>>: Digest for February 06, 2021

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छतरपुर। सस्ते मकानों के जरिए प्रत्येक आवासहीन व्यक्ति को मिलने वाले अपने घर का सपना चकनाचूर होता नजर आ रहा है। केन्द्र सरकार से 3 साल पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने छतरपुर को इस बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट की सौगात दी थी। लेकिन जैसे ही 2 साल पहले मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ 50 करोड़ रूपये की लागत से बने भवनों का बजट कांग्रेस सरकार ने रोक दिया। बजट पर ग्रहण लगते ही नगर पालिका की प्राथमिकताएं भी बदल गईं और तब से लेकर अब तक प्रोजेक्ट अटका हुआ है।


ये है पूरा मामला
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छतरपुर नगर पालिका को कुल 1716 आवास निर्माण कर जरूरतमंद लोगों को नो प्रोफिट-नो लोस पर बेचने के लिए अफॉर्डेबिल हाउसिंग प्रोजेक्ट (एएचपी) की स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत 1248 ईडब्ल्यूएस, 312 एलआईजी और 156 एमआईजी बहूमंजिला मकानों का निर्माण किया जाना था। तत्कालीन नगर पालिका की परिषद ने इस बड़े प्रोजेक्ट को हांथों-हाथ लिया और गौरईया रोड पर आवंटित जमीन को अपने कब्जे में लेकर तत्काल मकान बनाना शुरू कर दिये। पहले चरण में 72 ईडब्ल्यूएस, 60 एलआईजी और 96 एमआईजी बहूमंजिला भवनों का निर्माण 90 प्रतिशत पूर्ण हो गया लेकिन तभी मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया और इन 90 प्रतिशत निर्मित भवनों के पूरा होने का काम अटका गया।


ठेकेदार का पैमेंट भी रोका
सूत्र बताते हैं कि इस बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट का टेंडर झांसी के रमेश चन्द्र गुप्ता को मिला था। गुप्ता ने इन भवनों का निर्माण किया लेकिन बाद में उन्हें मिलने वाला 6 करोड़ रूपये का पैमेंट तत्कालीन कांग्रेस सरकार के जनप्रतिनिधियों ने रूकवा दिया जिस कारण ठेकेदार ने भी आगे का काम करने से मना कर दिया। अगर नगर पालिका द्वारा इस प्रोजेक्ट को निर्मित करने वाले ठेकेदार का भुगतान कर दिया गया होता तो अब तक यह भवन न सिर्फ गुलजार हो गए होते बल्कि दूसरे चरण के भवनों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच गया होता।

खरीददारों का भी पैसा फंसा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना के शुरू होने पर खरीददारों ने रूचि ली। भवनों के निर्माण कार्य के दौरान ही लगभग 23 खरीददारों ने बुकिंग राशि जमा कर एलआईजी-एमआईजी बुक कर लिए थेे। अब उनका भी बुकिंग का पैसा फंसा हुआ है और वे नगर पालिका के चक्कर काट रहे हैं। गरीब लोगों को सस्ती में दिए जाने वाले ईडब्ल्यूएस का आवंटन भी नहीं हो पा रहा है।

छतरपुर। घरों से लापता नाबालिग लड़के-लड़कियों को तलाशने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर 6 जनवरी से 31 जनवरी तक चले मुस्कान अभियान के अंतर्गत छतरपुर पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के निर्देशन में जिले की पुलिस टीम ने शानदार सफलता हासिल की है। पुलिस ने महज 25 दिनों में 8-10 साल से लापता चल रहे 108 नाबालिगों को बरामद करने में सफलता हासिल की है जिन लोगों को दस्तयाब किया गया है उनमें 102 लड़कियां और 6 लड़के शामिल है। जब ये लोग घरों से लापता हुए थे तब इनकी उम्र 18 साल से कम थी लेकिन अब ज्यादातर बालिग हो चुके हैं।

पुलिस ने इस अभियान के अंतर्गत जिला स्तर पर एक समीक्षा समिति कर जिला स्तरीय समिति गठित की थी जो ब्लाक स्तर पर बनाई गई टीमों की नियमित मॉनीटरिंग करती रही। जिले के लगभग डेढ़ दर्जन थाना क्षेत्रों से वर्ष 2011 से लापता 416 नाबालिग बालक-बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए गए इस अभियान के अंतर्गत सिर्फ 25 दिनों में ही 108 बालक-बालिकाओं को खोजा गया जबकि पूरे साल में कुल 216 बालक-बालिकाओं को पुलिस ने खोज निकाला। मुस्कान अभियान के अंतर्गत पुलिस द्वारा दिखाई गई इस सक्रियता के चलते लगभग 45 फीसदी मामले सिर्फ 25 दिनों में ही निराकृत कर दिए गए।

देश भर से खोजी गयीं लापता लड़कियां
मुस्कान अभियान के अंतर्गत पुलिस ने उप्र, दिल्ली, हिमाचल, गुजरात, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, झारखण्ड, चंडीगढ़, नोएडा, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित मप्र के ही कई शहरों में मौजूद लापता और अपहृत 102 लड़कियों को खोज लिया। इसके अलावा 6 लड़कों को भी पुलिस ने बरामद किया है। सबसे दिलचस्प मामला पिपट थाना क्षेत्र से सामने आया था। पिपट पुलिस ने एक 15 वर्षीय लापता लड़की की तलाश करते हुए उसे पाकिस्तान बॉर्डर से सटे जम्मू कश्मीर के अरनिया जिला अंतर्गत ग्राम ब्यासपुर से खोज लिया था। लड़की जिस लड़के के साथ रह रही थी उसके तीन माह की गर्भवती भी थी। इस अभियान के अंतर्गत बक्स्वाहा, भगवां पुलिस ने दो-दो, खजुराहो, गुलगंज, बमीठा, कोतवाली छतरपुर, सिविल लाइन, ओरछा रोड, सरवई, बमनौरा, महाराजपुर, गौरिहार, राजनगर पुलिस ने एक-एक, नौगांव, हरपालपुर, जुझारनगर ने 3-3, चंदला पुलिस ने 4, लवकुशनगर ने 5 विशेष मामलों में लापता और अपहृत लड़के-लड़कियों की तलाश की।

इस तरह खोजे गए लापता लोग
पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत लापता और अपहृत लोगों की तलाश के लिए पुलिस ने गुमशुदा के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, संपर्क में आए लोगों के मोबाइल नंबर, एटीएम केवाईसी, ऑनलाइन मनी ट्रांसफर रिकार्ड, बैंक अकाउंट रिकार्ड के आधार पर पड़ताल शुरू की। इसके अलावा पुलिस ने परिजनों, पड़ोसियों और मुखबिरों के माध्यम से लापता लोगों की खोजबीन शुरू की तब जाकर ये कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक ने जिले की टीम द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन की सराहना की है।

छतरपुर। तेवड़ा खरपतवार मानव शरीर के लिए घातक है। इसमें पाया जाने वाले न्यूरोटॉक्सिन का शरीर में संचयन होने पर मनुष्य में लकवा जैसी घातक बीमारी होती है। इसीलिए तेवड़ा खरपतवार को जड़ से नष्ट करने के लिए जरूरी है कि खेत में ही इसका उन्मूलन किया जाए। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय नौगांव द्वारा छतरपुर जिले के कृषकों से अपील की गई है कि चने की फसल में उपजे तेवड़ा खरपतवार जिसे घास मटर के नाम से भी जाना जाता है को नष्ट करना मानवीय जीवन के लिए अनिवार्य है।

कृषक जिनकी चने की फसल 60 से 70 दिन की अवस्था पर है उनके लिए इस समय तेवड़ा खरपतवार को उखाड़कर फेंकने का सबसे उचित समय है। इस अवस्था में खरपतवार में पुष्पन एवं फलन की प्रक्रिया प्रारंभ हो रही होती है। इसीलिए इसे जड़ से समाप्त करने के लिए यह अवस्था उपयुक्त है। खरपतवार को समाप्त करने से कृषक के चने की फसल साफ एवं स्वच्छ होती है और तेवड़ा खरपतवार रहित उपार्जन को बेचने पर कृषकों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता है। चने की खड़ी फसल में तेवड़ा खरपतवार के प्रकोप की स्थिति है तो हाथों द्वारा प्रथम निंदाई 40 से 45 दिन की अवस्था पर और द्वितीय निंदाई 60 से 65 दिन क अवस्था पर जरूर करें।

ऐसे कृषक जिनकी चना फसल में तेवड़ा का पौधा प्रतिवर्ष दृष्टिगत होता है वह फसल चक्र पद्धति अपनाएं और खरपतवार के उपयुक्त प्रबंधन के लिए रासायनिक नींदानाशक दवा फ्लूक्लोरालीन (वैसालीन) 50 प्रतिशत, ई.सी. का 0.75 किलोग्राम सक्रिय तत्वों प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के समय पर प्रयोग करें। ऐसा करने से तेवड़ा खरपतवार पर 80 प्रतिशत तक नियंत्रण पाया जा सकता है। इस प्रयोग से आगामी चने की फसल में खरपतवार आने की संभावना न्यूनतम रहती है।

जागरुक करने के लिए ग्राम सभा का होगा आयोजन
कलेक्टर छतरपुर शीलेन्द्र सिंह ने कहा कि चने की फसल से तेवड़ा खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसानों को जागरूक करने के साथ ही जनपद कार्यालय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के साथ कृषि स्थाई समिति की बैठक करने के साथ पंचायत स्तर पर ग्रामसभा आयोजित की जाए। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, जनपद पंचायतों के सीईओ तथा विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को संबोधित पत्र में अवगत कराया गया है कि 15 मार्च से चने के साथ-साथ मसूर, सरसों का उपार्जन शुरू होगा। उपार्जन केन्द्रों से समर्थन मूल्य पर तेवड़ा रहित चना किया जाएगा। इसके लिए किसानों को खेतों से तेवड़ा खरपतावार के पौधे को नष्ट करने के लिए जागरूक बनाएं तथा एसडीओ राजस्व अनुविभाग क्षेत्र में तेवड़ा खरपतवार को नष्ट करने के लिए शुरू किए गए अभियान के कार्यों की प्रति सप्ताह समीक्षा करें।

बड़ामलहरा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने शुक्रवार को 25 करोड रुपये की नलजल योजना का ऑनलाइन शिलान्यास किया। काठन नल जल योजना अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में पेयजलापूर्ति की जाएगी। योजना से आगामी 30 वर्षों तक पेयजल संकट से निजात मिलनें की संभावना व्यक्त की जा रही है। विधायक प्रधुम्न सिंह लोधी के प्रयास से बडामलहरा नगर को नल जल योजना के माध्यम से एक बडी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 करोड रुपये की लागत से तैयार नलजल योजना का ऑनलाइन शिलान्यास किया। विधायक प्रधुम्न सिंह लोधी ने चर्चा में बताया कि, भविष्य को ध्यान में रखकर यह बडी योजना तैयार की है योजना अंतर्गत काठन नदी का जल नलों के माध्यम से नगरीय क्षेत्र के वासिंदों को घरों में पहुंचाया जाऐगा। इससे आगामी 30 वर्षों तक नगरीय क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति हो सकेगी इससे पेयजल समस्या से छुटकारा मिलेगा। वर्तमान में बडामलहरा नगरीय क्षेत्र में 18 हजार 335 जनसंख्या निवासरत है। आगामी वर्ष 2050 की जनसंख्या वृृद्धि दर को ध्यान में रखकर 30 हजार 356 जनसंख्या के हिसाब से योजना बनाई गई है।

उन्होनें बताया कि, 27 माह में परियोजना का कार्य पूर्ण होनें की अवधि तय की गई है। पेय जलापूर्ति के लिए गरखुवां घाट स्थित काठन नदी से नगर में 42 किलो मीटर पाइप लाइन बिछाई जाऐगी। परियोजना संधारण एवं संचालन की जिम्मेदारी 10 वर्षों तक ठेकेदार द्वारा रहेगी। वृहद पेयजल परियोजना की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चर्चा के दौरान सीएमओ प्रदीप रिछारिया, पीआईयू सीएस वाथम, डॉ रमेश असाटी, मानिक शर्मा के अलावा अन्य लोग मौजूद रहे।

योजना एक नजर में
जल स्रोत - काठन नदी
निर्माण अवधि- 27 माह
अनुमानित लागत- 2143.31 लाख रुपये
10 वर्षों की संचालन व संधारण, अनुमानित लागत - 605.23 लाख रुपये
कुल अनुमानित लागत - 2748.54 लाख रुपये
जल शोधन संयंत्र - 3.0 एमएमडी
जल प्रदाय कनेक्शन - सभी घरों में

काठन जल नगर में लाने की कवायद पुन: शुरु
काठन नदी के जल से नगरीय क्षेत्र की प्यास बुझाने की योजना पर 15 वर्ष पूर्व 2005 में भी काम शुरु हुआ था। लेकिन विभागीय उदासीनता से यह योजना टांयटांय फिस्स हो गई। एक बार पुन: नये सिरे नलजल योजना तैयार होनें से से स्थानीय लोगों में खुशी है और आशा है कि, निर्धारित समय में योजना पूरी हो जाऐगी। बीती योजना अंतर्गत नलजल के लिए 231.43 लाख रुपये का बजट आवंटित हुआ था। निर्माण ऐजेंसी पीएचई विभाग ने ठेका पद्धति से योजना पर काम शुरु किया। योजना के तहत काठन नदी पर इंटेकवेल, गरखुवां रोड पर 65 लाख लीटर क्षमता वाली 20 मीटर ऊंची 35 लाख रुपये की लागत से पानी की टंकी खडी की है। साथ ही जल शोध यंत्र का निर्माण भी किया और नगरीय इलाके के आधे हिस्सा में पाइप लाइन डालकर टेस्टिंग भी की गई। लंबी कवायद के बाद नलजल योजना का काम ठप हो गया। करोडों रुपये की लागत से तैयार नलजल योजना पर विभागीय लापरवाही से बेकार पडी है। विधायक प्रधुम्न सिंह लोधी ने एक बार पुन: काठन नदी पेयजल योजना तैयार की है।

बड़ामलहरा। कानपुर सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार तडके बस व ट्रक में भीषण टक्कर हो गई। घटना में आधा दर्जन यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बड़ामलहरा सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र मेंं प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। बस परिचालक की रिपोर्ट पर ट्रक चालक के विरुद्ध प्रकरण कायम किया गया।

नेशनल हाइवे स्थित ग्राम घिनौची के पास सुबह 5.40 बजे के आसपास यात्री बस क्रमांक एमपी 16 पी 0432 व ट्रक में टक्कर हो गई। घटना में बस परिचालक रमेश अवस्थी (43) निवासी छतरपुर, क्लिंजर बहीद अली (31) निवासी रगौली, बीके बहन मोनिका (36), सूरज रैकवार निवासी बडामलहरा, संतोष बिछोले (39) निवासी नौगांव, कन्हई पाल (45) निवासी दरगुवां सहित 6 लोग घायल हुए है। सडक दुर्घटना के बाद 100 डायल पुलिस व एम्बूलेंस की मदद से घायलों को बडामलहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।

यात्री बस बुंदेलखंड मोटर ट्रांसपोर्ट कंपनी की बताई गई है और भोपाल से छतरपुर की ओर जा रही थी। बताया जाता है कि, बस में करीब 30 यात्री सवार थे। जबकि, ट्रक ग्राम घिनौची के पास सडक किनारे खडा था। तेज रफ्तार यात्री बस ने ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी। तेज टक्कर से ट्रक के परखच्चे उड गए और 50 फ ीट दूर खेत में घुस गया जबकि, बस का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया। बस परिचालक रमेश पिता रमाशंकर अवस्थी (43) निवासी विश्वनाथ कालौनी छतरपुर की रिपोर्ट पर अज्ञात ट्रक चालक के विरुद्ध लापरवाही पूर्वक ड्राइविंग,मानव जीवन को खतरा उत्पनन करने के अपराध में के स दर्ज किया गया है। ट्रक क्षतिग्रस्त होने से नंबर ज्ञात नहीं हो सका है। इंजन और चेसिस नंबर से पुलिस ट्रक व मालिक की पहचान करेगी। गुलगंज थाना प्रभारी धर्मेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि प्रथम दृष्टया बस परिचालक की रिपोर्ट पर अज्ञात ट्रक चालक पर मामला दर्ज किया गया है। निवेचना के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

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