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फीस के भी नहीं थे पैसे, बेचा पोहा-चाय, फिर 17 वें साल में हुआ कुछ ऐसा कि बदल गई जिंदगी Monday 25 March 2024 11:34 AM UTC+00 CM Mohan Yadav birthday program canceled - मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज यानि सोमवार को जन्मदिन है। उनका जन्म 25 मार्च 1965 को उज्जैन में हुआ था। होली के साथ अपने 59 वें जन्मदिन (59th Birthday) को सेलिब्रेट करने के लिए उन्होंने सीएम हाउस में कार्यक्रम रखा था लेकिन उज्जैन में हुए हादसे के बाद इसे स्थगित कर दिया। मुख्यमंत्री के बर्थडे birthday के मौके पर हम आपको डॉ. यादव के संघर्ष की कहानी बता रहे हैं। सीएम की रेस में डॉ. मोहन यादव का नाम कहीं नहीं थाउज्जैन दक्षिण से विधायक डॉ. मोहन यादव को विधानसभा चुनावों के बाद जब शिवराजसिंह चौहान के स्थान पर बीजेपी विधायक दल का नया नेता चुना गया तब हर कोई हैरान रह गया था। सीएम की रेस में डॉ. मोहन यादव CM Mohan Yadav का नाम कहीं था ही नहीं लेकिन बीजेपी आलाकमान ने उनपर भरोसा जताया। शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार में मोहन यादव कैबिनेट मंत्री थे।तीसरी बार विधायक बनने के साथ ही एमपी के सीएम बने डॉ. मोहन यादव बेहद साधारण परिवार के हैं। उनका बचपन तो बेहद तंगी में गुजरा। डॉ. यादव के पिता एक मिल में मामूली तनख्वाह की नौकरी करते थे। पिता की कमाई कम थी लेकिन परिवार की जरूरतें ज्यादा थीं। हाल ये था कि उनके पास स्कूल की फीस देने के भी नहीं रहते थे। मोहन यादव के एक टीचर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाते थे। परिवार का खर्च चलाने के लिए पिता और चाचा ने मालीपुर इलाके में चाय-पोहे और भजिए की दुकान खोली। यहां उनकी जिंदगी में 17 वें साल में तब टर्निंग प्वाइंट आया जब वे एबीवीपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। यहां से प्रारंभ हुआ उनका राजनैतिक सफर इतनी तेजी से बढ़ा कि फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। दरअसल उनकी आरएसएस की पृष्ठभूमि ने ही उन्हें राज्य के प्रमुख पद पर पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। सन 1982 में एबीवीपी और इसके बाद भाजयुमो में काम करते हुए मोहन यादव संघ में भी लगातार सक्रिय रहे। 1982 में चाय—पोहे की होटल से ही वे पढ़ाई के साथ छात्र राजनीति में कूद पड़े थे। 1984 में छात्र संघ का अध्यक्ष का चुनाव जीतकर अपना परचम लहरा दिया। छात्र संघ के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने सराफा में रेस्टोरेंट भी चालू कर दिया। राजनीतिक करियर |
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