छिंदवाड़ा. राज्य शासन की सबसे महत्वपूर्ण लाड़ली बहना योजना में जिले की 5660 महिलाएं 60 वर्ष की आयु पार होने पर बाहर हो गई है तो वहीं 375 हितग्राहियों ने स्वयं ही हित लाभ त्याग दिया है। केवल 4 लाख 70 महिलाएं ही इस योजना में शेष बताई गई है।
महिला बाल विकास विभाग के पोर्टल के अनुसार छिंदवाड़ा और पांढुर्ना जिले में मई से दिसम्बर 2023 तक 4 लाख 7 हजार 38 महिलाओं का पंजीयन किया गया था। इनमें से इस माह जनवरी में केवल 4 लाख 70 महिलाओं के खाते में 1250 रुपए प्रति हितग्राही के हिसाब से 48 करोड़ रुपए डाले गए। शेष महिलाओं के नाम काटे जाने पर काफी होहल्ला मचा।
इस जब मामले की खोजबीन की गई तो पोर्टल में उपलब्ध जानकारी से पूरा सच निकलकर सामने आया। इस पोर्टल में 60 वर्ष की आयु तथा हितलाभ त्याग करने वाली महिलाओं की संख्या तो है ही, साथ ही योजना में 690 महिलाएं अपात्र तथा 23 महिलाएं मृत होना बताई गई है। इसके अलावा समग्र से डिलीट 74 तथा आधार से समग्र का संपर्क टूटने में 91 महिलाएं है। इस वजह से लाड़ली बहनोंं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता 9 अक्टूबर 23 से पहले लाड़ली बहनों की रजिस्टर्ड संख्या 4.15 लाख बताई गई थी। इनमें से आठ हजार महिलाओं के नामों को स्वीकृति नहीं मिल सकी। विभागीय जानकारी में केवल 4 लाख 7 हजार महिलाओं के आवेदन मिलना बताए गए। उसके बाद अपात्र, साठ वर्ष की आयु, लाभ त्याग, मृत, समग्र से डिलीट नाम हटाए गए। इससे शेष संख्या 4 लाख महिलाओं की है।
मकर संक्रांति पर्व से पहले लाड़ली बहना योजना के 48 करोड़ रुपए आने से गरीब वर्ग की महिलाएं त्योहार बेहतर ढंग से मना सकेगी। इसके साथ ही त्योहारी खरीदी-बिक्री से बाजार में नगदी आएगी। इससे शहरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। व्यवसायी मान रहे हैं कि पिछले जून माह से लगातार लाड़ली बहना की राशि प्राप्त होने से गरीब महिलाओं की हाथों में क्रय शक्ति आई है। वे खान-पान की चीजों के साथ मनपसंद वस्तुएं खरीदने उत्सुक हुई है। इससे बाजार की गतिविधियां भी तेज हुई है।