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College: प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे जिले के 16 में से 15 शासकीय कॉलेज Saturday 20 January 2024 07:06 AM UTC+00 छिंदवाड़ा. जिले के अधिकतर शासकीय कॉलेजों में अध्ययन व्यवस्था लडखड़़ाई हुई है। दरअसल इन कॉलेजों की कमान प्रभारी प्राचार्यों के हाथों में है। ऐसे में कॉलेज में पदस्थ प्राध्यापक भी इनकी नहीं सुन रहे हैं। आलम यह है कि प्राध्यापक बायोमैट्रिक अटेंडेंस लगाने के बाद कॉलेज से नदारद हो जा रहे हैं और फिर शाम को वापस कॉलेज पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ शासन लगातार उच्च शिक्षा में सुधार के लिए भले ही नियमित अंतराल पर सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए यह काफी नहीं है। बड़ी बात यह है कि जिले में 16 शासकीय कॉलेज संचालित हैं। इनमें से मात्र एक शासकीय कॉलेज अमरवाड़ा में ही डॉ. शिवचरण मेश्राम स्थाई प्राचार्य के रूप में पदस्थ हैं। शेष 15 कॉलेज प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां सहित अन्य कार्य किस तरह से चल रहे होंगे। कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र आरंभ हुए चार माह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अधिकतर संकाय में अध्यापन व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। छिंदवाड़ा जिले में लीड कॉलेज की जिम्मेदारी भी प्रभारी प्राचार्य के कंधों पर है। जिले में शासकीय कॉलेज अमरवाड़ा में ही नियमित प्राचार्य पदस्थ हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो विभाग में सीनियर प्राध्यापकों के सेवानिवृत्ति के बाद अथवा पद खाली होने की स्थिति में उन पदों को प्रमोशन के जरिए नहीं भरा जा रहा है। पिछले करीब एक दशक से कॉलेजों में वरिष्ठता के आधार पर शिक्षकों को प्रमोट नहीं किया गया है। यही कारण है कि शासकीय कॉलेजों में प्राचार्य के पद खाली पड़े हुए हैं।
स्थायी प्राचार्य न होने से नुकसान
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