांत तिवारी ने बताया कि शक्कर में त्योहारी मांग को देखते हुए सटोरिए सक्रिय हो गए हैं।

दूध: 2 रुपए प्रति लीटर बढ़े दाम
हाल ही में अमूल ने दूध दाम 2 रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया है। अब अमूल दूध भोपाल में 56 रुपए में एक लीटर मिल रहा है। इंदौर, जबलपुर में भी दूध महंगा हुआ है। कंपनी ने स्टैंडर्ड, टोंड मिल्क, डबल टोंड मिल्क में भी प्रति लीटर 2 रुपए बढ़ाए हैं। अमूल के सीनियर सेल्स ऑफिसर पंकज देशमुख ने कहा, डीजल महंगा होने से दूध-दही के रेट बढ़ाए हैं। ऐसे ही मावा की कीमत एक साल में 200 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 260 रुपए प्रति किलो हो गई है।

एलपीजी: इस साल छह बार बढ़ोतरी
थोड़े समय के बाद एलपीजी ने फिर महंगाई की आग लगी है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर के दाम 25 रुपए बढ़ा दिए हैं। एलपीजी वितरक संघ के अध्यक्ष आरके गुप्ता ने कहा कि इस साल रसोई गैस की कीमत छठी बार बढ़ाई गई है और सिलेंडर 165 रुपए महंगा हो गया है। इससे पहले कंपनियों ने 1 अगस्त को 19 किलो के कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 73.5 रुपए बढ़ाए थे।

किराया: 75 फीसदी तक की बढ़ोतरी
प्रदेश सरकार ने सूबे में संचालित निजी यात्री बसों के किराये में 25 से 75 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। इससे पहले वर्ष 2018 में यात्री बस किराया प्रति किलोमीटर एक रुपए बढ़ाया गया था। मध्यप्रदेश प्राइवेट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा का तर्क है कि कोरोना में बस ऑपरेटर को काफी नुकसान हुआ। ईंधन की कीमतें भी काफी बढ़ी हैं। ऐसे में किराया बढ़ाया गया है।

 

खरगोन। मध्यप्रदेश के महेश्वर और धार के मजदूरों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दो-दो लाख के मुआवजे का ऐलान किया है। जबकि घायलों को 50 हजार की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। गौरतलब है कि शुक्रवार को महाराष्ट्र के बुलढाना में सरिए से भरा ट्रक पलट जाने से उसमें सवार 16 मजदूरों की मौत हो गई थी। यह उनमें से 13 श्रमिक महेश्वर और धार के हैं। यह सभी रक्षाबंधन पर अपने घर लौटने वाले थे।

यह हैं मृतकःगणेश डावर (20) मेलखेडी, दीपक डावर (21) मेलखेड़ी, सुनील डावर (22) मेलखेडी, नारायण डावर (25) मेलखेडी, लक्ष्मण डावर (20) मोयदा, महेश कटारे (31) बबलई, जितेंन मकवणी (19) मक्सी, देवराम ओसरे (21) कांचीकुआं। गोविंद शिलोड (25) भोंडल, करणं मकवणे (19) काकलपूर, दिनेश गावड (27) हनुमत्या, दिलीप कटारे (25) अंबापुर, मिथुन माचारे (19) तारापुर...।


खरगौन के एसपी शैलेंद्रसिंह चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार खरगोन जिले के आठ मजदूरों की मौत हुई है। यह महेश्वर थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। परिजनों के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम महाराष्ट्र गई है।

भोपाल. आर्मी अफसर बनकर वाहन बिक्री का फर्जी विज्ञापन देने वाले दो आरोपियों तालीम हुसैन और हय्यूल खान को पुलिस ने राजस्थान के भरतपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी भोपाल सहित उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडू के 260 लोगों से करीब 80 लाख
रुपए की ठगी कर चुके हैं।
आरोपी खुद को सेना का कर्मचारी बताते थे। ग्राहक का भरोसा जीतने के लिए इंटरनेट से सैनिकों के फोटो, परिचय पत्र निकालकर भेजते थे। आरोपी ठगी की रकम मौज-मस्ती में खर्च करते थे।
ऑनलाइन की थी हजारों की ठगी
पुलिस के मुताबिक पत्रकार मुकेश विश्कर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ओएलएक्स पर एक मोटर साइकल बेचने का विज्ञापन देखा था। जिसकी कीमत 20 हजार रुपए थी। विज्ञापन में दिए फोन पर बात करने पर मोटरसाइकिल बेचने वाले व्यक्ति ने खुद को सेना का अफसर बताया। तमाम चार्ज जोडऩे के बाद बाइक का सौदा करीब 51 हजार में तय हुआ। मुकेश ने यह राशि उसके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद आरोपियों ने उसका फोन रिसीव करने बंद कर दिया।
ऐसे बनाते थे लोगों को अपना शिकार
आरोपी ओएलएक्स पर वाहन की कीमत बहुत कम डालते हैं। जिससे ग्राहक सस्ते में वाहन मिलने की वजह से इनसे संपर्क करता है। ग्राहक को आरोपी सेना का कर्मचारी बताते हैं। वाहन की बुकिंग के लिए 2150 रुपए में मांगते थे। ग्राहक को शक होने पर फर्जी लोकेशन क्रिएट करके विश्वास दिलाते थे कि वह उसके आसपास के शहर के ही रहने वाले हैं।

भोपाल. प्रदेश में पहुंचे सिस्टम के असर से कई हिस्सों सहित शहर में दो दिनों में मध्यम बारिश हुई है। शहर में शुक्रवार सुबह तक बीते 24 घंटों में लगभग आधा इंच, तो दिन भर में सात मिमी बारिश दर्ज हुई।
बौछारों के चलते तापमान गिरा है। रात का तापमान 22.4 डिग्री तक गिर गया, जो सीजन का सबसे कम आंकड़ा है। बौछारों के चलते न्यूनतम तापमान गुरुवार की अपेक्षा आधा डिग्री और गिरकर 22.4 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य स्तर पर रहा। दिन भर बादल छाए रहे और रुक-रुककर बौछारें हुई, जिससे दिन का तापमान 27.5 डिग्री दर्ज हुआ। शहर में अब तक 657.4 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य स्तर से 83.6 मिमी कम है। अगले 24 घंटों में कुछ स्थानों बौछारें पड सकती हैं। हालांकि इधर मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अब सिस्टम अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। इसके असर से अब बारिश की गतिविधियां कम होने लगेंगी। अब फिर नए सिस्टम से आस है।

 

भोपाल। कांग्रेस ने सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर मोदी सरकार को घेरने की तैयार कर ली है। इसी सिलसिले में 19 दिलों के साथ मिलकर कांग्रेस देशभर में विरोध प्रदर्शन करने वाली है। यह प्रदर्शन 20 सितंबर से 30 सितंबर तक किए जाएंगे। इसे लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसा है। चौहान ने कांग्रेस को डूबती नाव बताया है।

 

लोकसभा चुनाव में काफी वक्त है, लेकिन अभी से विपक्षी दल मिलकर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि मैडम को विपक्षी एकता की याद आ रही है। कांग्रेस के पास अब कुछ बचा नहीं है। न अस्तित्व है न विचार है और न धारा बची है। कांग्रेस खुद को अपना अध्यक्ष नहीं बना पाई है। परिवाह मोह में कांग्रेस दिशाभ्रष्ट हो गई है। चौहान ने कहा कि कांग्रेस डूबती नाव है। वो भी ऐसी नाव जो खुद तो डूबेगी और दूसरों को भी ले डूबेगी। चौहान ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी है जैसे हम तो डूबे हैं सनम तुमको भी ले डूबेंगे।

 

मोदी के खिलाफ बना रहे रणनीति

विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर कांग्रेस की यह रणनीति 2024 में होने वाले लोकसभा की तैयारी के रूप में देखी जा रही है। सोनिया गांधी की ओर से बुलाई गई वर्चुअल बैठक में कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी शामिल थे। जबकि वर्चुअल बैठक में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, तमिलनाडू के सीएम एमके स्टालिन, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे समेत शरद पवार, सीताराम येचुरी, शरद यादव आदि भी शामिल हुए। इस मीटिंग में आम आदमी पार्टी और बसपा और सपा शामिल नहीं थे। इस बैठक में सोनिया ने विपक्ष को 2024 चुनाव के लिए एकजुट होने की अपील की है। सोनिया ने कहा कि सबसे मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रहित में एकजुट होना होगा। 2024 में संविधान पर विश्वास करने वाली सरकार को लाना होगा।

भोपाल। पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक अजय विश्नोई शनिवार को एक बार फिर चर्चाओं में है। वे अक्सर अपनी ही पार्टी को घेरकर सुर्खियों में बने रहते हैं। इस बार फिर विश्नोई ने सीएम शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसा है।

पाटन से भाजपा के विधायक एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई ने मुख्यमंत्री चौहान के एक निर्णय के बाद ट्वीट किया है। दरअसल, कल मुख्यमंत्री ने राजधानी की सड़कों को लेकर नाराजगी जताई थी और उन्होंने अविलंब सड़कों की मरम्मत के निर्देश दिए थे।

 

 

क्या बोले अजय विश्नोई

अजय विश्नोई ने ट्वीट के जरिए कहा है कि 'धन्यभाग भोपाल की सड़कों का मुख्यमंत्री जी की नजरें इनायत हो गई। उम्मीद है बाकी प्रदेश की सड़कों पर मुख्यमंत्री की नजर जल्द पड़ेगी।'

 

भोपाल। किस्सा भोपाल रियासत की नींव रखने वाले दोस्त मोहम्मद खान और गिन्नौरगढ़ की रानी कमलापति (कमलावती) से जुड़ा है। देश के असंख्य किस्सों में यह भी एक ऐसा किस्सा है जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। गिन्नौरगढ़ की रानी के पति की हत्या कर दी गई थी, वो अपने बेटे के साथ जान बचाकर जंगलों में छुप रही थी। रानी ने जब भोपाल के पहले नवाब को भाई कहकर पुकारा तो उसने भी रक्षा का तुरंत वचन दे दिया। बताया जाता है कि खान ने अंत समय तक रानी की रक्षा की और वफादारी निभाई।

 

patrika.com बता रहा है ऐसा किस्सा, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है....।

 

 

जब गिन्नौरगढ़ के गौंड राजा निजाम शाह को जहर देकर मार दिया गया था तो उनकी विधवा पत्नी रानी कमलापति अपने बेटे को लेकर जंगलों में अपनी जान बचाते छुपती रही। जब जान का खतरा बढ़ने लगा तो रानी कमलापति ने भोपाल रियासत के नवाब दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी। दोस्त मोहम्मद खान ही भोपाल रियासत की नींव रखने वाले व्यक्ति थे। डरी-सहमी रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद खान को भाई कहकर संबोधित किया। रानी के सद्व्यवहार सेखान बेहद प्रभावित हो गए और उन्होंने कमलापति की जान बचाने का वचन दिया। 1710 के दशक में रानी के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाया गया। कोलांस नदी के डैम पर यह महल बनाकर दिया गया। यह महल छोटे तालाब और बड़े तालाब के बीच है। किंवदंती है कि कमलापति जब तक जीवित रहीं दोस्त मोहम्मद को अपना भाई मानती रही। माना जाता है कि किसी हिन्दू रानी से राखी बंधवाने वाले पहले शासक दोस्त मोहम्मद खान थे।

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यहां से 55 किमी दूर है गिन्नौरगढ़

राजधानी भोपाल से गिन्नौरगढ़ की दूरी 55 किलोमीटर दूर है। यह 750 गांवों से मिलकर गिन्नौर राज्य था। चारों तरफ घने जंगलों से घिरे एक पहाड़ पर 2000 फुट ऊंची चट्टान के शिखर पर स्थित था यह किला। जब मुगल साम्राज्य का पतन हो चुका था। गौंड़ राजा निजाम शाह का राज था। वे 7 रानियों के साथ रहते थे। इनमें कृपाराम गौंड़ की बेटी कमलापति भी थीं। जो सबसे खूबसूरत थीं। कमलापति वीर और बुद्धिमान भी थी। निजाम शाह का भतीजा चैनशाह का बाड़ी में राज्य था। वह अपने चाचा से नफरत करते थे। उसने चाचा की हत्या करने के लिए काफी प्रयास किए। चैन शाह ने धोखे से निजाम शाह को जहर देकर मार दिया था। चैन शाह के षड्यंत्र से बचने के लिए विधवा हुई कमलापति और उसका बेटा नवलशाह गिन्नौरगढ़ किले के आसपास के जंगल में छिप गए। काफी समय तक वहां समय बिताने के बाद जब जान का खतरा बढ़ा तो कमलापति और उसके बेटे भोपाल की तरफ आगे बढ़े।

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यहां है रानी कमलापति महल

बचते-बचते पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए उसने इस्लामनगर के नवाब दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी, जिन्होंने बाद में भोपाल रियासत की स्थापना की। खान ने बड़े तालाब किनारे ही जो महल बनवाया था, उसे आज सभी कमलापति महल के नाम से जानते हैं। 18वीं शताब्दी के शुरुआत में यह महल वास्तु का अनोखा उदाहरण है। इसकी खास बात यह है कि ऊपर से यह महल दो मंजिला नजर आता है, लेकिन भीतर ही भीतर पांच मंजिल भी हैं। लखौरी ईंटों और मिट्टी से इसे बनाया था। निचले हिस्से में भारी-भरकम पत्थरों का बेस तैयार किया गया था। यह महल कोलांस नदी के डैम पर बनाया गया है, जिसका निर्माण राजा भोज ने किया था। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1989 से इसे अपने संरक्षण में रख रखा है। इस महल के परिसर को सुंदर बगीचे में तब्दील किया गया है।

भोपाल. मध्यप्रदेश में बीते 3-4 दिनों से जारी बारिश का सिलसिला अभी कुछ और दिनों तक ऐसे ही चलता रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही बड़े पैमाने पर नमी के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश हो रही है और प्रदेश का मौसम आने वाले 3-4 दिनों तक ऐसा ही बना रहेगा। मौसम विभाग ने आने वाले 24 घंटों में प्रदेश के चार जिलों में भारी से अतिभारी बारिश की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।

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4 जिलों में रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने आगामी चौबीस घंटों के लिए जो पूर्वानुमान शनिवार को जारी किया है उसके मुताबिक उज्जैन धार, रतलाम और देवास जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताते हुए इन जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 64.5 से 204.5 मिमी.बारिश चौबीस घंटों में होने का अनुमान है।

 

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13 जिलों में भारी बारिश की संभावना, ऑरेंज अलर्ट जारी
इसके अलावा मंदसौर, नीमच, दतिया, भिंड, मुरैना, शिवपुरीकलां, आगर, शाजापुर, झाबुआ, बैतूल, राजगढ़, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा जिलों में भारी बारिश व गरज के साथ बिजली चमकने व गिरने की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं उज्जैन, ग्वालियर-चंबल संभागों के जिलों में गरज के साथ बिजली चमकने व गिरने की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

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पिछले 24 घंटों में यहां हुई बारिश
वहीं अगर बीते 24 घंटों की बात करें तो प्रदेश के रीवा, शहडोल, भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं चंबल संभागों के जिलों में अधिकांश स्थानों पर एवं जबलपुर, सागर, होशंगाबाद व व ग्वालियर संभागों के जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई है।

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भोपाल. पंजाब में फिरोजपुर मंडल के जालंधर कैंट-चिहेरू रेल खंड के बीच जारी किसान आंदोलन का असर अब ट्रेनों के संचालन पर पड़ने लगा है। इसके चलते भोपाल से होकर जुजरने वाली अमृतसर-नांदेड़ एक्सप्रेस स्पेशल और अमृतसर-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस एक्सप्रेस ट्रेन को रद्द करना पड़ा है। यही नहीं, आंदोलन के चलते पुणे-जम्मूतवी एक्सप्रेस समेत पांच अन्य ट्रेनें भी प्रभावित हुई हैं।


अमृतसर स्टेशन से तड़के 4.25 पर चलने वाली गाड़ी क्रमांक 02716 अमृतसर-नांदेड़ एक्सप्रेस स्पेशल और अमृतसर स्टेशन से सुबह 8.45 पर चलने वाली गाड़ी क्रमांक 01058 अमृतसर-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस एक्सप्रेस स्पेशल अपने शुरुआती स्टेशन से ही निरस्त कर दी गई है। इसके अलावा, माता वैष्णों देवी कटरा स्टेशन से सुबह 8.35 डिपार्चर करने वाली गाड़ी संख्या 02920 वैष्णों देवी कटरा-डॉक्टर अंबेडकर नगर एक्सप्रेस स्पेशल शुरुआती स्टेशन से निरस्त हुई है। इसी प्रकार आज नागपुर स्टेशन से शाम 5.50 बजे डिपार्चर करने वाली गाड़ी संख्या 02025 नागपुर-अमृतसर एक्सप्रेस स्पेशल शुरुआती स्टेशन से निरस्त की गई है। यानी ये चारों ट्रेनें अब भोपाल नहीं आ सकेंगी।

 

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ये गाड़ियां हुईं प्रभावित

News

-पुणे स्टेशन से प्रस्थान करने वाली गाड़ी संख्या 01077 पुणे-जम्मूतवी एक्सप्रेस स्पेशल कुरुक्षेत्र स्टेशन पर समाप्त की गई है।
-नांदेड़ स्टेशन से प्रस्थान करने वाली गाड़ी संख्या 02751 नांदेड़-जम्मूतवी एक्सप्रेस स्पेशल पानीपत स्टेशन पर समाप्त की गई।
-नांदेड़ स्टेशन से प्रस्थान करने वाली गाड़ी संख्या 02715 नांदेड़-अमृतसर एक्सप्रेस स्पेशल चंडीगढ़ स्टेशन पर समाप्त की गई।
-इंदौर स्टेशन से प्रस्थान करने वाली गाड़ी संख्या 09325 इंदौर-अमृतसर एक्सप्रेस स्पेशल हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर समाप्त की गई।

 

रक्षाबंधन पर गुलजार हुए बाजार, देखें Video

Jitendra Chourasiya, भोपाल। प्रदेश में तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भाजपा में सत्ता और संगठन ने शनिवार को साथ बैठकर मंथन किया। दिनभर मैराथन बैठकों के बाद संबंधित सीटों से जुड़े नेताओं को कहा गया कि मैदान में जुट जाओ। गांव और बूथ स्तर तक टीम बनाकर काम करो। बैठक में हर नेता से अब तक के काम की पूरी रिपोर्ट ली गई। निर्देश दिए गए कि सभी प्रभारी नेता व मंत्री सबसे पहले एक-एक दौरा तुरंत संबंधित सीटों पर करें। वहां से फीडबैक भी लें।
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सीएम हाउस में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह-संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने संयुक्त रूप से यह बैठक की। इसमें चारों सीटों के प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्री, विधायक, संगठन के प्रभारी सहित अन्य नेताओं को बुलाया गया था। प्रत्येक नेता से सीएम व अध्यक्ष ने पूछा कि अब तक कितनी बैठकें और दौरे किए। संबंधित क्षेत्रों में गांव समितियां बनाई या नहीं बनाई। बूथ स्तर पर टीम बनी या नहीं बनी। किस सीट की क्या स्थिति है और अब तक का क्या फीडबैक मिला है। हर नेता से उसके दौरे के अनुभव पूछे गए। मंत्रियों ने उनके दौरे के अनुभव भी नेताओं को बताएं। कांग्रेस के कब्जे वाली सीटों पर हारे बूथों को लेकर विशेष तौर पर तैयारी करने क लिए कहा गया। इसके अलावा कहां कांग्रेस कमजोर या मजबूत है और कहां क्या दिक्कतें हैं, इस पर भी संवाद हुआ।
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माइक्रो मैपिंग, काम में जुटो-
सीएम शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष वीडी ने सीधे तौर पर नेताओं को कहा कि मैदानी स्तर पर काम में जुट जाईये। अभी चुनाव में समय हैं, लेकिन तब तक मैदानी नेटवर्किंग पूरी हो जानी चाहिए। जिन इलाकों मे ंपार्टी का वोटबैंक कम है, उन पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा गया।
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कोरोना की छाया -
कोरोना को लेकर भी आशंका व्यक्त की गई। बैठक में कहा गया कि चुनाव की तारीख की मंजूरी केंद्रीय निर्वाचन आयोग के स्तर पर होना है। यदि कोरोना काबू में रहता है, तो जल्द चुनाव होंगे, लेकिन यदि कोरोना बढ़ता है तो चुनाव में समय लगेगा। अभी मध्यप्रदेश में ठीक हालात है, लेकिन अन्य कई राज्यों में स्थितियां बिगड़ रही है, इस कारण अभी चुनाव की उम्मीद कम हो रही है।
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सत्ता-संगठन का संतुलन जरूरी-
बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि हर सीट पर सत्ता और संगठन से नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री और संगठन के नेता आपस में समन्वय करके काम करें। सबसे पहले एक-एक दौरा जल्द करें। इसके अलावा मैदानी स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करें। कहां कितनी बैठकें हुई हैं और कहां नहीं हुई, इसकी पूरी जानकारी लें। जिलाध्यक्षों से इस बारे में पूछे। साथ ही मंडल व वार्ड-गांव स्तर तक प्रभारियों स पूरी जानकारी लेकर अपडेट करें।
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टिकट पर अभी कोई संवाद नहीं-
बैठक में टिकट पर कोई संवाद नहीं हुआ। अभी केवल यही कहा गया कि सभी को मिलकर टीम भावना से काम करना है। प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग संबंधित नेताओं के साथ बैठक की गई।
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इन सीटों पर चुनाव, दावेदारों की भरमार-
खंडवा लोकसभा सीट पर नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद उपचुनाव होना है। यहां से अर्चना चिटनीस, नंदकुमार के बेटे हर्ष और कृष्ण मुरारी मोघे प्रमुख दावेदार हैं। वहीं पृथ्वीपुर विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक बृजेंद्र सिंह राठौर, जोबट सीट कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया और रैगांव सीट भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई हैं। हर सीट पर तीन से चार प्रमुख दावेदार हैं।
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भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उन्हेंं आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि कांग्रेस का अस्तित्व तो उस समय से है जब शिवराज और भाजपा के नेताओ का जन्म भी नही हुआ था। कांग्रेस की विचारधारा ने ही वर्षों से सभी को आज तक जोड़े रखा है, कांग्रेस की विचारधारा सब को एक करने की है, वही भाजपा की विचारधारा लोगों को बांटने की है।

कमलनाथ ने कहा कि भाजपा की विचारधारा तो किसानो के शोषण की है, युवाओं को बेरोजगार बनाने की है, महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने की है, कोरोना में कुप्रबंधन से लोगों की जान लेने की है, महंगाई बढ़ाने की है, झूठे वादों की है, जुमलों की है। कांग्रेस की विचारधारा ने ही भारत को आजाद कराने में अपना योगदान दिया। देश को इस मुकाम पर पहुँचाया, देश की इतनी संपतियां बनाई, जिसको आज भाजपा सरकार रोज बेच रही है। जो लोग देश की आजादी के संघर्ष से गायब रहे, माफीनामा लिखते रहे, वो आज कांग्रेस के अस्तित्व व विचारधारा पर किस मुंह से सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक विपक्ष की बात है तो विपक्ष की ताकत तो भाजपा निरंतर देख ही रही है और हर जगह मुंह की खा भी रही है। रस्सी जल रही है लेकिन बल अभी भी नही जा रहा है। यह भी तय है कि भाजपा की जनविरोधी नीतियो से जल्द ही पूरे देश से भाजपा की नाव डूबेगी।

jitendra.chourasiya@भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस बार रक्षाबंधन पर भाई-बहन वैक्सीनेशन को याद रखें। राखी बांधने में वैक्सीनेशन का वादा भी एक-दूसरे से लें। ये जिंदगी की डोज है। इस बार प्रदेश में 25 और 26 अगस्त को कोरोना वैक्सीन का महाअभियान चलेगा। इसके तहत 25 अगस्त को 20 लाख लोगों को पहला और 26 अगस्त को 10 लाख लोगों को दूसरा डोज प्राथमिकता से देने का निर्णय लिया गया है। इस लक्ष्य को सभी को मिलकर पूरा करना है।
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यह बात शिवराज ने शनिवार को वैक्सीनेशन महाअभियान की तैयारी को लेकर वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए की बैठक में कही। यहां शिवराज ने कहा कि अगस्त में भारत सरकार से प्राप्त करीब 74.7 लाख डोज में से 73.9 लाख की खपत हो चुकी है। प्रदेश में महाअभियान के लिए आवश्यक डोजेज की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश की वेक्सिनेशन के लिए पात्र 548.9 लाख आबादी में से 332.0 लाख को प्रथम डोज और 64.9 लाख आबादी को दूसरा डोज लग चुका है। देश में गुजरात के बाद सर्वाधिक वेक्सिनेशन करने वाला मध्यप्रदेश दूसरा राज्य है।
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एक लाख वालंटियर्स करेंगे जागरूकता का काम-
शिवराज ने कहा कि प्रदेश में एक लाख से ज्यादा वालंटियर्स इस अभियान में लोगों को जागरूक करेंगे। अभी 21 जून से 3 जुलाई के बीच वैक्सीनेशन अभियान में सबसे ज्यादा 21.3 प्रतिशत वैक्सीनेशन इंदौर में हुआ है। दूसरे नंबर पर सीहोर और तीसरे नंबर पर उज्जैन रहे।
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पीले चावल देकर करो लोगों को आमंत्रित-
यहां शिवराज ने कहा कि वेक्सिनेशन के लिए सबको प्रेरित करें। प्रभारी मंत्री इस महाअभियान की तैयारियों पर नजर रखें। उत्सव का वातावरण बनाएं। नागरिक प्रथम डोज लगवाने के बाद लापरवाही बरत रहे हैं। दूसरा डोज न लगवाने से प्रथम डोज का प्रभाव कम हो जाता है,यह बात आमजन को बताते हुए जनजागरण का कार्य आवश्यक है। सितम्बर माह तक प्रथम डोज शत-प्रतिशत पात्र आबादी को लग जाए, यह लक्ष्य है। पंचायतवार, विकास खण्डवार दूसरे डोज के लिए लाभार्थियों की सूची तैयार कर कार्य हो रहा है। कंट्रोल रूम की स्थापना, कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर लोगों को पीले चावल देकर वेक्सिनेशन के लिए आमंत्रित करने और अन्य नवाचारों से वेक्सिनेशन के महाअभियान को गति दी जाए। सोशल मीडिया पर भी अपील करते हुए लोगों को प्रेरित किया जाए। विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात व्यक्तियों का भी सहयोग इसके लिए लिया जाए। बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित अनेक मंत्री-विधायक व अफसर मौजूद रहे।
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भोपाल. महिला स्व सहायता समूह को अनाज खरीदी का जिम्मा सौंपने के बाद अब मरीजों को ऑक्सीजन प्लांट चलाने का भी काम दिया जाएगा। इसकी शुरुआत श्योपुर जिले से की गई है। यहां स्व सहायता समूह ने प्लांट संचालित करना शुरू कर दिया है। मालूम हो कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सडक़ निर्माण, बिजली बिल वितरण, वैक्सीनेशन और कोरोना मैनेजमेंट समेत एक दर्जन से अधिक काम किए जा रहे हैं। सरकार महिला स्व सहायता समूहों को बड़ा ब्रांड बनाने के प्रयास में है। इसके चलते विभिन्न सरकारी महकमों के छोटे-छोटेकाम इन समूहों से कराने पर जोर है। फिलहाल एक दर्जन से अधिक विभागों ने महिलाओं को मैदानी स्तर पर काम दिया है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा काम गेहूं उपार्जन का दिया गया। तकरीबन पांच सौ केंद्रों में महिलाओं ने गेहूं खरीदी की। खास बात है कि यहां किसी तरह की गड़बड़ी भी सामने नहीं आई। इसी क्रम में श्योपुर जिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को संचालित करने का जिम्मा महिला स्व सहायता समूह को दिया है। इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई है। इसके बाद अन्य जिलों के ऑक्सीजन प्लांट का जिम्मा भी स्व सहायता समूहों को दिया जाएगा।
सफलतापूर्वक कराया वैक्सीनेशन
महिला स्व सहायता समूहों को शहडोल जिले के बुढ़ार के आदिवासी क्षेत्र जुुमुई गांव में वैक्सीनेशन का जिम्मा दिया गया था। इन समूहों ने इस गांव में सौ फीसदी लोगों को वैक्सीन लगाया। इससे उत्साहित स्वास्थ्य विभाग अब इस समूह को अन्य गांवों में वैक्सीनेशन का काम दे रहे हैं।
सडक़ें बनाने का काम भी इनके पास
मंडला और बड़वानी जिले में महिला स्व सहायता समूह सडक़ों का भी निर्माण कर रहा है। इस समूह को सडक़ निर्माण के साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कई अन्य निर्माण कार्यों का भी जिम्मा दिया गया है।
गणवेश निर्माण में भी हाथ आजमा रहे
महिला स्व सहायता समूह गणवेश बनाने का काम भी कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन समूहों को सभी जिलों की स्कूली छात्राओं के गणवेश बनाने का काम दिया है। इसकी मॉनीटरिंग कलेक्टरों के जरिये की जा रही है।

बिजली बिल वितरण का भी जिम्मा
विद्युत वितरण कंपनियों ने बिल वितरण के लिए स्व सहायता समूहों का चयन किया है। प्रदेश के 55 विकासखंडों में यह काम निजी कंपनियों के जरिये कराया जा रहा है, पर धीरे-धीरे ये जिम्मा महिला स्व सहायता समूहों को भी दिया जा रहा है। महिला समूह बालाघाट, सिवनी, सीहोर में पानी के बिल का वितरण और राशि भी संग्रहित करता है।
वर्जन
स्व सहायता समूह से 38 लाख महिलाओं को जोड़ा गयाहै। 25 लाख को और जोड़ा जाएगा। इन सभी महिलाओं को आजीविका से जोडऩे का प्रयास जारी है।
एमएल बेलवाल, प्रबंध संचालक, ग्रामीण आजीविका मिशन, मप्र

भोपाल. शहर की सड़कों को लेकर सीएम शिवराज सिंह की नाराजगी का असर ये रहा कि कल तक जो अधिकारी निरीक्षण और जांच करने में ही सुस्ती बरत रहे थे। आनन फानन में उनकी निगरानी में ही सभी विभाग के अधिकारी सड़कें दुरुस्त करने जुट गए। यहां तक की जिस सीपीए को खत्म करने के लिए सीएम ने कहा, उस विभाग के अफसरों को भी अपनी सड़कों को चिंता सताने लगी और दौड़े-दौड़े काम कराने पहुंचे। आपको जानकार हैरानी होगी कि सीपीए ने एक दिन में शाहपुरा, मनीषा मार्केट, आकृति इको सिटी तथा बंसल अस्पताल तक की करीब 4 किलोमीटर सड़क का पेंचवर्क एक दिन में पूरा कर दिया। नगर निगम भी अपने क्षेत्राधिकार की सड़कों का मरम्मत कार्य तेजी से कर रहा है। कलेक्टर ने सभी एसडीएम को सड़क के पेंचवर्क और सुधार कार्य निगरानी के निर्देश दिए हैं।

शनिवार को संभागायुक्त कवींद्र कियावत ने नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, सीपीए व अन्य निर्माण एजेसियों की बैठक बुलाई। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि अगले 24 घंटे में रिजल्ट दिखना चाहिए। इसके बाद बैठक जल्द खत्म हो गई और सभी विभाग के अफसर अपने काम पर निकल गए।

पीडब्ल्यूडी ने 6 किमी कराया पेंचवर्क
लोक निर्माण विभाग ने करोद मंडी, कोलार रोड, ललिता नगर, हबीबगंज अंडर ब्रिज, गणेश मंदिर रोड, डी मार्ट कोलार रोड, भारत टॉकीज, लांबाखेड़ा से इस्लाम नगर की छह किमी सड़कों का पेंचवर्क पूरा किया। कई महीनों से लोग गड्डों में हिचकोले खा रहे थे।

सड़कों के नाम, खर्च का ब्यौरा भी मांगा

संभागायुक्त ने बैठक कर सभी एजेंसियों से सड़क के नाम, उस पर होने वाले निर्माण कार्य और समय-सीमा के मान, खर्चे से शनिवार को ही प्लान मांगा है। बैठक में कलेक्टर अविनाश लवानिया तथा आयुक्त नगर निगम वीएस कोलसानी चौधरी भी उपस्थित थे।

यहां होती रही है चूक
- सड़क बनाने के बाद उसे तीन साल तक मेंटेन करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी की होती है। अगर इस दौरान शहर में कहीं भी सीवर/ पानी/ टेलीफोन केबिल डालने के लिए अनुमति जारी होती है, वहां काम के बाद उसे उसी स्थिति में ठीेक करना है। लेकिन यहां इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। सड़कें फौरी तौर पर मिट्टी से भरकर छोड़ दी जाती हैं। नतीजा बरसात में वहीं से धंसने लगती हैं। उदाहरण डीआईजी बंगले की सड़क।

- बरसात शुरू होने के दो माह पहले तक जो सड़क खराब है, उसे कोई विभाग ठीक नहीं कराता। क्योंकि बरसात के बाद उन्हें फिर से सड़कों के रेस्टोरेशन कराना है। ऐसे में ये सोचकर की दो माह बाद काम कराना है सड़कें ऐसे ही छोड़ दी जाती हैं। नतीजा जो सड़क पहले ठीक हो सकती थी वो 70 फीसदी और डैमेज हो जाती है। उदाहरण होशंगाबाद रोड।

- ठेकेदारों की जमानत राशि जब्त कर सड़क सुधार का काम कराना चाहिए, लेकिन यहां अफसर और ठेकेदारों की साठगांठ का ही नतीजा है कि उनकी जमानत राशि कभी जब्त नहीं होती। एक दो केस को छोड़कर, विभाग फंड के इंतजार में सड़कों पर और गड्ढे होने देता है। नतीजा सड़क पूरी तरह बर्बाद हो जाती है।

- सड़क बनाते समय उनमें उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री (डामर, जीरा गिट्टी, बड़ी गिट्टी, मुरम, उसे समतल करने का तरीका) की जांच भी संबंधित विभाग को करानी चाहिए। कितने लेयर में सड़क बनी। पिछले 10 से 20 वर्षों में एक भी सड़क की जांच किसी विभाग ने एक्सपर्ट या लैब में मटेरियल भेजकर नहीं कराई।

भोपाल. फस्र्ट डोज के मामले में सौ फीसदी वैक्सीनेशन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इस बार महाअभियान के दौरान 25 और 26 अगस्त को दोनों दिन करीब पौने दो लाख टीके लगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें फस्र्ट डोज के लिए बचे हुए लोग और सेकंड डोज में वे लोग जो 84 दिन पूरे कर चुके हैं, उनको वैक्सीन लगाई जाएगी। एसडीएम सर्कल और नगर निगम में वार्ड स्तर पर टारगेट तय कर दिए हैं। नगर पालिका बैरसिया और फंदा के लिए अलग से टारगेट तय है। शनिवार को कलेक्टर अविनाश लवानिया ने महावैक्सीनेशन अभियान को लेकर अफसरों के साथ बैठक रखी, जिसमें बताया गया कि 25 अगस्त को शहर में करीब छह सौ से सात सौ सेंटरों पर वैक्सीनेशन किया जाएगा। महिला बाल विकास विभाग की तरफ से कराए गए सर्वे में भोपाल टॉकिज, कैटेग्राइज्ड मार्केट, सिंधी कॉलोनी, ऐशबाग, सिकंदर नगर, मोरारजी नगर, सोनिया गांधी कॉलोनी और जनता क्वार्टर ऐसे क्षेत्र सामने आए हैं जहां करीब 17 हजार लोगों ने पहला टीका नहीं लगवाया है।

प्रत्येक एसडीएम को आठ हजार वैक्सीन का टारगेट दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में छह एसडीएम 48 हजार, नगर निगम को 50 हजार, बैरसिया नगर पालिका 35 हजार और फंदा को 30 हजार का टॉरगेट दिया गया है। पिछले 7 माह में करीब अस्सी फीसदी आबादी को कोरोना वैक्सीन का पहला डोज और 24 फीसदी को दूसरा डोज लगा है। राजधानी में कोरोना की वैक्सीनेशन के लिए 19 लाख 30 हजार लोगों का टारगेट रखा गया है।

वार्ड-17 की स्थिति भी खराब
अब तक के वैक्सीनेशन अभियान के आंकड़ों के अनुसार वार्ड-17 में 8 हजार 645 लोगों ने पहला डोज नहीं लगाया है। इस वार्ड में भोपाल टॉकिज, कैटेग्राइज्ड मार्केट, सिंधी कॉलोनी से लेकर छोला नाके तक फैला है। इन लोगों को वैक्सीने लगाने की रणनीति भी बैठक में तैयार की गई है। यहां वार्ड और एसडीएम सर्किल दोनों स्तर पर टीकाकरण होगा।

2 लाख 45 हजार अभी भी पहले डोज से वंचित

राजधानी में 2 लाख 45 हजार लोगों ने अब तक पहला डोज नहीं लगवाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबार्डी कार्यकर्ताओं द्वारा ये जानकारी एकत्र की गई है। वार्ड-41 में भी 8 हजार 916 लोग ऐसे मिले हैं, जिन्होंने अब तक पहला डोज नहीं लगवाया हैं। इसमें ऐशबाग, सिकंदर नगर, मोरारजी नगर, सोनिया गांधी कॉलोनी और जनता क्वार्टर का क्षेत्र आता है।

वर्जन
हमारी कोशिश है कि फस्र्ट डोज को पूरा करने के साथ 84 दिन पूरे कर चुके लोगों को सेकंड डोज लगाई जाए। जिससे वे सुरक्षित हो सकें।

अविनाश लवानिया, कलेक्टर

भोपाल। टीकाकरण महाअभियान में मध्यप्रदेश ने अपना ही रिकार्ड तोेड दिया। इस बार प्रदेश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान में शनिवार 21 अगस्त को 4 लाख 12 हजार 275 व्यक्तियों को वैक्सीन की डोज लगाई गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड आंकड़ा 4 करोड़ के पार हो गया है।

संचालक एनएचएम, टीकाकरण डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि जनवरी से शुरू हुए कोविड-19 टीकाकरण अभियान में प्रदेश में अब तक 4 करोड़ 49 हजार 969 व्यक्तियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। अब तक हुए वैक्सीनेशन में 3 करोड़ 34 लाख 78 हजार 726 व्यक्तियों को वैक्सीन की प्रथम डोज और 65 लाख 71 हजार 243 व्यक्तियों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिये 25 एवं 26 अगस्त को पुन: महाअभियान प्रदेश में चलाया जायेगा।

इसके पहले 11.33 लाख का था रिकार्ड
मध्यप्रदेश में इसके पहले 23 जून को हुए टीकाकरण अभियान में एक दिन में 11 लाख 33 हज़ार 189 लोगों को वैक्सीन लगाने का रिकार्ड बन चुका है। इसके तीन दिन में 10 लाख से ज्यादा वैक्सिनेशन का रिकॉर्ड बनाया है। बुधवार को कोविन ऐप के मुताबिक 11 लाख से ज्यादा वैक्सीन लगाकर मध्यप्रदेश पहले नंबर पर रहा। मध्यप्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश है जहां 7,70,907 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र रहा जबकि इसके बाद गुजरात और कर्नाटक का नंबर था।

भोपाल. राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बंद करने का निर्देश दे दिए हैं। वास्तविकता में इसे बंद करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करना होगा। वजह, शहर के बड़े पार्कों और सभी प्रशासनिक भवनों का रखरखाव सीपीए के ही पास है। इसे बंद करने में करीब एक साल का समय लग सकता है। शहर में सीपीए की सड़कों का प्रतिशत बेहद कम है। शहर की करीब साढ़े चार हजार किलोमीटर लंबी सड़कों में सबसे अधिक सड़कें नगर निगम के पास हैं, जबकि दूसरे नंबर पर पीडब्ल्यूडी जिम्मेदार है। शहर में जो सड़कें खराब है, वह नगर निगम के सीवेज और जल प्रदाय प्रोजेक्ट में खुदाई में खराब हुई है। निगम ठेका एजेंसियों पर कार्रवाई करने की बजाय लगातार उन्हें समय दे रहा है। देनदारियों का निपटान व संपत्ति का सुनियोजित प्रबंधन समाप्ति के पहले किया जाना आवश्यक है। इसके अलावा यहां कार्यरत अमले का सुनियोजित संविलियन भी करना होगा। चरणबद्ध तरीके से मार्च 2022 तक ही इनकी समाप्ति होगी।

सीपीए संभालता है इनकी जिम्मेदारी
मंत्रालय वल्लभ भवन, भारत भवन, व्यावसायिक परीक्षा मण्डल भवन, वाल्मी परिसर, प्रशासन अकादमी परिसर, टीटी नगर स्टेडियम, प्रकाश तरुण पुष्कर, नवीन विधानसभा भवन, लोकायुक्त कार्यालय भवन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भवन, शौर्य स्मारक, राज्य संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय, ग्लोबल स्किल पार्क, सिटी कैम्पस आदि सीपीए ने ही विकसित किए।
इनका करना होगा हस्तान्तरण
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के भवन, भोपाल विकास योजना के कुछ मुख्य मार्गों का रखरखाव यहां से होता है, लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में एकांत पार्क, 7 एकड़ में मयूर पार्क, चिनार उद्यान, प्रियदर्शनी पार्क, स्वर्ण जयंती पार्क, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क, शाहपुरा पहाड़ी स्थित मोरवन, मंत्रालय के सामने स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान, ई-1 से ई-7 स्थित उद्यानों के अलावा नगर वन, बोरवन का रखरखाव का जिम्मा देना है।

राजधानी परियोजना प्रशासन को खत्म करने का निर्णय मुख्यमंत्री ने लिया है और जिस प्रक्रिया के तहत एजेंसी को बंद किया जाता है, उसका पालन करते हुए आगे कवायद की जाएगी।
- कवींद्र कियावत, संभागायुक्त

कई बैठकों से विधायक और सदस्य उठा रहे थे एक एजेंसी का मुद्दा
राजधानी में हर वर्ष बरसात के बाद यही स्थिति बनती है। संभागायुक्त कार्यालय में बैठकें होती हैं, कलेक्टर, निगमायुक्त निरीक्षण करते हैं। कुछ दिन पैचवर्क के बाद मामला शांत हो जाता है। कलेक्टोरेट में होने वाली जिला योजना समिति की बैठक में स्थानीय विधायकों, समिति सदस्यों की तरफ से सड़क की एक एजेंसी होने का कई बार प्रस्ताव पारित हुआ। अब जिम्मेदार एजेंसी का निर्णय शासन को करना है।

यहां होती रही चूक
शहर में कहीं भी सीवर, पानी, टेलीफोन केबल डालने के लिए अनुमति जारी होती है, उसे उसी स्थिति में ठीक करना होता है। लेकिन फौरी तौर पर मिट्टी से भरकर छोड़ दिया जाता है। उदाहरण डीआईजी बंगला रोड।
बरसात शुरू होने के दो माह पहले सड़क खराब होने पर कोई विभाग इसे ठीक नहीं कराता। क्योंकि बरसात के बाद उन्हें फिर से रेस्टोरेशन कराना होता है। ऐसे में वो 70 फीसदी और डैमेज हो जाती हैं। उदाहरण होशंगाबाद रोड।
ठेकेदारों की जमानत राशि जब्त कर सड़क सुधार का काम कराना चाहिए, लेकिन साठगांठ से जब्ती नहीं होती। विभाग फंड के इंतजार में सड़कों पर और गड्ढे होने देता है। नतीजा सड़क पूरी तरह बर्बाद हो जाती है।

लैब में नहीं कराई मटेरियल की जांच
सड़क बनाते समय उनमें उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री (डामर, जीरा गिट्टी, बड़ी गिट्टी, मुरम, उसे समतल करने का तरीका) की जांच भी संबंधित विभाग को करानी चाहिए। पिछले 10 से 20 वर्षों में एक भी सड़क की जांच किसी विभाग ने एक्सपर्ट या लैब में मटेरियल भेजकर नहीं कराई।
इस संबंध में संभागायुक्त कवींद्र कियावत का कहना है कि हर विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल अपनी सड़कों को ठीक कराएं। रहा सवाल अनुमति और उसकी जमानत राशि का तो उस पर भी विभाग कार्रवाई करते हैं। हम भी इसका रिव्यू कराते हैं।

भोपाल. पहले डोज के मामले में सौ फीसदी वैक्सीनेशन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इस बार महाअभियान के दौरान 25 और 26 अगस्त को दोनों दिन करीब पौने दो लाख टीके लगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें पहले डोज के लिए बचे हुए लोग और दूसरे डोज में वे लोग जो 84 दिन पूरे कर चुके हैं, उनको वैक्सीन लगाई जाएगी। एसडीएम सर्कल और नगर निगम में वार्ड स्तर पर टारगेट तय कर दिए हैं।

नगर पालिका बैरसिया और फंदा के लिए अलग से टारगेट तय है। शनिवार को कलेक्टर अविनाश लवानिया ने महा वैक्सीनेशन अभियान को लेकर अफसरों के साथ बैठक की, जिसमें बताया गया कि 25 अगस्त को शहर में करीब छह सौ से सात सौ सेंटरों पर वैक्सीनेशन किया जाएगा। महिला बाल विकास विभाग की तरफ से कराए गए सर्वे में भोपाल टॉकिज, कबाडख़ाना, सिंधी कॉलोनी, ऐशबाग, सिकंदर नगर, मोरारजी नगर, सोनिया गांधी कॉलोनी और जनता क्वार्टर ऐसे क्षेत्र सामने आए हैं जहां करीब 17 हजार लोगों ने पहला टीका नहीं लगवाया है। प्रत्येक एसडीएम को आठ हजार वैक्सीन का टारगेट दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में छह एसडीएम 48 हजार, नगर निगम को 50 हजार, बैरसिया नगर पालिका 35 हजार और फंदा को 30 हजार का टॉरगेट दिया गया है। पिछले सात माह में करीब अस्सी फीसदी आबादी को कोरोना वैक्सीन का पहला डोज और 24 फीसदी को दूसरा डोज लगा है। राजधानी में कोरोना की वैक्सीनेशन के लिए 19 लाख 30 हजार लोगों का टारगेट रखा गया है।

वार्ड-17 की स्थिति भी खराब
अब तक के वैक्सीनेशन अभियान के आंकड़ों के अनुसार वार्ड-17 में 8 हजार 645 लोगों ने पहला डोज नहीं लगाया है। इस वार्ड में भोपाल टॉकिज, कैटेग्राइज्ड मार्केट, सिंधी कॉलोनी से लेकर छोला नाके तक फैला है। इन लोगों को वैक्सीने लगाने की रणनीति भी बैठक में तैयार की गई है। यहां वार्ड और एसडीएम सर्किल दोनों स्तर पर टीकाकरण होगा।

2 लाख 45 हजार अभी भी पहले डोज से वंचित
राजधानी में 2 लाख 45 हजार लोगों ने अब तक पहला डोज नहीं लगवाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबार्डी कार्यकर्ताओं द्वारा ये जानकारी एकत्र की गई है। वार्ड-41 में भी 8 हजार 916 लोग ऐसे मिले हैं, जिन्होंने अब तक पहला डोज नहीं लगवाया हैं। इसमें ऐशबाग, सिकंदर नगर, मोरारजी नगर, सोनिया गांधी कॉलोनी और जनता क्वार्टर का क्षेत्र आता है।

हमारी कोशिश है कि फस्र्ट डोज को पूरा करने के साथ 84 दिन पूरे कर चुके लोगों को सेकंड डोज लगाई जाए। जिससे वे सुरक्षित हो सकें।
अविनाश लवानिया, कलेक्टर

भोपाल. निजी बस ऑपरेटरों की ओर से 25 फीसदी किराया बढ़ाने के बाद अब सिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम की लो फ्लोर एवं मिडी बसों का किराया बढ़ाने की तैयारी है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) ने लो-फ्लोर और मिडी बसों का किराया बढ़ाने का प्रस्ताव एक बार फिर परिवहन विभाग को भेजा है। प्रस्ताव में 20 फीसद तक बढ़ोतरी की मांग है। यदि लागू हुआ तो एमपी नगर से संत हिरदाराम नगर चिरायु अस्पताल तिराहे तक प्रति यात्री 20 की बजाए 25 रुपए किराया देना होगा। परिवहन विभाग ने प्रस्ताव पर सरकार की मंजूरी मांगी है। बीसीएलएल प्रबंधन का किराया बढ़ाने को लेकर कहना है कि बीते एक साल से डीजल के दामों में 17 रुपए तक बढ़ोतरी हुई है। अब डीजल 98 से 100 रुपए के बीच मिल रहा है। अभी परिवहन विभाग ने किराया बढ़ाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। यदि किराया बढ़ता है तो आम जनता की जेब पर भार आना तय है। लॉकडाउन के कारण सिटी बसों का संचालन बंद रहा। अनलॉक में 30 फीसद ही यात्री बसों में सफर कर रहे हैं।

वर्ष 2019 में बढ़ा था किराया
बीसीएलएल ने साल 2019-20 में सिटी बसों के किराए में 20 फीसद की बढ़ोतरी की थी। उस समय डीजल 81 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। अब अनलॉक में 13 मार्गों पर कुल 72 बसों का संचालन होने लगा है। अभी छह मार्गों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। एमपीनगर से संत हिरदाराम नगर, बैरागढ़ चीचली से करोंद, सलैया से भैंसाखेड़ी, गांधी नगर से मंडीदीप, अवधपुरी से भैंसाखेड़ी मार्ग पर बसों का संचालन बीसीएलएल कर रहा है। आगामी दिनों में बाकी मार्गों पर भी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।

शासन की मंजूरी के बाद लागू करेंगे
किराया बढ़ाने का प्रस्ताव है। शासन की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा।
संजय सोनी, प्रवक्ता, बीसीएलएल

बीसीएलएल ने बसों के पास की वैधता अवधि एक माह बढ़ाई

बीसीएलएल की तरफ से चलाई जा रही बसों में यात्रियों की सुविधा के लिए मासिक स्मार्ट पास एवं मोबाइल पास जारी किये गए थे। लेकिन 12 अप्रैल के बाद लॉकडाउन लागू होने से बसों का संचालन बंद हो गया, जो कि अनलॉक होने के बाद फिर से एक जून से शुरू हुआ। जिन्होंने लॉकडाउन लागू होने के पूर्व (12 मार्च से 11 अप्रैल के बीच) मासिक स्मार्ट पास एवं मोबाइल पास बनवाये हैं, उन यात्रियों की तरफ से लगातार पास/कार्ड में समयावृद्धि की मांग की जा रही थी। ऐसे लोगों की मांग के बाद लॉकडाउन की अवधि में बनवाए गए पास/कार्ड दिनांक 23 अगस्त से 22 सितम्बर तक एक माह के लिए वैध किए जा रहे हैं। कार्यालयीन समय में आईएसबीटी स्थित बीसीएलएल पीओएस में सम्पर्क कर अपने उक्त पास की शेष वैधता में अवधि बढ़वा सकते हैं। इस के लिए यात्री को अपना मूल पास एवं आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा।

भोपाल . भाई बहन के पवित्र प्रेम का पर्व रविवार को कई शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। तिथि, दिन, ग्रह, नक्षत्र और शुभ योगों के मेल से इस पर्व की शुभता और अधिक बढ़ गई है। इस बार भद्रा सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा। इस बार गायत्री शक्तिपीठ की ओर से संकल्प का रक्षाबंधन मनाया जाएगा।

भाई बहन के पवित्र प्रेम के पर्व रक्षाबंधन का उत्साह शहर में नजर आने लगा है। एक ओर घरों में रक्षाबंधन की तैयारियां जोर शोर से चल रही है, वहीं बाजारों में भी जमकर खरीदारी का सिलसिला चल रहा है। शहर के बाजार गुलजार है और बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। बाजारों में खरीदारी का सिलसिला देर रात तक चल रहा है।

बच्चों को लुभाएं मोटू-पतलू
शहर के बाजारों में बच्चों को लुभाने के लिए कार्टून पैटर्न पर मोटू पतलू, लिटिल कृष्णा, छोटा भीम, सहित कई वैरायटियों की राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें है, इसी तरह बड़ों के लिए रेशम की डोर के साथ-साथ अमरीकन डायमंड लगी राखियां भी अधिक पसंद की जा रही है।

सूर्योदय के पहले समाप्त हो जाएगी भद्रा
आ मतौर पर हर साल रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा की स्थिति बन जाती है, लेकिन इस बार भद्रा सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए राखी बांधने के लिए पूरा दिन शुभ रहेगा। भद्रा का दोष नहीं रहेगा। पं. जगदीश शर्मा ने बताया कि राहू काल शाम को 4:30 से 6 बजे तक रहेगा। राहूकाल को छोड़कर पूरा दिन राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ रहेगा।

गायत्री शक्तिपीठ: बहने लेंगी भाईयों से संकल्प
गा यत्री शक्तिपीठ की ओर से रक्षाबंधन पर्व संकल्प पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस बार शक्तिपीठ की ओर से बहनों से अपील की गई है कि वे अपने हाथ से बनी राखी भाइयों को बांधे साथ ही अपने क्षेत्र में रहने वाले नर्सिंग होम, हॉस्पिटल के डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ को भी यथासंभव राखी बांधने का प्रयास करें। साथ ही रक्षाबंधन पर भाईयों से संकल्प पत्र भराएं, जिसमें व्यसन त्यागने और पौधरोपण करने का संकल्प लिया जाएगा।

बाजारों में लगी भीड़
र क्षाबंधन पर्व के चलते शहर के बाजारों में शनिवार को कपड़ा, राखियां, मिठाई, गिफ्ट सहित अन्य दुकानों पर भारी भीड़ का नजारा दिखाई दिया। लोग रात्रि तक खरीदारी करते नजर आए। न्यू मार्केट में चहल पहल देखी गई और लोग खरीदारी करते रहे।

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