>>: परिसीमन के बाद बदल गई तस्वीर, शहडोल संसदीय सीट में पूरा जिला शामिल नहीं, रिटर्निंग अफसर भी अनूपपुर कलेक्टर

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शहडोल. शहडोल संसदीय सीट में पूरा शहडोल जिला भी शामिल नहीं है। परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों में बदलाव के साथ ही लोकसभा का मुख्यालय भी बदल गया। नाम तो शहडोल संसदीय सीट ही रहा लेकिन लोकसभा का मुख्य केन्द्र बिन्दु अनूपपुर कहलाने लगा। इसके बाद से सभी चुनावी गतिविधियों का संचालन वहीं से प्रारंभ हो गया। पिछले चार लोकसभा चुनाव से सभी गतिविधियां वहीं से संचालित हो रही है। यहां तक कि लोकसभा चुनाव आते ही राजनीतिक केन्द्र बिन्दु भी अनूपपुर ही कहलाने लगता है। सभी राजनीतिक गतिविधियों का संचालन यहीं से होता है। आरओ अनूपपुर कलेक्टर होने की वजह से सभी चुनावी प्रक्रियाएं भी वहीं से होती हैं। अभी तक के जो राजनीतिक समीकरण बने हैं वह भी सबसे ज्यादा अनूपुपर से ही बने हैं। शहडोल संसदीय सीट से सर्वाधिक सांसद अनूपपुर जिले से ही चुने गए हैं। इस बार भी भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ से हैं। कहा जाए तो नाम के लिए शहडोल संसदीय सीट है सभी चुनावी व राजनीतिक गतिविधियों का संचालन अनूपपुर मुख्यालय से ही होता है। शहडोल संभागीय मुख्यालय होने के साथ ही संसदीय सीट की पहचान भी इसी से है लेकिन चुनावी गतिविधियों के लिए निर्भरता अनूपपुर पर ही है।
शहडोल से कोई नहीं बना सांसद
शहडोल जिले से एक भी सांसद नहीं बना है। अब तक संसदीय चुनाव में शहडोल की राजनीति में अधिकांश सांसद पुष्पराजगढ़ क्षेत्र से ही चुने गए हैं। 1962 में सीट शहडोल के नाम हुई थी। संसदीय चुनाव में शहडोल जिले में आरओ और अन्य राजनीतिक गतिविधियां न होने की वजह से अधिकांश स्टार प्रचारक व बड़े नेताओं का आगमन अनूपपुर से ही शुरू होता है। नामांकन से लेकर परिणाम की घोषणा तक ही प्रक्रिया अनूपपुर से ही तय होती है।
परिसीमन के बाद हुआ बदलाव
राजनीति से जुड़े जानकारों की माने तो परिसीमन के पहले शहडोल संसदीय सीट का मुख्यालय शहडोल जिला ही था। लोकसभा चुनाव की सभी गतिविधियों का संचालन संभागीय मुख्यालय से होता था। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद शहडोल जिले की ब्यौहारी विधानसभा सीट को सीधी संसदीय सीट में शामिल कर दिया गया। वहीं कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा सीट शहडोल संसदीय सीट में शामिल हो गई। इसके परिणाम यह हुए कि अनूपपुर में सर्वाधिक तीन विधानसभा सीट होने की वजह से आरओ कलेक्टर अनूपपुर को बना दिया गया।
शहडोल मुख्यालय से हुए 14 लोस चुनाव
वर्ष 1952 से 2004 के बीच शहडोल संसदीय सीट का मुख्यालय शहडोल ही रहा है। इस बीच 14 लोकसभा चुनाव यहीं से हुए। इस दौरान शहडोल जिला होता था और इसकी सभी विधानसभा सीटों को मिलाकर शहडोल संसदीय सीट बनाई गई थी। इसके बाद शहडोल को संभागीय मुख्यालय का दर्जा मिला और इससे अनूपपुर व उमरिया को अलग जिला बना दिया गया। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद लोकसभा सीट का क्षेत्र भी बदल गया और चार जिलों की विधानसभा सीटों को मिलाकर शहडोल संसदीय सीट बनी।
2009 में अनूपपुर कलेक्टर को आरओ का दर्जा
लोकसभा चुनाव में वर्ष 2009 से कलेक्टर अनूपपुर को आरओ का दर्जा मिला। इसके बाद 2009, 2014, 2016 और 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद अब 2024 का लोकसभा चुनाव भी आरओ अनूपपुर के देखरेख में ही हो रहा है। नामांकन दाखिल करने से लेकर चुनाव परिणाम तक की सभी प्रक्रियाएं अब अनूपपुर मुख्यालय से ही हो रही है। इसके लिए सभी प्रत्याशियों को अनूपपुर मुख्यालय ही पहुंचना होता है। साथ ही निर्वाचन से संबंधित कोई भी कार्य हों वह अनूपपुर मुख्यालय से ही होते हैं।

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